इंडिया रेटिंग्स का अनुमान, चालू वित्त वर्ष में भारत के जीडीपी में आएगी 11.8 प्रतिशत की गिरावट

इंडिया रेटिंग्स का अनुमान, चालू वित्त वर्ष में भारत के जीडीपी में आएगी 11.8 प्रतिशत की गिरावट

इंडिया रेटिंग्स का अनुमान, चालू वित्त वर्ष में भारत के जीडीपी में आएगी 11.8 प्रतिशत की गिरावट
Modified Date: November 29, 2022 / 08:17 pm IST
Published Date: September 8, 2020 12:32 pm IST

मुंबई, आठ सितंबर (भाषा) घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 11.8 प्रतिशत की भारी गिरावट आएगी।

इंडिया रेटिंग्स ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के अपने अनुमान को संशोधित कर -11.8 प्रतिशत कर दिया है। पहले उसने भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.3 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया था।

हालांकि, रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगी। हालांकि, इसकी मुख्य वजह पिछले वित्त वर्ष का कमजोर आधार प्रभाव होगा।

रेटिंग एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘इंडिया रेटिंग्स का जीडीपी में 11.8 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान देश के इतिहास में अर्थव्यवस्था का सबसे कमजोर आंकड़ा होगा। देश में जीडीपी के आंकड़े 1950-51 से उपलब्ध हैं।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह छठा मौका होगा जब देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी। इससे पहले वित्त वर्ष 1957-58, 1965-66, 1966-67, 1972-73 और 1979-80 में अर्थव्यवस्था में गिरावट आई थी। इससे पहले अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट वित्त वर्ष 1979-80 में दर्ज हुई थी। उस समय अर्थव्यवस्था 5.2 प्रतिशत नीचे आई थी।

एजेंसी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 23.9 प्रतिशत की गिरावट, तिमाही जीडीपी आंकड़ों की श्रृंखला में पहली गिरावट है। यह श्रृंखला वित्त वर्ष 1997-98 की पहली तिमाही से उपलब्ध है।

इंडिया रेटिंग्स का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था को 18.44 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-21 में खुदरा मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत पर रहेगी। वहीं थोक मुद्रास्फीति शून्य से 1.7 प्रतिशत नीचे रहेगी।

इंडिया रेटिंग्स के प्रमुख अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में किसी भी तिमाही में वृद्धि दर सकारात्मक नहीं रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘सकारात्मक वृद्धि दर के लिए हमें वित्त वर्ष 2021-22 का इंतजार करना होगा। इस वित्त वर्ष में भी पहली या दूसरी तिमाही में वृद्धि दर सकारात्मक नहीं हो पाएगी। इसके लिए हमें तीसरी या चौथी तिमाही का इंतजार करना होगा।’’

एजेंसी ने कहा कि कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव पड़ा है। सिर्फ अर्थव्यवस्था ही नहीं, रोजगार और आजीविका पर भी इसका असर हुआ है। हालांकि, इसका सबसे अधिक प्रभाव असंगठित क्षेत्र पर देखना को मिला है, जिसकी वजह से प्रवासी मजदूर वापस अपने घरों को लौट गए हैं।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अब प्रवासी मजदूर शहरों को लौट रहे हैं, लेकिन यह प्रक्रिया काफी धीमी है। ऐसे में निजी अंतिम उपभोग खर्च की वृद्धि अब नकारात्मक 12.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहले इसमें 5.1 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया गया था।

भाषा अजय अजय

अजय


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