दलितों के मंदिर में पंडित का पूजा से मना, धर्म परिवर्तन की मांग

Reported By: Pushpraj Sisodiya, Edited By: Pushpraj Sisodiya

Published on 26 Oct 2017 06:29 PM, Updated On 26 Oct 2017 06:29 PM

विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस अत्याधुनिक युग में भी हमारा समाज छुआछूत और जातिगत भेदभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है. आज भी दलित वर्ग अपने वजूद के लिए संघर्ष करते देखे जा सकता है. बुंदेलखंड से एक बार फिर एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है... जो सोचने पर मजबूर कर रही है. कि वाकई हम एक सभ्य समाज में जी रहे है.

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छतरपुर जिले के बक्सवाहा में वाल्किमी और अहिरवार समाज के लोगों ने प्रशासन से धार्मिक आजादी की मांग की है. छुआछूत और जातिगत भेदभाव का दंश झेल रहे ये लोग अब धर्म परिवर्तन की बात कह रहे है. दरअसल इन्होंने पूजा पाठ के लिए अपने मोहल्ले में एक मंदिर बनवाया है. जिसमें वो माता की प्रतिमा स्थापित करना चाहते है. 

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इन लोगों का आरोप है. जब वो मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए पुरोहितों के पास गए. तो उन्होंने कर्मकांड कराने से मना कर दिया. इससे आहत दलित वर्ग ने पुरोहितो पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है. और तहसीलदार को कलेक्टर और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर धार्मिक आजादी की मांग की है.

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जातिगत भेदभाव से दुखी दलित वर्ग अब धर्म परिवर्तन का मन बना रहा है. इधर पूरे मामले की जानकारी होने के बाद भी प्रशासन के नुमाइंदों ने इनके बीच जाने की जहमत नहीं उठाई. हां. दफ्तर में बैठकर न्याय के भरोसे का झुनझुना जरूर थमा दिया.

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भारत को आजाद हुए 70 साल हो गए.लेकिन छुआछूत और जातिगत भेदभाव अभी भी हमारे समाज में घर बनाए बैठा है. सरकार भी इसे मिटाने के लिए कई तरह के कार्यक्रम और अभियान चलाती है. बावजूद इसके आज भी दलित वर्ग समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रहा है... जो एक बहुत बड़ी विडंबना है.

 

नरेन्द्र परमार, वेब डेस्क, IBC24, छतरपुर

 

Web Title : Pundit refused to worship in temple of Dalits

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