दुबई, चार जनवरी (एपी) ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। एक मानवाधिकार एजेंसी ने यह जानकारी दी।
अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ ने रविवार सुबह बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों में 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। उसने बताया कि मरने वालों की संख्या कम से कम 15 हो गई है और 580 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता ने देश में अशांति उत्पन्न करने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि ‘‘दंगाइयों पर सख्ती करनी होगी।’’
सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ये टिप्पणियां एक सप्ताह से जारी प्रदर्शनों के प्रति अधिकारियों को अधिक आक्रामक रुख अपनाने की अनुमति देने का संकेत प्रतीत होती हैं। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के संबंध में 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की यह पहली टिप्पणी है।
विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है, तो अमेरिका ‘उनको बचाने के लिए आगे आएगा।’
यह हालांकि, अभी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप हस्तक्षेप करेंगे या नहीं और यदि करेंगे तो कैसे करेंगे लेकिन उनकी टिप्पणियों को लेकर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान के अधिकारियों ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है। मादुरो तेहरान के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं।
यह 2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है। पुलिस हिरासत में 2022 में 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत के बाद देशव्यापी प्रदर्शन हुए थे। अमीनी को अधिकारियों ने हिजाब न पहनने के कारण हिरासत में लिया था।
खामेनेई ने कहा, ‘‘हम प्रदर्शनकारियों से बात करते हैं, अधिकारियों को भी उनसे बात करनी चाहिए। लेकिन दंगा करने वालों से बात करने का कोई फायदा नहीं है। दंगा करने वालों को उनकी जगह दिखानी होगी।’’
उन्होंने ईरान के अधिकारियों द्वारा लगातार किए जाने वाले एक दावे को भी दोहराया कि इजराइल या अमेरिका जैसी विदेशी ताकतें विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रही हैं लेकिन उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया। उन्होंने ईरान के रियाल के गिरते मूल्य के लिए भी ‘‘दुश्मन’’ को दोषी ठहराया।
एपी सिम्मी नोमान
नोमान
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