(शीर्षक में सुधार के साथ)
मुंबई, 23 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता छगन भुगबल को एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ‘महाराष्ट्र सदन’ के निर्माण से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपमुक्त कर दिया।
यह मामला 2005-2006 में एक ठेके से संबंधित था। भुजबल पर आरोप था कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का मंत्री रहते हुए ‘महाराष्ट्र सदन’ के निर्माण की जिम्मेदारी एक कंपनी को दी थी और इसके बदले लाभ प्राप्त किया था।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, भुजबल और उनके परिवार के सदस्यों ने महाराष्ट्र सदन के निर्माण के लिए निर्माण कंपनी के.एस. चमनकर से रिश्वत ली थी।
जांच एजेंसी ने दावा किया था कि निर्माण कंपनी ने उन कंपनियों को पैसे हस्तांतरित किए थे, जिनमें मंत्री के बेटे पंकज और भतीजे समीर भुजबल निदेशक थे।
एक अधिवक्ता ने बताया कि शुक्रवार को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामलों के विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण रामजीवन नवंदर ने इस मामले में राकांपा के वरिष्ठ नेता और अन्य आरोपियों को आरोप-मुक्त करने की अर्जी स्वीकार कर ली।
ईडी का मामला राकांपा नेता और उनके परिजनों के खिलाफ भ्रष्टाचार-निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। इस मामले में आरोप था कि महाराष्ट्र सदन की मूल लागत 13.5 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दिया गया।
ईडी के आरोप के अनुसार, भुजबल को कंपनी से 13.5 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली, जबकि कंपनी ने महाराष्ट्र सदन और लोक निर्माण विभाग के अन्य कार्यों से लगभग 190 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज, भतीजे समीर और पांच अन्य लोगों को 2021 में एसीबी के विशेष मामले में आरोप-मुक्त कर दिया गया था।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश
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