स्वतंत्रता दिवस को लेकर उत्साह के बीच चीनी मांझे का खतरा बरकरार |

स्वतंत्रता दिवस को लेकर उत्साह के बीच चीनी मांझे का खतरा बरकरार

स्वतंत्रता दिवस को लेकर उत्साह के बीच चीनी मांझे का खतरा बरकरार

: , August 13, 2022 / 10:33 PM IST

(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, 13 अगस्त (भाषा) आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारियों के बीच पुरानी दिल्ली में पतंग बेचने वाले बाजार में तेजी से कारोबार हो रहा है लेकिन पुलिस और गैर सरकारी संगठन खतरनाक चीनी मांझा की बिक्री को रोकने के लिए सतर्क हैं जिससे इस साल कई लोग घायल हुए हैं तथा कुछ लोगों की जान गई है।

‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के बीच लोगों के उत्साह के साथ, आसमान धीरे-धीरे रंगीन पतंगों से भर रहा है। लेकिन, बड़ी और छोटी डिजाइनर पतंगों की धारदार डोर कभी-कभी सड़कों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हादसों का कारण बन जाती हैं। कांच के लेप वाले मांझे की बिक्री या भंडारण दिल्ली में प्रतिबंधित है।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में 34 वर्षीय एक व्यक्ति की चीनी मांझा से गला कटने के कारण मौत हो गई, जब वह रक्षा बंधन मनाने जा रहा था। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पुरानी दिल्ली के लाल कुआं इलाके में सड़कों पर हर तरफ तिरंगा लगे हैं, वहीं पतंग बेचने वाली दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। शनिवार को कई ग्राहक इस बाजार में बड़ी-बड़ी पतंगों और मांझा लेकर जाते दिखे। इस बीच, एक एनजीओ ने पुलिस टीम के साथ लाल कुआं में कुछ दुकानों का औचक निरीक्षण किया और मांझे जब्त किए जिन्हें बाद में स्थानीय हौज कौज़ी पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

चीनी मांझा जमीन पर इंसानों और आसमान में पक्षियों के लिए खतरा है। निरीक्षण के दौरान पेटा (पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) के सदस्यों के साथ गए एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘15 अगस्त पास आने के साथ पतंगबाजी बढ़ जाती है और इसी तरह चीनी मांझा से किसी के जख्मी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए, हम प्रतिबंधित धागे की किसी भी बिक्री या भंडारण की जांच के लिए पिछले दो सप्ताह से चक्कर लगा रहे हैं।’’

सरकार की तरफ से कई पोस्टर बाजार क्षेत्र में लगाए गए हैं, जिसमें उल्लेख किया गया है कि पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाले चीनी मांझा की बिक्री और उपयोग गैर कानूनी है।

मोहम्मद रफी की दुकान का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम चीनी मांझा नहीं रखते हैं। हमारे धागे के उत्पाद बरेली में बनते हैं।’’

एक अन्य पतंग-विक्रेता ने निरीक्षण दल से कहा, ‘‘हम जानलेवा मांझा क्यों रखेंगे। हम जानते हैं कि इससे क्या हो सकता है। हमारे धागे का स्टॉक बरेली से आता है।’’

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 2017 में चीनी मांझा पर प्रतिबंध लगा दिया था। दिल्ली पर्यावरण विभाग द्वारा 2017 में जारी अधिसूचना के निर्देशों के अनुसार, ‘‘नायलॉन, प्लास्टिक या किसी अन्य सिंथेटिक सामग्री से बने धागे, चीनी मांझे की बिक्री, उत्पादन, भंडारण, आपूर्ति, आयात और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।’’ केवल सूती धागे से पतंग उड़ाने की अनुमति होगी, जो किसी भी तेज, धातु या कांच के घटकों या धागे को मजबूत करने वाली सामग्री से मुक्त हो।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शनिवार को कहा, ‘‘हम लोगों को चीनी मांझा की मांग नहीं करने के लिए जागरूक कर रहे हैं और साथ ही दुकानदारों को इस प्रतिबंधित धागे की खरीद या बिक्री में शामिल नहीं होने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम उन लोगों पर भी नजर रख रहे हैं जो इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हैं। उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।’’

दिल्ली के एक प्रमुख निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने भी हाल में लोगों के लिए ‘चीनी मांझा’ के संभावित खतरे को चिह्नित किया था और दो महिला रोगियों के मामलों का उल्लेख किया था, जिन्होंने हाल में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, पटपड़गंज में दुर्घटनावश गंभीर जख्म के बाद जीवन रक्षक सर्जरी करवाई थी। पुलिस ने 26 जुलाई को कहा था कि उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के मौर्य एन्क्लेव इलाके में 30 वर्षीय व्यक्ति का गला पतंग की डोर से कटा गया और उसकी मौत हो गई।

भाषा आशीष माधव

माधव

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)