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माफ कीजिएगा.. 'जिन्ना' हिंदुस्तान के विलेन थे..और रहेंगे

Created at - May 4, 2018, 5:00 pm
Modified at - May 4, 2018, 5:00 pm

झगड़ना हमारा राष्ट्रीय शगल है..हमें झगड़ने में मजा आता है..सिरफुटव्वल हमें सक्रिय रखता है...तू-तू..मैं-मैं के बग़ैर हमारी पाचन क्रिया गड़बड़ा जाती है । एक दूसरे पर उंगली उठाए बिना हमें नींद नहीं आती । सच कहें तो विवादों की सुर्खियां हमारी कौमी पूंजी है..पर इस बार तो हमने हद ही कर दी..हम झगड़े भी तो किसके लिए..देश विभाजन के सबसे बड़े विलेन मोहम्मद अली जिन्ना के लिए..। 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर ने विवाद की एक नई चिंगारी को हवा दे दी है । इस चिंगारी से कुछ लोग नफरत की दीवार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं..तो कुछ लोग दिलों में बंटवारे के पुराने  एजेंडे को चमकाने में लग गए हैं । खेल पुराना है..और हर बार इस खेल ने देश को नुकसान पहुंचाया है । नारों, अफवाहों और गलतबयानी के ज़रिए एक धुंध रची जा रही है..जहां कुछ दिखता नहीं, कुछ सुनाई नहीं देता, कुछ समझ में नहीं आता..बस एक दीवार खड़ी होती है..जिसके दोनों ओर मजमा होता है..कसी मुट्ठियां होती हैं..तने चेहरे होते हैं..। इस मायावी धुंध के परे देखने की कोशिश करें तो एक सवाल उभरता है..कि जिन्ना से जुड़ा ये विवाद राजनीतिक है..या धार्मिक? बेशक ये विवाद सियासी है । अब दूसरा सवाल क्या तस्वीर पर विवाद जायज है...इसका जवाब कुछ इस तरह हो सकता है..क्या हिंदुस्तान के अंदर किसी भी रूप में जिन्ना की मौजूदगी जायज है..अगर नहीं..तो हां ये विवाद जायज है ।

हम जब राष्ट्र की बात करते हैं..तो उसमें सामूहिकता और एकत्व की बात होती है..हिंदू या मुसलमान की नहीं..फिर हमारा देश तो घोषित तौर पर धर्म निरपेक्ष है । सवाल है..लोकतांत्रिक और धर्म निरपेक्ष भारत के नायक कौन हैं और खलनायक कौन?  भारत के नायक वो तमाम सपूत हैं..जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया । जिन्होंने अपने कृतित्व, अपनी चेतना, अपनी प्रतिभा, अपने चिंतन और अपने नेतृत्व से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया । हज़ारों साल के हमारे इतिहास में नायकों की एक लंबी फेहरिस्त है..जो हमें प्रेरणा देते रहे हैं..जो हमारे आदर्श रहे हैं..जिनके सपने हमारे सपनों से जुड़ते हैं..जिनका नेतृत्व हमें आज भी रास्ता दिखाता है । राष्ट्र नायक की इस परिभाषा में रंग, जाति, धर्म और क्षेत्र कभी आड़े नहीं आया । कश्मीर से कन्याकुमारी तक जो भी भारतवंशी इस परिभाषा में फिट बैठते है..आज वो सब हमारे राष्ट्र नायक हैं । अब सवाल है..देश के लिए विलेन कौन हैं..तो वो सारे लोग जिन्होंने माटी का अपमान किया..जिन्होंने राष्ट्र को कमजोर किया, उसके साथ घात किया, उसे बांटने और काटने की कोशिश की..वो सब हमारे देश के लिए विलेन हैं । इस आधार पर देखें तो भारत का कोई भी नागरिक ये बता सकता है..कि जिन्ना देश के हीरो हैं या विलेन ? 

आजाद भारत के इन 70 बरसों में अगर हम अपने हीरो और विलेन को लेकर असमंजस में हों...। किसे राष्ट्रनायक कहें..और किसे विलेन..इसको लेकर अगर देश की राय बंटी हुई हो..तो ये त्रासदी से कम नहीं है । जिन्ना ने देश को तोड़ा..पाकिस्तान अलग हो गया..पर देश में अगर अब भी बंटवारा मौजूद हो..संवैधानिक तौर पर एक दिखने वाला भारत अगर 70 साल बाद टू-नेशन थ्योरी की फिलासफी को जीने लगा हो..तो हमें डरना चाहिए..सतर्क हो जाना चाहिए । 

दलील ये दी जा रही है कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर 1932 से लगी है..ये हमारे अतीत का हिस्सा है..इसलिए तस्वीर नहीं हटनी चाहिए । जिस दिन मुहम्मद अली जिन्ना ने कहा कि हमें मुसलमानों के लिए अलग देश चाहिए..हम हिंदू बहुल भारत में नहीं रह सकते..उसी दिन ये तय हो गया कि उन्होंने हिंदुस्तान के साझे इतिहास को खारिज कर दिया । जिसने भारत के अतीत को खारिज कर दिया..उसे अपने अतीत का हिस्सा मानकर भारत में जगह क्यों दी जाए?  

जिन्ना को पाकिस्तान अपना कायदे आजम कहे..यहां तक ठीक है..पर हिंदुस्तान के लिए वो एक ऐसे खलनायक हैं..जिनके दामन में लाखों बेगुहानों के खून के छींटे हैं । देश के बंटवारे के प्रायोजक और आयोजक जिन्ना से हम नफ़रत नहीं करते..क्योंकि ये हमारी परंपरा नहीं..पर उन्हें देश के गौरवशाली इतिहास में जगह दें..ये भी मुमकिन नहीं । अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अगर 80 साल में ये बात समझ में नहीं आई..तो इस विवाद के बाद समझ में आ जानी चाहिए ।

 

 

 

सतीश सिंह, असिस्टेंट एडिटर, IBC24

 


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