(NSE Q1 Results 2026/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: NSE Q1 Results 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे (NSE Q1 Results 2026) जारी कर दिए हैं। अप्रैल से जून 2026 के बीच कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में NSE का शुद्ध लाभ 2,924 करोड़ रुपये था। आईपीओ की तैयारी कर रहे NSE के लिए यह मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।
NSE ने बताया कि जून तिमाही (NSE Q1 Results 2026) में उसकी कुल आय 9% बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की आय 4,798 करोड़ रुपये थी। कंपनी की कमाई बढ़ने में सबसे बड़ा योगदान लेनदेन शुल्क से मिला। ट्रांजैक्शन फीस से आय बढ़कर 3,623 करोड़ रुपये हो गई। जबकि पिछले साल यह 3,154 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा डेटा कनेक्टिविटी शुल्क, डेटा फीड और टर्मिनल सेवाओं से भी कंपनी को अच्छी आय हुई।
NSE को दूसरी बड़ी राहत सेबी से मिली है। को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले में मार्केट रेगुलेटर सेटलमेंट के लिए तैयार हो गया है। सेबी ने करीब 1,491 करोड़ रुपये के सेटलमेंट प्रस्ताव को मंजूरी दी है। NSE बोर्ड ने भी इस प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इस कदम से कंपनी के सामने लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद खत्म हो गया है, जिससे IPO की राह और आसान हो सकती है।
यह मामला साल 2015 में सामने आया था। आरोप था कि कुछ ब्रोकर्स को NSE की को-लोकेशन सुविधा का गलत फायदा मिला, जिससे उन्हें तेज एक्सेस मिल सकता था। NSE ने साल 2009 में को-लोकेशन सुविधा शुरू की थी जिसमें सदस्यों को एक्सचेंज परिसर में सर्वर लगाने की सुविधा दी गई थी। बाद में इस मामले की जांच शुरू हुई और यह लंबे समय तक चर्चा में रहा।
NSE पिछले कई वर्षों (NSE Q1 Results 2026) से IPO लाने की तैयारी कर रहा है लेकिन कानूनी मामलों के कारण इसमें देरी होती रही। अब पुराने विवाद के सुलझने से लिस्टिंग की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। जून में NSE ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल किया था। इसके अनुसार करीब 149 मिलियन शेयर ऑफर फॉर सेल के जरिए जारी किए जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक NSE IPO का संभावित आकार करीब 29,780 करोड़ रुपये हो सकता है।
नोट:-शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
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