दुनिया भर की भाषाओं में ‘रफ’ अर्थ वाले सारे शब्दों में कंपित ध्वनि : अध्ययन

दुनिया भर की भाषाओं में ‘रफ’ अर्थ वाले सारे शब्दों में कंपित ध्वनि : अध्ययन

: , January 23, 2022 / 11:23 AM IST

(एच एस राव)

लंदन, 23 जनवरी (भाषा) दुनिया भर की भाषाओं में, ‘रफ’ शब्द की व्याख्या करने वाले सभी शब्दों में ‘कंपित आर’ ध्वनि होने की संभावना है, ऐसी पद्धति करीब छह हजार वर्षों पुरानी है। एक नये अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

बोली जाने वाली 332 भाषाओं के विश्वव्यापी नमूने से, भाषाविदों ने ‘रफ’ और ‘स्मूथ’ शब्दों का विश्लेषण किया। उन्होंने उच्चारण की आवाज़ और स्पर्श की भावना के बीच एक मजबूत कड़ी की खोज की, जिसने आधुनिक भाषाओं की संरचना को प्रभावित किया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम, रेडबाउड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के शोधकर्ताओं ने ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में अपने परिणाम प्रकाशित किए हैं।

‘स्मूथ’ के अर्थ की तुलना में ‘रफ’ शब्द का अर्थ बताने वाले शब्दों में कंपित ‘र’ ध्वनि होने की संभावना करीब चार गुना ज्यादा है। उदाहरण के लिए बास्क भाषा के ‘जकारा’, मंगोली के ‘बार्जगर’ से लेकर डच के ‘रू’ और हंगरी भाषा के ‘दुर्वा’ तक सबमें ‘र’ की कंपित ध्वनि आती है जैसा की इतालवी बोलने वाला व्यक्ति कहेगा ‘अराइवडर्सी’।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 38 वर्तमान भारतीय-यूरोपीय भाषाओं में ‘आर-फॉर-रफ’ पैटर्न संवेदी शब्दों में प्रचलित है। यह प्रोटो-इंडो-यूरोपीय की फिर से बनी जड़ों से भी पता लगाया जा सकता है, यह दर्शाता है कि यह पद्धति इस बड़े भाषा परिवार में छह सहस्राब्दी से अधिक समय से मौजूद है।

अंग्रेजी और हंगेरियन के लिए, दो असंबंधित भाषाएं, मोटे बनावट के लिए लगभग 60 प्रतिशत शब्द, जैसे ‘रफ’, ‘कोर्स’, ‘गर्नल्ड’ और ‘दूर्वा’, ‘एरडेस’, ‘गोस्कोर्टोस’ में ‘र’ ध्वनि आने की संभावना कोमल बनावट वाले शब्दों ‘स्मूथ’, ‘सिल्की’, ‘ऑयली’, ‘सीमा’, ‘सेलीम्स’ और ‘ओलाजोस’ जैसे शब्दों की तुलना में दोगुनी होती है।

विश्व की लगभग तीन-चौथाई बोली जाने वाली भाषाओं में ‘र’ ध्वनि होती है और कंपित ‘र’ सबसे आम संस्करण है। हालांकि, सभी भाषाओं में एक कंपित ‘र’ नहीं होता है और कुछ में इन ध्वनियों (रोटिक्स) का पूरी तरह से अभाव होता है। पैटर्न उन भाषाओं में सबसे अधिक दृढ़ता से पाया जाता है जिनमें विशेष रूप से ‘र’ की कंपति ध्वनि होती है।

रेडबाउड यूनिवर्सिटी में भाषा और संचार में एक सहयोगी प्रोफेसर, सह-लेखक डॉ. मार्क डिंगमेन्से ने कहा, ‘अपने आप में, इनमें से कोई भी पैटर्न काफी आश्चर्यजनक होगा। लेकिन एक साथ देखा जाए तो वे ध्वनियों और हमारे स्पर्श की भावना के बीच एक गहरी जड़ें और व्यापक संबंध प्रदर्शित करते हैं।’

भाषा

नेहा प्रशांत

प्रशांत

 

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