Dhirendra Shastri in Sydney Opera House Live || IMAGE- Sheryl Higginson FILE
सिडनी: देश के प्रमुख धार्मिक प्रवचनकर्ताओं में शुमार, युवा संत बाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही हैं। आज यानि 15 अप्रैल को पंडित धीरेन्द्र शास्ती का सिडनी के मशहूर ओपेरा हाउस में उद्बोधन होने जा रहा हैं। यह पहला मौका ही जब भारत का कोई युवा संत ऑस्ट्रेलिया के इस विश्व प्रसिद्द हाउस से दुनिया को सम्बोधित करेगा। सम्बोधन का विषय भी मौजूदा हालात के मुताबिक़ प्रासंगिक है। (Dhirendra Shastri in Sydney Opera House Live) धीरेन्द्र शास्त्री वैश्विक तनाव और युद्ध के बीच ‘विश्व-शांति’ और अपना उद्बोधन देंगे। इसे भारत के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है।
इस खास मौके पर आयोजकों ने मीडिया संस्थानों और चैनलों से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम को प्रमुखता से प्रसारित करें। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति के रूप में भी अहम माना जा रहा है, जहां भारत की आध्यात्मिक विरासत वैश्विक मंच पर प्रस्तुत होगी। कार्यक्रम का पोस्टर भी जारी किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है।
बता दें कि, इससे पहल पार्लियामेंट हॉउस भी उनका संबोधन का कार्यक्रम रखा गया था, जहां उन्होंने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों पर विचार साझा किए थे जाकी ऑस्ट्रेलिया के ही एक और प्रमुख शहर पर्थ में भी उनके कार्यक्रम आयोजित किए गए है।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक भारतीय कथावाचक और धार्मिक गुरु हैं, जिन्हें आमतौर पर “बागेश्वर धाम सरकार” के नाम से भी जाना जाता है। वे मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम से जुड़े हुए हैं, जो हनुमान जी का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। उनका जन्म छतरपुर जिले के एक छोटे से गाँव में हुआ और बचपन से ही उनका झुकाव धार्मिक गतिविधियों और कथा-वाचन की ओर रहा।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मुख्य रूप से भागवत कथा और राम कथा का वाचन करते हैं। उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। वे “दरबार” लगाते हैं, जहाँ लोग अपनी समस्याएँ लेकर आते हैं। (Dhirendra Shastri in Sydney Opera House Live) उनके अनुयायियों का मानना है कि वे बिना बताए ही लोगों की समस्याएँ जान लेते हैं और उनका समाधान बताते हैं, जिसे वे दिव्य शक्ति या आशीर्वाद का परिणाम मानते हैं।
उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ विवाद भी जुड़े हुए हैं। कुछ लोग उनके चमत्कारों और दावों पर विश्वास करते हैं, जबकि अन्य लोग इन्हें अंधविश्वास मानते हुए सवाल उठाते हैं। इस कारण वे कई बार मीडिया और सार्वजनिक बहस का विषय भी बने हैं। फिर भी उनकी पहचान एक प्रभावशाली कथावाचक के रूप में है, जिनका असर विशेष रूप से उत्तर और मध्य भारत में देखा जाता है।
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