खाद्य तेल-तिलहनों में रहा गिरावट का रुख |

खाद्य तेल-तिलहनों में रहा गिरावट का रुख

खाद्य तेल-तिलहनों में रहा गिरावट का रुख

: , January 25, 2023 / 05:05 PM IST

नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) विदेशी बाजारों में गिरावट और बाजारों में सस्ते आयातित तेलों की भरमार होने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को बिनौला की अगुवाई में लगभग सभी तेल कीमतों में नरमी रही तथा सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, बिनौला, कच्चा पामतेल एवं पामोलीन तेल के भाव में हानि दर्शाते बंद हुए।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि तेल कीमतों में आई गिरावट से कई लोग खुश जरूर हो सकते हैं लेकिन इस गिरावट से देश के तेल-तिलहन उद्योग, किसान और अंतिम तौर पर उपभोक्ताओं को नुकसान ही होगा। सस्ते आयातित तेलों के आगे देशी छोटे तेल उद्योग अपने तेलों के नहीं खप पाने की चिंता से परेशान हैं और अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने में लग गये हैं। किसानों को लग रहा है कि सस्ते आयातित तेलों की मौजूदगी में उनके ऊंची लागत वाले सरसों, सोयाबीन, मूंगफली को कौन खरीदेगा। उपभोक्ताओं को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की आड़ में वैश्विक तेल कीमतों में आई गिरावट का लाभ नहीं दिया जा रहा और अंत में देश के तेल-तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बजाय खाद्य तेलों के आयात पर निर्भर होने का खतरा बढ़ गया है। जब देशी तेल-तिलहन सस्ते आयातित तेलों के आगे खपेंगे ही नहीं तो कोई क्यों तिलहन बुवाई करना चाहेगा?

सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 3.6 प्रतिशत की गिरावट है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज 0.7 प्रतिशत नीचे है। विदेशी बाजारों की गिरावट से भी कारोबारी धारणा प्रभावित हुई है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को सस्ते खाद्य तेलों के सामने देशी तेल-तिलहनों को बाजार में खपाने के लिए आयातित खाद्य तेलों पर आयात शुल्क इस हद तक लगा देना चाहिये कि देशी तिलहन बाजार में आसानी से खप सकें। उन्होंने कहा कि ज्यादातर उच्च आयवर्ग में खपत होने वाले हल्के व नरम तेलों (सॉफ्ट आयल) पर आयात शुल्क लगा दिया जाता है तो हर महीने प्रति व्यक्ति पर लगभग 50 रुपये का खर्च बढ़ेगा लेकिन देशी तिलहनों की पेराई से मिलने वाले मुर्गीदाने और खल की उपलब्धता बढ़ने से अंडे, चिकन, दूध, मक्खन, घी आदि के दाम पर फर्क आयेगा और ऐसे में उपभोक्ताओं के लगभग 100-150 रुपये प्रति माह की बचत होने की संभावना है।

सूत्रों ने कहा कि आयात शुल्क लगाने से किसानों का माल खपेगा और सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति होगी। इसके अलावा सरकारी पोर्टल पर तेल कंपनियों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की सूचना नियमित तौर पर डालने से खाद्य तेलों की महंगाई कम होगी।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,340-6,390 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,455-6,515 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,430 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,430-2,695 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 12,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,040-2,070 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,000-2,125 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,650 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,250 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,750 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,800 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,840 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,455-5,535 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,195-5,215 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)