#NindakNiyre: क्या राम को राम बनाने वाले जनजातीय समाज के लोग हैं? |

#NindakNiyre: क्या राम को राम बनाने वाले जनजातीय समाज के लोग हैं?

#NindakNiyre:

Edited By :   January 31, 2024 / 04:33 PM IST

Barun Sakhajee

Barun Sakhajee, Associate Executive Editor, IBC-24

बरुण सखाजी

राम सबके राम हैं। वे भक्तराज भरत के हैं, तटस्थ रहकर संकटकाल में प्रशासनिक व्यवस्था संभालने वाले शत्रुघ्न के हैं, वे शेषावतार लक्ष्मण के हैं, वे भक्तिबल के महापुंज हनुमान के हैं, वनवासी निषाध के हैं, सेवक केवट के हैं, नवधा भक्ति की प्रतीक जनजाति समाज की माता शबरी के हैं। राम तो उन कैकई के भी हैं, जिन्होंने उन्हें राजतिलक से वंचित कर वनवास दिलाया। इसलिए कहा जाता है राम सबके हैं। जानजातिय समाज से राम का नाता ज्यादा दिखाई देता है। जनजातिय समाज सबका पालनहार होता है। सबका ख्याल रखने वाला होता है। सबका सम्मान करने वाला सच्चा सनातनी होता है। इसका उदाहरण देखिए। रामचरित मानस के मुताबिक जब प्रभु श्रीराम वनवास के पहले चरण में चित्रकूट में निवास करने पहुंचे तो देवताओं से लेकर सभी लोग उनके दर्शन करने पहुंचे और उनके सामने अपनी-अपनी पीड़ा कही। परंतु इनमें से किसी ने भी यह नहीं सोचा, वनवासी राम रहेंगे कहां, खाएंगे क्या, उन्हें वनक्षेत्र में असुविधाओं से कैसे बचाएंगे। यह सोचा जनजातिय समाज ने। तुलसीदास जी ने लिखा है।
 
यह सुधि कोल किरातन्ह पाई, हरषे जनु नव निधि घर आई।।
कंद मूल फल भरि-भरि दोना, चले रंक जनु लूटत सोना।।
वनवास में राम जी के लिए भोजन, निवास की व्यवस्था। उनकी वन क्षेत्र में सुरक्षा, सुविधा की व्यवस्था जनजातिय समाज ने की।
जनजातिय समाज के महत्व को इससे भी और बेहतर समझा जा सकता है, कि राम के दर्शन और सेवा के लिए देवताओं को भी जानजातिय देह धारण करना पड़ी। जैसा कि राम चरित मानस में उल्लेख है।
कोल किरात बेष सब आए।
रचे परन तृन सदन सुहाए।।
इसका अर्थ है, रामजी की सेवा का देवों की देह को अवसर नहीं मिला, बल्कि देवताओं को भी जनजातिय देह धारण करना पड़ा। वनवासी समाज देवताओं से भी अधिक महत्वपूर्ण है प्रभु राम के लिए। जनजातिय लोगों ने राम के निवास के लिए जो कुटिया बनाई थी, उसे स्वर्ग से भी बढ़कर माना गया। जनजातिय समाज ने हमेशा ही प्रभु श्रीराम के निवास प्रबंध की व्यवस्था की है। अपने हाथों से कुशलतापूर्वक कुटिया बनाई है। और यह कुटिया ऐसी-वैसी नहीं बनाई। तुलसीदास कहते हैं…
रामु लखन सीता सहित, सोहत परन निकेत
जिमि बासव बस अमरपुरी, सची जयंत समेत
यानि ऐसी परनकुटी जनजातिय समाज के कुशल हाथों ने बनाकर दी, जिसकी तुलना इंद्र के निवास से भी नहीं की जा सकती। राम वनवासी भाइयों के हाथों की बनाई कुटिया में माता सीता लक्ष्मण समेत रहते हैं और उस कुटिया को इंद्र के महाविलास भवन से भी ऊंचा बताते हैं। एक तरह से देखें तो आज का भव्य अयोध्या स्थित राम मंदिर इन्हीं कुशल हाथों का चमत्कार है। हमारे वनवासी जनों ने सदा ही राम का ख्याल रखा है। सेवा को सबसे ऊपर रखा है। प्रभु राम ने भी कहा है, मैं उसका खास ख्याल रखता हूं जिसके मन में छल, कपट न हो। हमारे वनवासी भाइयों का मन निर्मल है।
राम जन्म के समय एक युवराज थे। यशस्वी धनुर्धर, विद्या, विज्ञान में पारंगत राम थे। श्रेष्ठ पुत्र, श्रेष्ठ शिष्य। राजतिलक, राजपाट छोड़कर अपने पिता और कुल के मान के लिए जब राम वन की ओर निकले तो उन्हें संसार में त्यागी, राजा, न्यायप्रिय, वीरवान राम की पहचान मिली। इसके पीछे जनजातिय समाज का बड़ा योगदान रहा है। प्रभु श्रीराम वन-वन भ्रमण करते रहे, कहीं वास करते कहीं विश्राम। माता सीता, लक्ष्मण समेत वे जनजातिय समाज के बीच अनेक वर्षों तक रहे। इस बीच जानजातिय समाज में प्रचलित मान्यताओं में वे रमे। इनकी संस्कृति में रमे। शिव साधक होने के नाते राम सदा ही हमारे छत्तीसगढ़ समाज के निकटतम रहे।
जनजातिय समाज जिनके साथ रहता है उन्हें राम बना देता है और राम जिनके साथ रहते हैं वे जनजातिय समाज की तरह श्रेष्ठ बन जाते हैं। श्रेष्ठ यानि सत्यनिष्ठ, ईमानदार, विचारवान, सनातन के सच्चे साधक, प्रकृति के सच्चे रक्षक, विश्व का कल्याण करने वाले बन जाते हैं। यह विरला उदाहरण संसार में किसी संस्कृति में नहीं मिलता। ये भारत की ही महान संस्कृति है जिसकी धुरी जनजातिय समाज है। इनके केंद्र में शिव उपासक राम हैं।
भारत पर हुए सदियों के हमलों ने हमे सिखाया है अब हमें अयोध्या बनने की जरूरत है। अयोध्या जिसे कोई जीत नहीं सकता। जिसके विरुद्ध कोई युद्ध नहीं कर सकता। हमारा विस्तृत भारत अयोध्या तत्व के अभाव में खंडित होता चला गया। इसलिए इस मंदिर का मौजूदा समय में बड़ा महत्व है। मुगलों से लेकर अंग्रजों ने मुट्ठीभर जनसमूह बनकर हमारे विराट जनसमूह को बिखरा दिया, हरा दिया। यह कैसे हुआ। यह हमारे भीतर आए भीरू भाव से हुआ, लेकिन अब मोदी जी के नेतृत्व में जिस तरह की सरकार चल रही है उससे यह हर वर्ग को समझ आ गया है कि अब हम एक यूनिट हैं। यह देश एक यूनिट है। प्रभु श्रीराम रघुकुल के शिरोमणि हैं। रघुकुल का राज सात सिंधुओं तक फैला हुआ था। यह सप्त सिंधु असल में सिर्फ भारत की 7 नदियां ही नहीं हैं, बल्कि दुनिया के सभी महासागर हैं। जो भारत समग्र दुनिया तक विस्तारित था, वह हमारे अयोध्या भाव के खात्मे से विखंडित हुआ। लेकिन अब अयोध्या का भाव जाग चुका है। प्रभु श्रीराम का भाव जाग चुका है। बच्चा-बच्चा राम का आभास हो चुका है। हम सब सबको लेकर चलते हुए राम के मूल विचार से तादात्म बिठा रहे हैं। इसलिए अब अयोध्या विश्व का शक्ति, भक्ति केंद्र बन चुका है। शक्ति जो आत्मरक्षा के लिए हो, भक्ति जो आत्मकल्याण के लिए की जाए। राम को आज के दर्शन में समझना चाहिए। राम पर गहन आध्यात्मिक और धार्मिक शोध होने चाहिए। संसार में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता जहां सप्तसिंधु के विराट राज्य को छोड़कर कोई 14 वर्षों के लिए वनवास को चला जाए। त्याग की महामूर्ति। वनवास में जात-पात के भेद को छोड़कर प्रभु श्रीराम सबको गले लगाते हैं। सबको लेकर चलते हैं। जैसा कि मोदीजी कहते हैं, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। प्रभु श्रीराम तो रावण से भी विनम्रता से माता सीता को वापस करने की बात कहते हैं। युद्ध की ओर बढ़ते हर कदम पर वे बात से ही हल निकालने की कोशिश करते हैं। लेकिन रावण अपने अहंकार के वशीभूत समझ नहीं पाता। आज भी अनेक अहंकारी, विघ्नकारी बन गए हैं। लेकिन प्रभु श्रीराम ने समग्र भारत को सिखाया है, बात करिए, संवाद करिए। प्रयास कीजिए बात से ही बात बन जाए। लेकिन जब बात से बात न बने तो प्रभु श्रीराम आयुध भी रखते हैं। यानि अयोध्या और आयुध का शास्त्रानुसार योग ही भारत है। हमने देखा है, 2014 से पहले तक पाकिस्तान कितना बड़ा मसला था। आए दिन भारत की नाक में दम करता रहता था। हम शक्तिशाली होकर भी। सैन्य पराक्रम के धनी होकर भी हमारे ही पुराने भूभाग पाकिस्तान का लिहाज करते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज पाकिस्तान का कोई नामलेवा नहीं है। कारण साफ है। आप सबने ऐसी सरकार को चुनकर भेजा जो अपने भीतर अयोध्या भाव रखती है। वह किसी को डराती नहीं है, लेकिन किसी से डरती भी नहीं है। दुनिया की आंखों में आंखें डालकर मोदी जी बात करते हैं। दुनिया में भारत की धमक है। भारत किसी कमजोर को दबाता नहीं, किसी शक्तिशाली से डरता नहीं। वसुधैव कुटुंबकम हमारे मौलिक सिद्धांतों में हैं। भारत की आत्मा है सनातन। सनातन के उत्थान के बिना, अभ्युदय के बिना संसार का कल्याण नहीं हो सकता। इसलिए भारत ने अपने कोर विषयों में राम की प्रेरणा को रखा है। यह प्रभु राम ने ही हमे सिखाया है। आयुध और अयोध्या को साथ लेकर चलो।
अब रामराज्य की बात पर आते हैं। भारत आज अच्छी सरकारी योजनाओं, अच्छे क्रियान्वयन, अच्छे विचार, अच्छी सैन्य शक्ति, अच्छी आर्थिक शक्ति, अच्छे उद्देश्य के लिए जाना जा रहा है। दुनियाभर के बड़े-बड़े सामरिक देश भी भारत के सामने नतमस्तक हैं। क्योंकि अब भारत का विचार राम हैं और नीति अयोध्या है।
छत्तीसगढ़ में रामराज्य होगा। रामराज्य से तात्पर्य भाव, युद्ध कौशल राम जैसा, राजकाज में सत्यनिष्ठा और ईमानदारी रामराज्य जैसी। सबको लेकर सबके साथ सबका विकास करना है। समूचा छत्तीसगढ़ राममय हो ऐसा हमारा प्रयास है।
22 जनवरी को सभी को अपने घरों में दिवाली जैसा माहौल बनाना है। दिक्पालों को पैरों में रौंदने वाले, भ्रष्टाचारी, दुराचारी, महाअसुर रावण को समाप्त करके जब प्रभु राम अयोध्या लौटे तो दुनिया ने इस हर्ष में घरों में दिए जलाए। राम के राजतिलक से उत्साहित लोगों ने ढोल, ताशे बजाए। रामचरित मानस और बालमीक जी की रामायण में उल्लेख है, अयोध्या की गलियों में इत्र, फूल बिछाए गए। त्रेता की अयोध्या रोशनी से जगमग हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप पर सप्तसिंधु यानि सात महासागरों से घिरी दुनिया पर जिन रघुनाथ का राज था उनकी राजधानी अयोध्या के निवासियों ने धूमधाम से यह उत्सव मनाया। कहते हैं, तभी से संसार में दिवाली का उत्सव मनाया जाने लगा। 22 को भी ऐसा ही अवसर है जब सैंकड़ों सालों के संघर्ष के बाद प्रभु राम अयोध्या में विराजमान हो रहे हैं। इस अवसर पर हम सब मिलकर अपने घरों में दिया जलाएंगे। छत्तीसगढ़ में इन दियों की रोशनी दोगुना होगी। क्योंकि हमारी संस्कृति में भांजों को ऊंचा स्थान दिया गया है। राम हमारे भांजे हैं। भांचा राम का राजतिलक हमारे लिए सबसे बड़ा अवसर है। हर घर दिये से रोशन होगा। 22 के बाद हमारी सरकार भी लोगों को अयोध्या लेकर जाने वाली है। छत्तीसगढ़ में राम की सरकार है। राम के लोगों की सरकार है। रामानुरागियों की सरकार है। हमारी सरकार बारी-बारी अयोध्या दर्शन कराएगी। आइए हम सब मिलकर 22 जनवरी को छत्तीसगढ़ में रामलला विराजमान के अवसर पर अपने-अपने घरों में दिये जलाएं। संसार में प्रकाश फैलाएं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत को विश्व प्रकाश का प्रेरक बनाते हुए विश्वगुरु बनाएं। जय भांचा राम। जय राजा राम। जय सिया राम।

 
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