सरस्वती शिशु मंदिरों को लेकर अपनी विवादित टिप्पणी पर दिग्विजय सिंह ने दी सफाई

सरस्वती शिशु मंदिरों को लेकर अपनी विवादित टिप्पणी पर दिग्विजय सिंह ने दी सफाई

Edited By: , September 28, 2021 / 09:10 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 28 सितंबर (भाषा) सरस्वती शिशु मंदिरों को लेकर अपनी विवादित टिप्पणी पर सफाई देते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को कहा कि उनका बयान सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली विचारधारा के लोगों के खिलाफ था और इन शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में वह कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं।

सिंह ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ‘मैं सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली विचारधारा के खिलाफ हूं। मेरा संबंधित बयान शुद्ध रूप से उन लोगों के खिलाफ था जो ऐसी विचारधारा पनपाते हैं। शिशु मंदिरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में मुझे कुछ भी नहीं कहना है।’

उन्होंने अपनी बात में जोड़ा, ‘मैंने जो बयान दिया है, वह तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर दिया है।’

गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सरस्वती शिशु मंदिरों के संदर्भ में की गई विवादित टिप्पणी को लेकर सिंह से जवाब मांगा है। एनसीपीसीआर ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के लिए भी कहा है।

पंजाब की कांग्रेस सरकार के हालिया नेतृत्व परिवर्तन के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘भाजपा जब किसी राज्य का मुख्यमंत्री बदलती है, तो इसे मीडिया भाजपा का मास्टर स्ट्रोक करार देता है। लेकिन जब कांग्रेस ऐसा करती है तो इसे हमारी पार्टी के भीतर की अव्यवस्था बता दिया जाता है।’

बहरहाल, पंजाब कांग्रेस समिति के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के अपने पद से इस्तीफा देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन में पंजाब के प्रभारी नेता ही

इसका जवाब देंगे।

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुईजिन्हो फालेयरो के कांग्रेस छोड़ने पर सिंह ने कहा कि पार्टी ने उन्हें सब कुछ दिया था। उन्होंने इस राज्य में वर्ष 2017 में संपन्न पिछले विधानसभा चुनावों के घटनाक्रम का हवाला देते हुए फालेयरो को विजय सरदेसाई नीत गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ कांग्रेस के रिश्ते बिगाड़ने का जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अब वह इस विषय में कुछ भी नहीं कह रहे हैं।

सिंह ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराने से कथित तौर पर साफ इनकार कर इस विषय में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अनुरोध ठुकरा दिया है और सरकार की इस प्रतिक्रिया से कुमार की प्रतिष्ठा को आघात लगना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा, ‘‘…लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री किन्हीं अज्ञात कारणों से केंद्र के सामने इतने दबे हुए हैं कि वह अपने इस अपमान को भी स्वीकार कर रहे हैं।’

गौरतलब है कि देश भर में जातिगत जनगणना के समर्थन में बिहार का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कुमार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पिछले महीने मिला था।

भाषा हर्ष रंजन

रंजन