हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पानीपत के सरकारी स्कूल में छात्रों से दुर्व्यवहार का संज्ञान लिया

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हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पानीपत के सरकारी स्कूल में छात्रों से दुर्व्यवहार का संज्ञान लिया

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  • Publish Date - August 12, 2026 / 04:27 PM IST,
    Updated On - August 12, 2026 / 04:27 PM IST

चंडीगढ़, 12 अगस्त (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने पानीपत के एक सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 12वीं कक्षा के छात्रों द्वारा स्कूल प्रशासन पर लगाए गए दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों का संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा तलब किया है।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने 10 अगस्त को इस संबंध में आदेश जारी किया।

बारहवीं कक्षा के बी वर्ग के कई छात्रों के हस्ताक्षर वाली शिकायत में स्कूल प्रशासन पर छात्रों की गरिमा, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

आयोग के आदेश में कहा गया कि शिकायत के साथ संलग्न तस्वीरों में प्रथम दृष्टया स्कूल का बुनियादी ढांचा जर्जर प्रतीत होता है और शिकायतकर्ताओं के कुछ आरोपों को बल मिलता है।

शिकायत में छात्रों ने स्कूल प्रधानाचार्य पर उनके साथ लगातार अपमानजनक और अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रधानाचार्य पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, अपमानजनक नामों से बुलाने, स्कूल से नाम काटने की धमकी देने और कक्षा से बाहर बैठने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।

छात्रों का कहना है कि पिछले दो-तीन महीने से बारहवीं (बी वर्ग) कक्षा के लिए निर्धारित कमरा बंद है, जिसके कारण उन्हें बाहर बैठना पड़ रहा है।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि कक्षा में बिजली की सुविधा नहीं है, छत से खुले बिजली के तार लटक रहे हैं, जिससे छात्रों की जान और सुरक्षा को खतरा है। इसके अलावा पर्याप्त डेस्क और बेंच भी उपलब्ध नहीं हैं। भीषण गर्मी में भी पंखे चलाने की अनुमति नहीं दी जाती और छात्रों को प्रतिकूल परिस्थितियों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में पर्याप्त और चालू शौचालय सुविधाएं नहीं हैं, जिसके कारण छात्राओं समेत विद्यार्थियों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। इससे उनकी गरिमा, निजता और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

शिकायत में स्कूल समय के दौरान प्रधानाचार्य के अक्सर अनुपस्थित रहने और केवल सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच पहुंचने का भी आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा छात्रों से स्कूल की दीवारों की मरम्मत के नाम पर धन एकत्र करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

न्यायमूर्ति बत्रा ने अपने आदेश में कहा कि अगर आरोप सच पाए जाते हैं तो वे बुनियादी शिक्षा सुविधाओं से वंचित रखने और स्कूली बच्चों की गरिमा व अधिकारों के उल्लंघन की एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। एक स्कूल से उम्मीद की जाती है कि वह सुरक्षित, समावेशी और बच्चों के अनुकूल माहौल दे, जहां हर छात्र के साथ गरिमा, सम्मान और समानता का व्यवहार हो।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति बत्रा ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ मांगी है।

माध्यमिक शिक्षा महानिदेशक को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षा निदेशालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी से इस मामले की जांच करवाएं, जबकि पानीपत के जिला शिक्षा अधिकारी से यह पता लगाने को कहा गया है कि क्या प्रधानाचार्य द्वारा दुर्व्यवहार, अपमान और धमकी देने के आरोप सही हैं।

एचएचआरसी के सहायक रजिस्ट्रार पुनीत अरोड़ा ने कहा कि संबंधित सभी प्राधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सात अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

भाषा

शुभम पवनेश

पवनेश