नारकोटिक जिहाद टिप्पणी : विवाद खत्म करने के लिए कांग्रेस ने की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

नारकोटिक जिहाद टिप्पणी : विवाद खत्म करने के लिए कांग्रेस ने की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

Edited By: , September 14, 2021 / 04:49 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 14 सितंबर (भाषा) विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को केरल सरकार से अनुरोध किया कि वह पाला बिशप जोसेफ काल्लारांगट की ‘नारकोटिक जिहाद’ टिप्पणी से उत्पन्न विवाद का स्थाई समाधान निकालने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ईसाई और मुस्लिम समुदाय टकराव की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन राज्य सरकार ‘‘मूक दर्शक’’ बनी हुई है।

हालांकि, इस विवादित टिप्पणी पर बिशप का समर्थन करने वाली भाजपा ने एरात्तुपेट्टा नगर निगम में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की हालिया राजनीतिक साझेदारी की ओर ईसाई समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही उसने यह बताने का प्रयास किया कि एलडीएफ और माकपा चरमपंथी समूहों को अपना समर्थन देंगे।

एसडीपीआई, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राजनीतिक मोर्चा है।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन ने कहा कि इस मामले से कहीं से भी नहीं जुड़े लोगों का एक समूह सोशल मीडिया पर घृणा अभियान चला कर आग में घी डालने का काम कर रहा है और यह दक्षिण भारत के राज्य में सौहार्द को भंग करना चाह रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वाम मोर्चा नीत सरकार इस विवाद को समाप्त करने के लिए कुछ नहीं कर रही है, सिर्फ मूक दर्शक बनी हुई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से कैथोलिक बिशप की ‘नारकोटिक जिहाद’ वाली टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे पोस्ट देखने का अनुरोध किया और पूछा कि अपने हितों के लिए कुछ तत्व साम्प्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में उनकी सरकार, खुफिया विभाग और पुलिस का साइबर प्रकोष्ठ क्या कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दो समुदायों के बीच टकराव रोकने के लिए कांग्रेस ठोस रुख अपनाएगी, और तनाव खत्म करने के सरकार के किसी भी प्रयास का पार्टी समर्थन करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें दोनों समुदायों के सभी नेता भाग लें। सरकार को यह तनाव समाप्त करना चाहिए। ऐसे भी लोग हैं जो इस अवसर के इंतजार में हैं ताकि केरल को तबाह कर सकें। हम सभी से बार-बार अनुरोध करते हैं कि उनके जाल में ना फंसें।’’

भाषा अर्पणा मनीषा

मनीषा