तिरुवनंतपुरम, 28 जनवरी (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने कहा है कि राज्य के स्कूलों में मलयालम को अनिवार्य प्रथम भाषा बनाने के फैसले पर कर्नाटक सरकार द्वारा उठाई गई चिंताएं निराधार हैं।
विजयन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को भेजे जवाबी पत्र में यह बात स्पष्ट की। पत्र में उन्होंने रेखांकित किया कि केरल विधानसभा द्वारा पारित कानून में भाषायी अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आरोप निराधार है कि केरल में कन्नड़ माध्यम के स्कूलों पर मलयालम थोपी जा रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान के अनुसार, विजयन ने पत्र में कहा, “हालांकि कानून में मलयालम को प्रथम भाषा बताया गया है लेकिन जिन बच्चों की मातृभाषा मलयालम नहीं है, उन्हें अपनी मातृभाषा के साथ-साथ मलयालम पढ़ने की अनुमति दी जाएगी।”
पत्र में कहा गया कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या प्रारूप के अनुरूप छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने की स्वतंत्रता है।
विजयन ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों या विदेशों से आने वाले छात्रों के लिए एसएसएलसी या उच्च माध्यमिक स्तर पर मलयालम की परीक्षा देना अनिवार्य नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषायी अल्पसंख्यकों को सरकारी कार्यालयों के साथ पत्राचार के लिए तमिल और कन्नड़ भाषा का उपयोग करने की अनुमति है और कानून के तहत ऐसे पत्रों का उत्तर भी उन्हीं भाषाओं में दिया जाना अनिवार्य है।
पत्र में कहा गया कि अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम अन्य भाषाओं के संवर्धन में बाधा नहीं है।
विजयन ने बताया कि यह कानून केरल और कर्नाटक के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की भावना के साथ तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केरल सरकार विधानसभा के उस दायित्व का निर्वहन कर रही है, जिसके तहत लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
पिछले वर्ष अक्टूबर में केरल विधानसभा ने मलयालम भाषा विधेयक पारित किया था, जिसके तहत मलयालम को सरकारी कामकाज, शिक्षा और व्यापार के लिए राज्य की एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाया गया है।
इस विधेयक का विशेष रूप से कर्नाटक सरकार ने विरोध किया है, जिसने सीमावर्ती कासरगोड जिले में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों को लेकर चिंता जताई है। सिद्धरमैया ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि किसी भी भाषा को भाषायी अल्पसंख्यकों पर बलपूर्वक नहीं थोपा जा सकता।
भाषा राखी पवनेश
पवनेश