मुंबई, 15 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने आईआईएफएल फाइनेंस पर नियमों के पालन में कुछ कमियों के लिए 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह जुर्माना ‘मास्टर डायरेक्शन – भारतीय रिजर्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी – स्केल आधारित विनियमन)’ के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं करने के लिए लगाया गया है।
एक बयान में, केंद्रीय बैंक ने कहा कि आईआईएफएल फाइनेंस का 31 मार्च, 2025 तक की उसकी वित्तीय स्थिति के संदर्भ में एक वैधानिक निरीक्षण किया गया था।
आरबीआई ने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक के निर्देशों का पालन नहीं करने के संबंध में निगरानी निष्कर्षों और उससे जुड़े पत्राचार के आधार पर, कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था। इसमें कंपनी से पूछा गया था कि उक्त निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए उस पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।’’
नोटिस पर कंपनी के जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद, रिजर्व बैंक ने पाया कि कंपनी के खिलाफ आरोप सही साबित हुए। इसके कारण मौद्रिक जुर्माना लगाना जरूरी हो गया।
रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘कंपनी गिरवी रखे गए सोने के सामान की नीलामी से मिली अतिरिक्त राशि… जो बकाया ऋण से ज्यादा थी, कुछ उधारकर्ताओं को देने में विफल रही थी।’’
केंद्रीय बैंक ने एपनिट टेक्नोलॉजीज पर भी ‘अपने ग्राहक को जानें’ (केवाईसी) और ‘प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स’ (पीपीआई) पर जारी कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए 5.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
रिजर्व बैंक ने कहा कि कंपनी ने आधार ओटीपी-आधारित ई-केवाईसी का उपयोग करके खोले गए पीपीआई खातों को, केवाईसी निर्देशों के अनुसार पहचान प्रक्रिया पूरी किए बिना एक वर्ष से अधिक समय तक जारी रहने दिया।
बैंक ने कहा कि एपनिट टेक्नोलॉजीज खातों के जोखिम वर्गीकरण की समय-समय पर समीक्षा करने की प्रणाली लागू करने में भी विफल रही।
दोनों ही मामलों में, रिजर्व बैंक द्वारा लगाए गए जुर्माने, वैधानिक और विनियामक नियमों के पालन में पाई गई कमियों पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य कंपनियों द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई फैसला देना नहीं है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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