प्रतिबंधित यूएनएलएफ (पी) संघर्षविराम समझौते के बावजूद हथियार सौंपने में देरी कर रहा: अधिकारी |

प्रतिबंधित यूएनएलएफ (पी) संघर्षविराम समझौते के बावजूद हथियार सौंपने में देरी कर रहा: अधिकारी

प्रतिबंधित यूएनएलएफ (पी) संघर्षविराम समझौते के बावजूद हथियार सौंपने में देरी कर रहा: अधिकारी

:   Modified Date:  March 31, 2024 / 06:25 PM IST, Published Date : March 31, 2024/6:25 pm IST

(सुमीर कौल)

नयी दिल्ली/इंफाल, 31 मार्च (भाषा) प्रतिबंधित आतंकवादी समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (पी) चार महीने पहले केंद्र के साथ संघर्षविराम समझौते पर हस्ताक्षर करने के बावजूद हथियार सौंपने या अपने सदस्यों की सूची प्रदान करने में विफल रहा है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि यूएनएलएफ (पी) के कैडर अभी भी मणिपुर में हिंसा में संलिप्त हैं।

राज्य के अधिकारियों के साथ तीन दौर की बातचीत के बाद भी यूएनएलएफ (पी) ने पिछले साल 29 नवंबर को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से सहमत शर्तों का पालन नहीं किया है।

यूएनएलएफ (पी) संघर्षविराम पर सहमत होने वाला पहला मेइती आतंकवादी संगठन है। संघर्षविराम के बावजूद यूएनएलएफ (पी) के सदस्यों की वजह से मणिपुर में जारी हिंसा पर सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई है।

यूएनएलएफ (पी) हिंसा छोड़ने का वादा करते हुए सरकार के साथ संघर्षविराम समझौते में शामिल होने वाला इंफाल घाटी का पहला मेइती सशस्त्र समूह बना। इस संगठन की बागडोर के पाम्बेई के पास है।

सुरक्षा एजेंसियों ने जातीय संघर्षों में संभावित वृद्धि की आशंका के मद्देनजर यूएनएलएफ (पी) की कुकी-आबादी वाले इलाकों के पास शिविर स्थापित करने की मांग पर एतराज व्यक्त किया क्योंकि हिंसा में राज्य में पहले ही 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

अधिकारियों ने कहा कि थौबल जिले के इंगोरोक और काकचिंग जिले के काकचिंग खुनोउ में अस्थायी शिविर व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।

हालिया खबरों से संकेत मिलता है कि यूएनएलएफ (पी) के सदस्य आदिवासी आबादी को निशाना बनाने के लिए कुकी बस्तियों के पास शिविर स्थापित कर रहे हैं, जिससे तनाव बढ़ रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि हिंसा रोकने के लिए संघर्षविराम समझौते के बावजूद, हालिया घटनाओं से पता चलता है कि यूएनएलएफ (पी) के सदस्य बेखौफ होकर हिंसक गतिविधियां कर रहे हैं और सुरक्षा बलों के हथियार भी लूट रहे हैं।

खबरों के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकवादी समूह के कैडर कथित तौर पर 13 फरवरी को मणिपुर के चिंगारेल में 5वीं इंडिया रिजर्व बटालियन (आईआरबी) से हथियार और गोला-बारूद लूटने तथा पिछले महीने चुराचांदपुर की ओर जाने वाले वाहनों पर मोइरंगपुरेल में गोलीबारी करने में शामिल थे।

कुकी समुदाय के मफौ गांव में गोलीबारी की घटना कथित तौर पर अरामबाई तेंगगोल और यूएनएलएफ (पी) कैडर से जुड़े व्यक्तियों द्वारा किए जाने के बाद हिंसा और भड़क गई।

यूएनएलएफ (पी) के ये कैडर कथित तौर पर कुकी समुदाय को निशाना बनाने का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर सूचना साझा कर रहे थे।

संघर्षविराम समझौते की परिकल्पना यूएनएलएफ (पी) और सुरक्षा बलों के बीच दशकों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए की गई थी।

यूएनएलएफ (पी) का गठन 1964 में हुआ था। केंद्र ने हिंसा रोकने और विकास को बढ़ावा देने के लिए 2014 से पूर्वोत्तर के विभिन्न सशस्त्र समूहों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

भाषा आशीष धीरज

धीरज

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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