मन के हारे हार, मन के जीते जीत, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के 95वें वार्षिक पूर्ण सत्र पर देश के नाम पीएम मोदी का संबोधन

मन के हारे हार, मन के जीते जीत, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के 95वें वार्षिक पूर्ण सत्र पर देश के नाम पीएम मोदी का संबोधन

मन के हारे हार, मन के जीते जीत, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के 95वें वार्षिक पूर्ण सत्र पर देश के नाम पीएम मोदी का संबोधन
Modified Date: November 29, 2022 / 08:06 pm IST
Published Date: June 11, 2020 6:10 am IST

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के 95वें वार्षिक पूर्ण सत्र के मौके पर देश को संबोधित कर रहे हैं। पीएम मोदी के मुताबिक 95 वर्ष से निरंतर देश की सेवा करना, किसी भी संस्था या संगठन के लिए अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। ICC ने पूर्वी भारत और नॉर्थ ईस्ट के विकास में जो योगदान दिया है, विशेषकर वहां की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को वो भी ऐतिहासिक है।

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कोरोना को लेकर देश में किए जा रहे प्रयासों के बारे में पीएम मोदी ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से पूरी दुनिया लड़ रही है, भारत भी लड़ रहा है लेकिन अन्य तरह के संकट भी निरंतर खड़े हो रहे हैं। कहीं बाढ़ की चुनौती, कहीं टिड्डी का कहर, कहीं ओलावृष्टि, असम की ऑयल फील्ड में आग, लगातार छोटे-छोटे भूकंप की खबरें।

कभी-कभी समय भी हमें परखता है, हमारी परीक्षा लेता है। कई बार अनेक कठिनाइयां, अनेक कसौटियां एक साथ आती हैं। लेकिन हमने ये भी अनुभव किया है कि इस तरह की कसौटी में हमारा कृतित्व, उज्ज्वल भविष्य की गारंटी भी लेकर आता है।

ICC ने 1925 में अपने गठन के बाद से आज़ादी की लड़ाई को देखा है, भीषण अकाल और अन्न संकटों को देखा है और भारत की Growth Trajectory का भी आप हिस्सा रहे हैं। अब इस बार की ये AGM एक ऐसे समय में हो रही है, जब हमारा देश Multiple Challenges को Challenge कर रहा है।

हमारे यहां कहा जाता है- मन के हारे हार, मन के जीते जीत, यानि हमारी संकल्पशक्ति, हमारी इच्छाशक्ति ही हमारा आगे का मार्ग तय करती है।
जो पहले ही हार मान लेता है उसके सामने नए अवसर कम ही आते हैं

हर वो चीज, जिसे आयात करने के लिए देश मजबूर है, वो भारत में ही कैसे बने, भविष्य में उन्हीं उत्पादों का भारत निर्यातक कैसे बने, इस दिशा में हमें और तेजी से काम करना है।

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पीएम मोदी का भाषण.. सुनिए

ये हमारी एकजुटता, ये एक साथ मिलकर बड़ी से बड़ी आपदा का सामना करना, ये हमारी संकल्पशक्ति, ये हमारी इच्छाशक्ति, हमारी बहुत बड़ी Strength है।

 


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