प.बंगाल की मुर्शिदाबाद विधानसभा सीट पर एसआईआर, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों का हो सकता है असर

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प.बंगाल की मुर्शिदाबाद विधानसभा सीट पर एसआईआर, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों का हो सकता है असर

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 02:05 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 02:05 PM IST

(सौगत मुखोपाध्याय)

कोलकाता, 31 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल के दो-तिहाई मुस्लिम आबादी वाले मुर्शिदाबाद जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नामों का हटाया जाना और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण ऐसे मुद्दे हैं जो विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

एसआईआर के बाद 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में मुर्शिदाबाद के 55 लाख मतदाताओं में से 11 लाख से अधिक को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े पैमाने पर नाम हटने से भले ही तृणमूल कांग्रेस को थोड़ी मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन मतदाता सत्तारूढ़ दल के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं।

इसके अलावा, 2025 से जिले में बार-बार होने वाली सांप्रदायिक हिंसा भी राजनीतिक विमर्श पर हावी है।

शमशेरगंज में 12 अप्रैल 2025 को 72 वर्षीय हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन (42) की भीड़ द्वारा की गई हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन जांगीपुर, शमशेरगंज, धुलियान और सूती में हिंसक हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किए, पुलिस वाहनों और कई घरों में आगजनी की। यहां तक कि आग बुझाने से रोकने के लिए पानी की आपूर्ति बाधित करने की भी खबरें सामने आईं।

हिंसा पर काबू पाने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद केंद्रीय बलों की तैनाती, निषेधाज्ञा और अस्थायी रूप से इंटरनेट बंद करने जैसे कदम उठाए गए। करीब 60 प्राथमिकी दर्ज की गईं और लगभग 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि सैकड़ों लोग भागीरथी नदी पार कर मालदा जिले में शरण लेने को मजबूर हुए।

घटना के लगभग एक साल बाद भी इसके जख्म हरे है। 2021 के चुनावों में तृणमूल ने शमशेरगंज, सूती और जांगीपुर सीट बड़े अंतर से जीती थीं।

जांगीपुर के रघुनाथगंज में 27 मार्च को राम नवमी शोभा यात्रा के दौरान फिर हिंसा भड़की, जिसमें मुस्लिम समुदाय के स्वामित्व वाली दुकानों और ठेलों को निशाना बनाते हुए आगजनी की गई।

जांगीपुर से तृणमूल के दो बार के विधायक जाकिर हुसैन ने इन घटनाओं को भाजपा की रणनीति बताया।

फिर से किस्मत आजमा रहे हुसैन ने आरोप लगाया कि भाजपा सांप्रदायिक तनाव पैदा कर हिंदू मतों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है।

हुसैन ने 2021 में 53.65 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, जबकि भाजपा 22.17 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। इस बार भाजपा ने इस सीट से वकील चित्तो मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है।

शमशेरगंज में तृणमूल ने हाल में पार्टी में शामिल हुए स्थानीय उद्यमी नूर आलम को टिकट दिया है, जबकि मौजूदा विधायक अमीरुल इस्लाम को फरक्का सीट से मैदान में उतारा गया है।

रोचक बात यह है कि एसआईआर के बाद आलम का नाम भी ‘विचाराधीन’ सूची में शामिल था, जो इस चुनाव में कई उम्मीदवारों के साथ देखने को मिल रहा है।

वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा के षष्ठी चरण घोष तृणमूल सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को मुद्दा बना रहे हैं। उन्होंने जल निकासी, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क नेटवर्क, गंगा कटाव और बेरोजगारी को प्रमुख समस्याएं बताया।

सूती सीट पर तृणमूल ने मौजूदा विधायक इमानी विश्वास पर फिर भरोसा जताया है, जिनका मुकाबला भाजपा के नए चेहरे महावीर घोष से होगा।

भाषा खारी शोभना मनीषा

मनीषा

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