बेहतरीन रिकार्ड के बाद भी यूपीएससी ने डीजीपी पद के लिए उनके नाम की अनदेखी की : संजय पांडेय ने अदालत में कहा

बेहतरीन रिकार्ड के बाद भी यूपीएससी ने डीजीपी पद के लिए उनके नाम की अनदेखी की : संजय पांडेय ने अदालत में कहा

: , January 25, 2022 / 08:28 PM IST

मुंबई, 25 जनवरी (भाषा) भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और महाराष्ट्र के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय पांडेय ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय में कहा कि संघ लोक सेवा आयोग चयन समिति ने उनकी बेहतरीन वार्षिक गोपनीय रिकॉर्ड (एसीआर) की अनदेखी की तथा उनका नाम पुलिस महानिदेशक के पद के लिए अधिकारियों की सूची से बाहर कर दिया।

पांडेय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सेरवई ने मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की पीठ से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी को उस जनहित याचिका में पक्षकार बनाने का आग्रह किया जिसमे प्रकाश सिंह मामले में पुलिस सुधारों पर 2006 के उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार राज्य में पुलिस महानिदेशक के रिक्त पद को भरने के लिए महाराष्ट्र सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

यह याचिका अधिवक्ता दत्ता माने ने अधिवक्ता अभिनव चंद्रचूड़ के जरिए दायर की है। इसमें तर्क दिया गया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार, राज्य में शीर्ष पुलिस अधिकारी का पद कार्यवाहक नहीं हो सकता है और 2006 के फैसले के अनुसार महाराष्ट्र सरकार द्वारा जल्द से जल्द इस पद पर किसी अधिकारी की नियुक्ति की जाए जिनका न्यूनतम कार्यकाल निर्धारित हो।

महाराष्ट्र के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणि ने सोमवार को अदालत से कहा था कि पांडेय अभी राज्य में सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और उन्हें पिछले साल तत्कालीन डीजीपी सुबोध जायसवाल के स्थान पर कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था।

कुंभकोणि ने यह भी कहा कि पिछले साल आठ नवंबर को, राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव सीताराम कुंटे ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि चयन समिति डीजीपी पद के लिए पांडेय के नाम पर पुनर्विचार करे।

हालांकि, अदालत ने कहा था कि कुंटे चयन समिति के तीन सदस्यों में से एक थे और उन्होंने पिछले साल एक नवंबर को तीन अधिकारियों- हेमंत नागराले, के. वेंकटेशम और रजनीश सेठ के नामों का प्रस्ताव दिया था। इसके एक हफ्ते बाद कुंटे ने यूपीएससी को लिखा था कि पांडेय के नाम पर विचार किया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसा आचरण उचित नहीं है और किसी भी कानूनी सिद्धांतों पर आधारित नहीं है।

सेरवई ने मंगलवार को अदालत से अनुरोध किया कि पांडेय को जनहित याचिका में एक पक्ष बनाया जाए क्योंकि उनके पास ‘कहने के लिए बहुत कुछ’ है।

अदालत ने जनहित याचिका पर सभी दलीलों की सुनवाई पूरी कर ली और अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। हालांकि उसने सेरवई सहित विभिन्न पक्षों को अनुमति दे कि अगर वे चाहें तो बृहस्पतिवार तक अपनी लिखित दलीलें पेश कर सकते हैं।

भाषा

अविनाश अनूप

अनूप

 

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