सरकार परिसीमन प्रक्रिया से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करने की संभावना तलाश रही

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सरकार परिसीमन प्रक्रिया से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करने की संभावना तलाश रही

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 08:57 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 08:57 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) सरकार संभवत: लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने की संभावना तलाश रही है।

घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि हालांकि केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए औपचारिक प्रस्ताव तैयार करने के वास्ते अभी तक कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन संसद द्वारा 2023 में पारित कानून में संशोधन की संभावना तलाशने की योजना बनाई जा रही है।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान संविधान में संशोधन करके लाया गया था, लेकिन यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा।

यदि परिसीमन प्रक्रिया से पहले ही कानून को लागू करने का प्रस्ताव वास्तव में आता है, तो संविधान में एक और संशोधन की आवश्यकता होगी।

कुछ अपुष्ट खबरों में कहा गया है कि सरकार ने परिसीमन प्रक्रिया की प्रतीक्षा किए बिना महिला आरक्षण लागू करने के लिए विधेयक लाने की संभावना के बारे में कुछ विपक्षी नेताओं को अनौपचारिक संकेत भेजे हैं।

सूत्रों ने इस बात पर भी जोर दिया कि परिसीमन या सीमा आयोग एक ‘‘तटस्थ’’ निकाय है, जिसे लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है, और इसके निर्णयों को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती नहीं दी जा सकती।

उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष निकाय परिसीमन प्रक्रिया में विश्वास पैदा करेगा।

निर्वाचन आयोग एक अन्य स्वतंत्र संस्था है, लेकिन इसे अखिल भारतीय परिसीमन कवायद कराने का दायित्व नहीं दिया जा सकता।

सरकार के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘‘अधिक से अधिक, यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में परिसीमन किया था।’’

परिसीमन प्रक्रिया द्वारा उसी प्रकार से महिलाओं के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है, जैसा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए किया जाता है। इसके अलावा जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण करने का एक अन्य तरीका ‘रोटेशन’ के माध्यम से हो सकता है।

गीता मुखर्जी समिति ने 1990 के दशक के मध्य में, समय के साथ सभी निर्वाचन क्षेत्रों में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लगातार चुनावों में महिलाओं के वास्ते आरक्षित सीट के ‘रोटेशन’ का सुझाव दिया था।

इस सिफारिश के तहत, प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीट का ‘रोटेशन’ किया जाएगा।

इस चक्र को इस तरह से तैयार किया गया था कि तीन आम चुनावों के बाद, लोकसभा और विधानसभाओं के सभी निर्वाचन क्षेत्रों को कम से कम एक बार महिलाओं के लिए आरक्षण किया जा सकेगा।

हालांकि, इस बार पारित कानून में सीट के लिए ‘रोटेशन’ के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला आरक्षण विधेयक को अपनी सहमति दी थी।

इस कानून को आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के रूप में जाना जाता है।

सूत्रों ने बताया कि यह अधिनियम, हालांकि अभी तक लागू नहीं हुआ है, फिर भी सरकार की इच्छा होने पर और दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन मिलने पर संसद द्वारा एक अन्य संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से इसमें संशोधन किया जा सकता है।

भाषा

नेत्रपाल सुरेश

सुरेश