मुंबई, 24 जनवरी (भाषा) अभिनेता एवं राजनेता अरुण गोविल ने कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग जगत विविधता का एक जीता-जागता उदाहरण है, जहां सभी धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोगों को काम के अवसर मिलते हैं।
गोविल ने यह प्रतिक्रिया हिंदी सिनेमा में सांप्रदायिक पूर्वाग्रह के बारे में संगीतकार ए.आर. रहमान की हालिया टिप्पणी के जवाब में दी है।
ऑस्कर विजेता संगीतकार रहमान ने हाल ही में बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में हिंदी फिल्म उद्योग में उन्हें काम के कम अवसर मिले हैं। रहमान ने इसके लिए सांप्रदायिकता को जिम्मेदार ठहराया था।
गोविल ने दिलीप कुमार, शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान जैसे अभिनेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग समावेशिता को बढ़ावा देता है।
अरुण गोविल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हमारे हिंदी फिल्म उद्योग में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सांप्रदायिक भेदभाव के कारण लोगों को काम न मिला हो। हालांकि, फिल्म जगत में इसके उदाहरण मौजूद हैं। हमारे फिल्म जगत में हर धर्म के लोग काम करते आए हैं। आज भी ऐसी कोई बात नहीं है। वास्तव में, फिल्म उद्योग ही एकमात्र ऐसा उद्योग है जहां सांप्रदायिक भेदभाव नहीं है।”
उन्होंने कहा, “पहले दिलीप कुमार जैसे अभिनेता थे, वो अपने समय में फिल्म जगत के बादशाह थे। आज भी शाहरुख, सलमान, आमिर जैसे फिल्मस्टार हैं। अगर सांप्रदायिक भेदभाव होता तो ये स्टार कैसे बनते?”
रहमान ने बाद में 18 जनवरी को सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियों को गलत समझा गया और उनका इरादा कभी भी किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था।
भाषा रवि कांत प्रशांत
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