Vikat Chaturthi 2026: क्या आप भी कर रहे हैं विकट चतुर्थी पर बप्पा की पूजा में ये बड़ी गलती? जानिए वो नियम जो हर भक्त भूल जाता है!

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Vikat Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित पावन पर्व है। इस दिन सही विधि से पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन छोटी-छोटी गलतियों से पूजा का फल कम हो सकता है, इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।

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  • Publish Date - April 5, 2026 / 10:54 AM IST,
    Updated On - April 5, 2026 / 10:54 AM IST

(Vikat Chaturthi 2026/ Image Credit: IBC24 News)

Vikat Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी का पर्व इस साल 5 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है। यह दिन विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा जीवन के सभी संकट दूर करती है और सौभाग्य के द्वार खोलती है। हालांकि, पूजा में छोटी-छोटी गलतियां शुभ फल को कम कर सकती है। इसलिए इस दिन पूरी श्रद्धा, शुद्धता और संयम के साथ पूजा करना बेहद आवश्यक है।

पूजा और तिलक में रखने योग्य बातें

भगवान गणेश का अभिषेक हमेशा आचमनी या फूल की सहायता से करें, सीधे जल चढ़ाने से बचें। तिलक में उपयोग किए जाने वाले अक्षत (चावल) के दाने हमेशा पूरे और टूटे नहीं होने चाहिए। तुलसी के पत्ते पूजा में प्रयोग न करें। फूल हमेशा ताजे रखें और उन्हें सीधे जमीन पर न रखें। पूजा के लिए कोई पुरानी या बासी सामग्री दोबारा प्रयोग न करें। साथ ही पूजा के दौरान मन शांत रखें और हर प्रक्रिया पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न करें।

चंद्र दर्शन और अर्घ्य का सही तरीका

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य देना बहुत महत्वपूर्ण होता है। अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर न पड़ें, इसके लिए नीचे थाली या बड़ा पात्र रखें। अर्घ्य के लिए केवल सादा जल न लें, उसमें थोड़ा कच्चा दूध और अक्षत मिलाएं। अर्घ्य देते समय मन में भक्ति भाव रखें और किसी के प्रति बुरा भाव न रखें। शांत और समर्पित भाव से अर्घ्य देने पर पूजा का फल अधिक मिलता है।

भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना

भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए महंगी सामग्री की जरूरत नहीं होती। दूर्वा उनके लिए सबसे प्रिय वस्तु है। इस दिन 21 गांठें दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। दूर्वा का ऊपरी कोमल हिस्सा ही चढ़ाएं और अर्पित करते समय ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। यह छोटी भेंट जीवन की बड़ी बाधाओं को दूर करने की शक्ति रखती है।

भक्ति और समर्पण का महत्व

पूजा के बाद अपनी मां का आशीर्वाद लेना न भूलें, क्योंकि माता ही बप्पा के लिए पूरी संसार थी। विकट संकष्टी चतुर्थी हमें अपने आचरण को शुद्ध रखने और ईश्वर के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देती है। पूरी श्रद्धा और सही जानकारी के साथ पूजा की जाए, तो भगवान गणेश की कृपा जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाती है।

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विकट संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है?

इस साल यह पर्व 5 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा और भगवान गणेश को समर्पित होता है।

इस दिन पूजा का महत्व क्या है?

शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से की गई पूजा जीवन के सभी संकट दूर करती है और सौभाग्य के द्वार खोलती है।

पूजा के दौरान किन गलतियों से बचना चाहिए?

सीधे जल चढ़ाना, टूटे अक्षत का प्रयोग, तुलसी का उपयोग, बासी फूल या सामग्री का इस्तेमाल करने से बचें।

दूर्वा अर्पित करने का सही तरीका क्या है?

21 गांठें दूर्वा का ऊपरी कोमल हिस्सा ही अर्पित करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।