पटना के प्रतिष्ठित परिवारों को नई सरकार से उच्च शिक्षण संस्थानों की उम्मीद |

पटना के प्रतिष्ठित परिवारों को नई सरकार से उच्च शिक्षण संस्थानों की उम्मीद

पटना के प्रतिष्ठित परिवारों को नई सरकार से उच्च शिक्षण संस्थानों की उम्मीद

:   Modified Date:  May 30, 2024 / 05:53 PM IST, Published Date : May 30, 2024/5:53 pm IST

(कुणाल दत्त)

पटना, 30 मई (भाषा) बिहार की राजधानी पटना के कुछ जाने-माने परिवारों को चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार से राज्य में अत्याधुनिक उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना, शहरी नवीनीकरण और विरासती भवनों के रखरखाव की उम्मीद है।

पटना के एक संपन्न मारवाड़ी परिवार से ताल्लुक रखने वाले 59 वर्षीय व्यवसायी अभय कनोरिया को लगता है कि राज्य में अपना खोया हुआ गौरव वापस पाने की क्षमता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जो सरकार बनेगी उससे पटना के लिए मेरी यही अपेक्षा है कि वह यहां कुछ अत्याधुनिक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने में मदद करे। हमारे यहां बहुत सारे अच्छे स्कूल हैं, लेकिन 12वीं कक्षा के बाद विद्यार्थी बिहार के विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाने के कारण बेहतर पढ़ाई के लिए यहां से पलायन करने को विवश होते हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाही लालफीताशाही में कमी आयी है पर यह अब भी व्याप्त है और कानून व्यवस्था से संबंधित कुछ मसले हैं जिन्हें हल करने की जरूरत है।

उन्होंने आईआईटी-पटना, एम्स-पटना और कुछ प्रबंधन संस्थानों के राज्य में स्थित होने की बात मानी लेकिन इस बात पर अफसोस जताया कि यहां कोई उद्योग नहीं है और कॉर्पोरेट संस्थानों के राजधानी में कार्यालय तक नहीं हैं। हालांकि उन्होंने राज्य में आ रहे ‘स्टार्ट-अप’ की सराहना की।

कनोरिया के पूर्वज राजस्थान से पटना आए थे और उनका परिवार 200 साल से यहां रह रहा है। वह कहते हैं कि उनके परिवार की कंपनी 1870 के दशक में आयकर देने वाली पटना की पहली कंपनी थी।

उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि सही नीतियों के साथ बिहार फिर से समृद्ध हो सकता है।”

फिल्म निर्माता प्रणव शाही बिहार के पूर्ववर्ती जमींदारी परिवार हथवा राज से हैं। वह कहते हैं कि शहर का उचित शहरी नियोजन के बिना विस्तार हो रहा है।

उन्होंने गंगा नदी के पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र के ऊपर ‘गंगा ड्राइव’ (पुल) और अशोक राजपथ पर एक डबल-डेकर फ्लाईओवर बनाये जाने का जिक्र करते हुए कहा इसके बावजूद अतिक्रमण पटना की एक कड़वी सच्चाई बनी हुई है।

शाही ने कहा, “ शहर में चारों ओर फैली गंदगी का जिक्र नहीं किया जा रहा है। अगर लोग कूड़ा फैला रहे हैं तो उन्हें दंडित किया जाए। क्या नगर निगम शहर को साफ रख सकता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पटना की पुरानी इमारतों को होटलों में बदला जा सकता है या पर्यटक स्थलों के तौर पर उनका इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उन्हें ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, पर्यटक कांच से बनी नई इमारतों को देखने के लिए पटना नहीं आएंगे।

पटना उच्च न्यायालय के वकील और प्रसिद्ध बैरिस्टर सर सुल्तान अहमद के परपोते आलमदार हुसैन ने कहा कि हर पांच साल में चुनाव होते हैं लेकिन बिहार में कुछ नहीं बदलता।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेता आते हैं, ज़ोरजार भाषण देते हैं, लोगों से बड़े-बड़े वादे करते हैं और फिर नतीजे आने के बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है और अगले चुनाव में चर्चा के लिए रख दिया जाता है।

हुसैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं केवल यह आशा करता हूं कि नई सरकार आने पर, पटना और शेष बिहार की सभी विरासती इमारतों का रखरखाव किया जाए और पटना का गौरव, सुल्तान पैलेस भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाए।’’

पटना जिले की दो लोकसभा सीट – पटना साहिब और पाटलिपुत्र पर एक जून को मतदान होगा। दोनों सीट पर 43 लाख से अधिक मतदाता हैं।

पटना साहिब से भाजपा के मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं जबकि विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के तहत कांग्रेस ने पूर्व रेल मंत्री बाबू जगजीवन राम के नाती और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के बेटे अंशुल अभिजीत को टिकट दिया है।

पाटलिपुत्र में मौजूदा भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव के खिलाफ राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बड़ी बेटी मीसा भारती मैदान में हैं।

भाषा अनवर राजकुमार नोमान

नोमान

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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