भारत ने वैश्विक उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं को दाम बढ़ाने के लिए गुटबंदी के प्रति आगाह किया |

भारत ने वैश्विक उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं को दाम बढ़ाने के लिए गुटबंदी के प्रति आगाह किया

भारत ने वैश्विक उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं को दाम बढ़ाने के लिए गुटबंदी के प्रति आगाह किया

:   December 6, 2023 / 09:24 PM IST

नयी दिल्ली, छह दिसंबर (भाषा) भारत ने वैश्विक उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं को गुटबाजी कर कीमत वृद्धि के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि हाल के दिनों में फसल के पोषक तत्वों के दाम में भारी वृद्धि अस्वीकार्य है और इस पर अंकुश नहीं लगता है तो उपभोक्ता देश विकल्प के बारे में विचार करेगा।

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के वार्षिक सेमिनार को संबोधित करते हुए रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत ने आत्मनिर्भर बनने के अपने प्रयासों के तहत पहले से ही नैनो तरल यूरिया और नैनो तरल डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) जैसे वैकल्पिक उर्वरकों का आविष्कार किया है।

मंत्री ने बताया कि वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान वैश्विक बाजार में संकट का फायदा उठाया और फॉस्फेटिक और फॉस्फोरिक एसिड की कीमतें बढ़ा दीं।

उन्होंने कहा कि डीएपी की वैश्विक कीमतें केवल 15 दिन में 450 डॉलर से बढ़कर 590 डॉलर प्रति टन हो गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह अच्छा नहीं है। यह समय नहीं है कि हम एक साथ काम न करें।’’ उन्होंने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से मूल्यवृद्धि के लिए गुटबंदी से बचने को कहा। मंत्री ने कहा कि यह सभी के हित में नहीं है।

घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों का आयात करता है।

मांडविया ने वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) और प्रतिनिधियों से कहा कि भारत को अपनी और दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।

उन्होंने कहा कि कीमतें बढ़ाकर अल्पकालिक आपूर्ति संकट का फायदा उठाने की कोशिश में वैश्विक कंपनियां दीर्घकालिक कारोबार खो देंगी।

मंत्री ने कहा कि वह पूरी दुनिया की मांग-आपूर्ति की स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं।

मांडविया ने कहा कि वैश्विक मूल्यवृद्धि के लिए गुटबंदी करना भारत को वैकल्पिक उर्वरकों की तलाश के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर वैश्विक कंपनियां मूल्यवृद्धि के लिए गुटबंदी करती हैं, तो हमने भी समाधान ढूंढ लिया है। हम नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की ओर क्यों गए हैं। हमारे पास दो लाख किसान समृद्धि केंद्र हैं, जिनके माध्यम से हम किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के बारे में शिक्षित कर रहे हैं।’’

मंत्री ने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से कहा कि ऐसा मत सोचिए कि भारत के पास ऊंची दरों पर उर्वरक खरीदने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।

मांडविया ने वैश्विक कंपनियों को याद दिलाया कि भारतीय कंपनियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं और टीकों की कीमतें नहीं बढ़ाईं और 150 से अधिक देशों को आपूर्ति की।

उन्होंने वैश्विक कंपनियों से कहा, ‘‘मुद्दा गुटबंदी है। मुद्दा यह है कि स्थिति-आधारित मूल्य निर्धारण नहीं होना चाहिए। आपको इतना बड़ा बाजार कहां मिलेगा।’’

मांडविया ने उन्हें सुझाव दिया कि भारत में दीर्घकालिक व्यापार करें और कीमतों में कोई उतार-चढ़ाव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने आगाह किया कि यदि वैश्विक मूल्य गुटबंदी जारी रही, तो भारत वैकल्पिक उर्वरकों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देगा। ”यह किसी के हित में नहीं है।”

मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नैनो-तरल यूरिया की मांग बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम दीर्घकालिक मित्रता चाहते हैं। हम दीर्घकालिक सहयोग चाहते हैं।’’

एफएआई के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 2.85 करोड़ टन यूरिया का उत्पादन किया और 60-70 लाख टन का आयात किया। डीएपी में, घरेलू उत्पादन लगभग 40 लाख टन है जबकि आयात लगभग 60 लाख टन है।

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के अध्यक्ष एन सुरेश कृष्णन ने कहा कि डीएपी की वैश्विक कीमतें इस साल जुलाई में 440 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 595 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। अप्रैल, 2022 में डीएपी की कीमत 924 डॉलर प्रति टन थी।

फॉस्फोरिक एसिड की कीमतें अप्रैल, 2022 के 1,530 डॉलर प्रति टन से घटकर जुलाई, 2023 में 970 डॉलर प्रति टन रह गईं और अक्टूबर, 2023 में फिर से बढ़कर 985 डॉलर प्रति टन हो गईं।

अमोनिया की कीमतों ने भी इसी तरह का रुझान दिखाया है जो अप्रैल, 2022 में 1,530 डॉलर प्रति टन थीं, जुलाई, 2023 में घटकर 285 डॉलर रह गईं और अक्टूबर, 2023 में फिर से बढ़कर 575 डॉलर हो गईं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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