नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) भारत की शीर्ष छह आईटी कंपनियों – टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएलटेक, विप्रो, टेक महिंद्रा और एलटीआईमाइंडट्री – पर नए श्रम कानूनों के लागू होने से लगभग 5,400 करोड़ रुपये का सामूहिक असर पड़ा है। इस एकमुश्त खर्च ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में उनके आय प्रदर्शन को काफी हद तक प्रभावित किया।
नए नियमों ने मौजूदा 29 श्रम कानूनों की जगह ली है, और इसके चलते कर्मचारियों के लाभों की गणना करने के तरीके में एक संरचनात्मक बदलाव आया है।
देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) पर इसका सबसे अधिक बोझ पड़ा, जिसने इस मद में 2,128 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। इस वजह से कंपनी का शुद्ध लाभ 13.9 प्रतिशत गिरकर 10,657 करोड़ रुपये रह गया।
इन्फोसिस ने भी 1,289 करोड़ रुपये के एकमुश्त असाधारण खर्च की सूचना दी। बेंगलुरु स्थित इस कंपनी का शुद्ध लाभ 2.2 प्रतिशत घटकर 6,654 करोड़ रुपये रह गया।
कंपनी के सीईओ सलिल पारेख ने कहा कि इन कानूनों के परिणामस्वरूप मार्जिन पर लगभग 0.15 प्रतिशत का वार्षिक प्रभाव पड़ेगा।
श्रम कानून का प्रभाव ज्यादातर दिग्गज कंपनियों की कमाई में दिखाई दिया और यह आगामी परिणामों में भी दिखेगा, क्योंकि अभी और भी कंपनियां तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली हैं।
एचसीएलटेक ने 956 करोड़ रुपये के एकमुश्त प्रावधान की सूचना दी, जिससे उसका शुद्ध लाभ 11.2 प्रतिशत घटकर 4,076 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी ने कहा कि इस झटके के बिना उसका मुनाफा वास्तव में बढ़ा होता।
विप्रो के शुद्ध लाभ में सात प्रतिशत की गिरावट आई और यह 3,119 करोड़ रुपये रहा। कंपनी पर श्रम कानूनों से 302.8 करोड़ रुपये का असर पड़ा।
टेक महिंद्रा ने वेतन कानूनों के लिए लगभग 272 करोड़ रुपये अलग रखे, हालांकि उसने शुद्ध लाभ में वृद्धि दर्ज की। एलटीआईमाइंडट्री ने नए श्रम कानूनों के कारण 590 करोड़ रुपये का प्रावधान किया।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण