छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी पर हमला बोला है। भूपेश ने जोगी के जाति मामले पर आए फैसले को लेकर पत्रकारवार्ता में कहा कि जोगी की जाति के मामले में अगर जांच समिति गलत बनी थी तो जाहिर है कि मुख्यमंत्री के राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा किया गया। वही अगर जांच समिति के गठन की सूचना राजपत्र में प्रकाशित न होना ही कमी है तो यह तकनीकी गलती नहीं बल्कि सरकार की सोची समझी रणनीति है। भूपेश ने कहा कि जोगी जाति मामले पर फैसला आते ही मुख्यमंत्री ने कहा कि फिर से कमेटी गठित करेंगे। अगर सीएम गलत नहीं किए होते तो सुप्रीम कोर्ट जाने की बात करते।
दूसरे दिन भी टली संसदीय सचिव मामले की सुनवाई
भूपेश ने कहा कि मुख्यमंत्री बताए कि उनके निर्देश पर किस अधिकारी ने तकनीकी चूक की और राजपत्र में प्रकाशित नहीं होने दिया। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने ट्वीट के माध्यम से जोगी और सरकार पर हमला बोला है। सिंहदेव ने लिखा कि मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने फिर अपनी ठ टीम को बचा लिया। रमन सिंह जी का जोगी जी को बचाने का यह प्रयास निरंतर है।
जोगी के आदिवासी होने का सच: श्री जोगी ने अपने आदिवासी होने का सर्टिफिकेट एक तहसील से दिया, पर ये तहसील सरकरी रिकॉर्ड में है ही नहीं।
उनका पहला केस तकनीकी कारणों से रद्द कर दिया गया था। 1/6 #भाजपा_जोगी_साथ_साथ
— TS Singh Deo (@TS_SinghDeo) January 30, 2018
सिंहदेव ने ट्वीट में “जोगी के आदिवासी होने का सच” हेडिंग देते हुए लिखा – जोगी ने अपने आदिवासी होने का सर्टिफिकेट एक तहसील से दिया, पर यह तहसील सरकारी रिकॉर्ड में है ही नहीं, उनका यह पहला केस तकनीकी कारणों से रद्द किया गया था। सिंहदेव ने आगे लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका को 2011 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा एक आयोग गठित करके जांच के आदेश दिए। इस बार फिर भी उनके आदिवासी होने का कोई फैसला नहीं लिया गया, इंदौर बेंच ने अपना फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि याचिका धारा के केस को वापस ले लिया,
इंदौर बेंच ने अपना फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि याचिका धारक ने केस को वापस ले लिया। 2/6 #भाजपा_जोगी_साथ_साथ
— TS Singh Deo (@TS_SinghDeo) January 30, 2018
सिंहदेव ने आगे लिखा कि फिर 2013 विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने आयोग द्वारा हाईकोर्ट में दी गई रिपोर्ट को वापस ले ली। उसके बाद नए आयोग गठित करने के लिए रमन सिंह सरकार ने 4 साल का समय लगा दिया। और अब उच्च न्यायालय ने सोती हुई छत्तीसगढ़ सरकार को याद दिलाया की गठित समिति को पहले राजपत्र में सूचित करना चाहिए था। कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का कहना है कि कोर्ट के निर्देश पर कमेटी गठित की गई थी। अगर तकनीकी त्रुटियां पायी गई है तो ठीक करना आवश्यक है।
वेब डेस्क, IBC24