भारत के लगभग 40 प्रतिशत जिलों में कोई सरकारी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन नहीं है: अध्ययन

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भारत के लगभग 40 प्रतिशत जिलों में कोई सरकारी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन नहीं है: अध्ययन

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 05:38 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 05:38 PM IST

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) भारत के लगभग 40 प्रतिशत जिलों में कोई सरकारी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन नहीं है जिसकी वजह से लाखों लोग हवा के बारे में विश्वसनीय और समयबद्ध जानकारी नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। मंगलवार को जारी एक अध्ययन में यह बात कही गई है।

‘एयर क्वालिटी डेटा एक्सेसिबिलिटी इन इंडिया: डिस्ट्रीब्यूशन, गैप्स एंड नेटवर्क कोरिलेशन’ शीर्षक वाला यह अध्ययन एयरवॉइस नामक एक वैश्विक कंपनी ने जारी किया है जो वायु गुणवत्ता की निगरानी और प्रबंधन के समाधान तैयार करती है।

अध्ययन के लेखकों ने भारत की तीन मुख्य निगरानी प्रणालियों ‘नेशनल एयर निगरानी प्रोग्राम’ (एनएएमपी), ‘कंटिन्यूअस एम्बियंट एयर क्वालिटी निगरानी’ (सीएएक्यूएम) नेटवर्क, और ‘सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च’ (सफर) के आधिकारिक आकंड़ों का उपयोग करके यह विश्लेषण किया।

विश्लेषण में पाया गया कि एक ओर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरी क्षेत्रों में निगरानी कवरेज काफी बेहतर है, तो दूसरी ओर मध्यम आकार के कई शहरों और लाखों की आबादी वाले बड़े जिलों में केवल एक या दो स्टेशन हैं या बिल्कुल नहीं हैं।

विश्लेषण के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश विभिन्न राज्यों में अधिक जनसंख्या वाले कई जिलों में या तो निगरानी तंत्र खराब है या हर समय निगरानी नहीं होती।

अध्ययन में कहा गया है, “जहां स्टेशन मौजूद हैं वहां विश्वसनीयता एक समस्या है। केवल लगभग आधे कंटिन्यूअस निगरानी स्टेशन लगातार स्थिर डेटा प्रदान करते हैं।”

एक अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि निगरानी स्टेशन हमेशा उन स्थानों पर नहीं होते जहां प्रदूषण सबसे अधिक है।

एयरवॉइस के सीईओ, विटाली मेटियूनिन ने एक बयान में कहा, “हम एक महत्वपूर्ण अंतर देख रहे हैं: कई राज्यों में ऑटोमेटेड निगरानी उपलब्ध नहीं है, और जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, वहां तकनीकी कारणों से महत्वपूर्ण डेटा खो जाता है। नेटवर्क का विस्तार महत्वपूर्ण है, लेकिन अब हमें डेटा स्थिरता सुनिश्चित करने और व्यावहारिक सेवाओं के विकास पर समान रूप से ध्यान केंद्रित करना होगा।”

भाषा जोहेब नरेश

नरेश