Avimukteshwaranand's statement against CM Yogi Adityanath || Image- IBC24 News File
प्रयागराज: माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई बदसलूकी और इसके बाद मचे रार के बीच शंकराचार्य ने बड़ा बयान दिया है। यह बयान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेकर दिया है। (Avimukteshwaranand’s statement against CM Yogi Adityanath) शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम (केशव प्रसाद मौर्य) समझदार हैं, उन्हें मुख्यमंत्री होना चाहिए, जो अकड़ में और जिद्द में बैठा हो उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि, केशव प्रसाद मौर्य ने समझा है कि, उनके अफसरों से गलती हुई है। वह ये भी समझते है कि, मामले को इस तरह से नहीं बढ़ाया जाना चाहिए, इसे समेटना चाहिए जिससे पार्टी को नुकसान न हो। ऐसे व्यक्ति, समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए सीएम योगी पर निशाना साधा कि, ऐसे व्यक्ति को नहीं जिसमे अकड़ा हो और जो जिद्द पालकर बैठा हो।
गौरतलब है कि, कुछ दिन पहले शंकराचार्य के विवाद पर जवाब देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने अविमुक्तेश्वरानंद को इशारों ही इशारों में कालनेमि कहा था। वही सीएम के बयान के उलट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद ने अविमुक्तेश्वरानन्द से शान्तिपूरवक स्नान की अपील की थी। दोनों ही बयानों को सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशवप्रसाद के बीच मतभेद के तौर पर भी देखा जा रहा था।
बता दें कि, माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर जारी विवाद के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें दूसरा नोटिस भेजकर पूछा था कि क्यों ना आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या पर आरक्षित पुल संख्या 2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए बग्घी पर सवार होकर भीड़ के साथ जा रहे थे। उस समय स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी।
नोटिस के मुताबिक, “इस कृत्य के कारण मेला पुलिस और मेला प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। (Avimukteshwaranand’s statement against CM Yogi Adityanath) स्वामी जी के इस प्रकार प्रवेश से भगदड़ होने और उससे प्रबल जनहानि होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।”
नोटिस में कहा गया है, “आपके (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) इस कृत्य के कारण क्यों ना आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।”
इस नोटिस को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने कहा, “अब सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। शंकराचार्य शिविर पंडाल के पीछे प्रशासन ने यह नोटिस चस्पां किया और वह भी पिछली तिथि (18 जनवरी) में और प्रशासन के कर्मचारी द्वारा बताने पर ही हम लोग इस नोटिस के बारे में जान सके।”
बता दें कि, प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। यह विवाद मेला प्रशासन द्वारा उनके रथ और स्नान को लेकर शुरू हुआ। वे मौनी अमावस्या से धरना दे रहे हैं और अब यह छठे दिन से ज्यादा हो चुका है। उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है, लेकिन वे धरना नहीं छोड़ रहे। संत समाज में भी इस पर अलग-अलग राय है। कुछ संत उनके साथ हैं, तो कुछ उनके खिलाफ बोल रहे हैं।
यह विवाद अब सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बन चुका है। विपक्षी दल इसे उठा रहे हैं। (Avimukteshwaranand’s statement against CM Yogi Adityanath) योगी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि संतों का अपमान हो रहा है। वहीं, भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। कुछ लोग शंकराचार्य को फर्जी कह रहे हैं, तो कुछ उनका समर्थन कर रहे हैं। संत समाज में भी बंटवारा दिख रहा है। योगी के समर्थक जैसे बाबा रामदेव ने उनकी भाषा की आलोचना की है।
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