दिल्ली सरकार के कार्यक्रम से जुड़ने वाले ‘मेंटॅर’ का साइकोमीट्रिक आकलन होगा : सिसोदिया

दिल्ली सरकार के कार्यक्रम से जुड़ने वाले 'मेंटॅर' का साइकोमीट्रिक आकलन होगा : सिसोदिया

Edited By: , January 14, 2022 / 05:34 PM IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली सरकार के “देश का मेंटॅर” कार्यक्रम में शामिल सभी मेंटॅर को इसमें शामिल किए जाने से पहले, उनका साइकोमीट्रिक मूल्यांकन किया जा रहा है। हालांकि एनसीपीसीआर ने सवाल उठाया है कि क्या यह परीक्षण संभावित बाल यौन शोषण करने वालों की पहचान कर सकते हैं ?

सिसोदिया ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा उठाई गई आपत्ति के जवाब में की। आयोग ने बच्चों के अज्ञात लोगों के संपर्क में आने और अपराध तथा दुर्व्यवहार की आशंका पर चिंता जताते हुए कार्यक्रम को स्थगित करने की मांग की थी।

उपमुख्यमंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हमने कार्यक्रम की संरचना तय करते समय इन विषयों पर अत्यधिक ध्यान दिया है। कार्यक्रम के तहत, सभी महिला छात्रों को महिला सलाहकार जबकि सभी पुरुष छात्रों को पुरुष सलाहकार आवंटित किए जाते हैं। कार्यक्रम के तहत संरक्षक के आवंटन के लिए छात्रों के माता-पिता की सहमति अनिवार्य कर दी गई है।”

उन्होंने कहा, “उन सभी लोगों का साइकोमीट्रिक मूल्यांकन किया जा रहा है जो मेंटॅर के रूप में सहभागिता के लिए आगे आए हैं और केवल परीक्षा पास करने वालों को ही मार्गदर्शन के लिए छात्र/छात्राएं दिए जा रहे हैं।”

साइकोमीट्रिक मूल्यांकन में व्यक्ति की काम और संस्थान के संबंध में व्यवहार अनुकूलता को परखने के साथ साथ उसकी सोचने-समझने की क्षमता, टीम के रूप में काम करने की योग्यता आदि का आकलन किया जाता है।

सिसोदिया के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है।

‘देश का मेंटॅर’ कार्यक्रम पिछले साल अक्टूबर महीने में शुरू किया गया था। इसके तहत नौवीं से 12वीं कक्षा के बच्चों को समर्पित ‘मेंटॅर’, उनके करियर एवं जीवन के संदर्भ में मार्गर्दशन देंगे। इस कार्यक्रम के ब्रांड एम्बैस्डर बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद हैं।

इसके तहत मेंटॅर को सरकारी स्कूल के 10 छात्रों को “गोद लेने” की आवश्यकता होती है। मेंटॅर की भूमिका अपने संबंधित क्षेत्रों में सफल नागरिकों द्वारा निभाई जाती है जो इन छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं।

एनसीपीसीआर का कहना है कि इस कार्यक्रम से बच्चों को कुछ खतरों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव को पत्र लिखा था और इस सप्ताह की शुरुआत में उसने फिर से पत्र लिखकर कहा था कि जो जवाब उसे मिला है उसमें उपयुक्त तथ्य मौजूद नहीं हैं।

उसने कहा कि खामियों को दूर किए जाने तक इस कार्यक्रम को निलंबित रखा जाए। एनसीपीसीआर का कहना है कि इस कार्यक्रम से बच्चों को कुछ खतरों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव को पत्र लिखा था और इस सप्ताह की शुरुआत में उसने फिर से पत्र लिखकर कहा था कि सरकार की तरफ से जवाब उसे मिला है उसमें उपयुक्त तथ्य मौजूद नहीं हैं।

एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने सवाल किया कि दिल्ली सरकार को कार्यक्रम से मेंटॅर के तौर पर जुड़ने वालों का पुलिस सत्यापन कराने में क्या समस्या है ?

कानूनगो ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “दिल्ली सरकार यहां पुलिस सत्यापन नहीं कराकर अपनी अक्षमता छिपा रही है। इसके अलावा वे कह रहे हैं कि मेंटॅर का साइकोमीट्रिक परीक्षण किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “मैं उनसे पूछना चाहता हूं: क्या यह साइकोमीट्रिक परीक्षण किसी भी बच्चे के लिए संभावित खतरे के संदर्भ में किसी व्यक्ति का ‘फुल प्रूफ’ आकलन है? क्या इस साइकोमीट्रिक परीक्षण का विश्लेषण और जांच पेशेवर विशेषज्ञों द्वारा की जाती है? क्या यह साइकोमीट्रिक परीक्षण बाल यौन शोषण करने वालों या संभावित बाल यौन शोषकों की पहचान कर सकता है?”

कानूनगो ने यह भी कहा कि सिसोदिया ने कहा है कि अभिभावकों की अनुमति ली जाती है। ‘‘अगर आप बार बार यह कहते हैं कि बच्चे समाज के कमजोर वर्ग से आते हैं और करियर के लिए उन्हें मार्गदर्शन की जरूरत है तो आप यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि बच्चों के अभिभावक इस कार्यक्रम में सहभागिता का निर्णय लेने में सक्षम हैं ?’’

उन्होंने कहा ‘‘दिल्ली सरकार इन बच्चों की जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ रही है। जो खामियां हमने बताईं, उन्हें दूर करने की बात तो दूर, वे उन्हें देखना ही नहीं चाहते।’’

भाषा

प्रशांत मनीषा

मनीषा