हर सैनिक की तरह मैं भी सेवानिवृत्त हो जाऊंगा: सीडीएस जनरल चौहान

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हर सैनिक की तरह मैं भी सेवानिवृत्त हो जाऊंगा: सीडीएस जनरल चौहान

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  • Publish Date - May 16, 2026 / 10:23 PM IST,
    Updated On - May 16, 2026 / 10:23 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) एनडीए कैडेट के दिनों से लेकर सर्वोच्च सैन्य पद तक, वर्दी में लगभग आधी सदी के अपने सफर का उल्लेख करते हुए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि वह भी ‘‘हर सैनिक की तरह’’ सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने सैन्य नेताओं की अगली पीढ़ी के साथ अपना ज्ञान साझा करने की इच्छा व्यक्त की।

उन्होंने यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि ‘‘अत्यंत सुनियोजित’’ ऑपरेशन सिंदूर भारत द्वारा लड़े गए पिछले संघर्षों से ‘‘पूरी तरह से अलग’’ था, और इसमें ‘‘जीत के मापदंड भी अलग थे’’।

सीडीएस ने यह भी बताया कि उनकी अगली किताब का विषय ‘ऑपरेशन सिंदूर’ है।

पैंतालीस वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्ति के नजदीक पहुंचे सीडीएस से पूछा गया था कि उनकी भविष्य की योजनाएं क्या होंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हर सैनिक की तरह मैं भी सेवानिवृत्त होऊंगा। लेकिन, मुझे लगता है कि आप सभी में, मैंने सबसे लंबे समय तक सेवा की है… और, अगर आप एनडीए के दिनों को भी गिनें, तो एनडीए तथा आईएमए के चार साल, यानी लगभग 49 साल, यानी आधी सदी का सफर है, जो बहुत बड़ा है।’’

सीडीएस ने कहा, ‘‘ज़ाहिर है, मैंने बहुत अनुभव अर्जित किया है, लेकिन यह शायद सुरक्षा और रक्षा आयाम तक ही सीमित है, और मैं इसे भारतीय सशस्त्र बलों के नेतृत्व की अगली पीढ़ी, मध्य स्तर और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ साझा करना चाहता हूं ताकि हमें बार-बार सीखना और फिर से सीखना न पड़े।’’

‘यूनिफॉर्म अनवील्ड’ द्वारा ‘सेना संवाद’ के तहत आयोजित इस सत्र में उन्होंने एक संचालक के साथ ‘संवाद सत्र’ में हिस्सा लिया और बाद में दिल्ली तथा आसपास के शहरों के विभिन्न स्कूलों से आए छात्रों के समूह से बातचीत की। इस अवसर पर कई सैन्य दिग्गज भी मौजूद थे।

पूर्वी सैन्य कमान के पूर्व कमांडर जनरल चौहान ने तमिलनाडु में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की मृत्यु के नौ महीने से अधिक समय बाद सितंबर 2022 में देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में कार्यभार संभाला था।

उन्होंने सीडीएस के रूप में अपने कार्यकाल से जुड़े सवालों के भी जवाब दिए। हाल ही में सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को भारत का अगला सीडीएस नियुक्त किया है और उनकी मुख्य जिम्मेदारी महत्वाकांक्षी सैन्य थिएटराइजेशन योजना को लागू करने तथा तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करने की होगी।

कई छात्रों ने उनसे पूछा कि ऑपरेशन सिंदूर पिछले भारतीय सैन्य अभियानों से किस तरह अलग था।

उन्होंने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर अलग है। मैं यह नहीं कह रहा कि यह था, यह अभी भी जारी है। इसलिए यह उन सभी पिछले संघर्षों से अलग है, जिन्हें हमने लड़ा है। शायद पहली बार, यह एक प्रकार का मल्टी-डोमेन ऑपरेशन था, क्योंकि हमने तीनों क्षेत्रों में समन्वित तरीके से कार्रवाई की।”

सीडीएस ने कहा ”यह मुख्य रूप से बिना सीधे संपर्क वाला युद्ध था। आम तौर पर सभी युद्ध आमने-सामने लड़े जाते हैं। इसमें अंतरिक्ष और साइबर जैसे नए क्षेत्रों की तकनीकों का भी इस्तेमाल हुआ।”

साथ ही उन्होंने कहा कि यह अभियान भले ही केवल 88 घंटे चला हो, लेकिन इसमें अत्यंत व्यापक समन्वय की आवश्यकता थी—सिर्फ तीनों सेनाओं के बीच ही नहीं, बल्कि सरकार के अन्य अंगों और एजेंसियों के साथ भी।

सीडीएस ने कहा, ”इसलिए यह एक अत्यंत अच्छी तरह समन्वित अभियान था।”

ऑपरेशन सिंदूर पिछले वर्ष सात मई की तड़के पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें भारतीय बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश