चक्रवाती तूफान ‘रेमल पश्चिम बंगाल के तट की तरफ तेजी से बढ़ रहा, एक लाख से अधिक लोग निकाले गए |

चक्रवाती तूफान ‘रेमल पश्चिम बंगाल के तट की तरफ तेजी से बढ़ रहा, एक लाख से अधिक लोग निकाले गए

चक्रवाती तूफान ‘रेमल पश्चिम बंगाल के तट की तरफ तेजी से बढ़ रहा, एक लाख से अधिक लोग निकाले गए

:   Modified Date:  May 26, 2024 / 10:11 PM IST, Published Date : May 26, 2024/10:11 pm IST

कोलकाता/ नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) चक्रवाती तूफान ‘रेमल’ के और तीव्र होने तथा इसके रविवार आधी रात तक बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के तटों पर दस्तक देने की संभावना के मद्देनजर बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों से एक लाख से अधिक लोगों को निकालकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया है।

बंगाल के तटीय इलाकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, क्योंकि तेज गति वाली हवाओं के साथ बढ़ रहे चक्रवात के कारण राज्य के कई हिस्सों में पहले से ही बारिश हो चुकी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के बुलेटिन के अनुसार, ‘रेमल’ शाम छह बजे सागर द्वीप से 160 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व में केंद्रित था।

अधिकारियों ने कहा कि चक्रवाती तूफान की गति 100-110 किमी प्रति घंटा है, जो 120 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके रविवार आधी रात तक पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप समूह और बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के पास खेपुपारा के बीच तट पर दस्तक देने की संभावना है।

अपराह्न तीन बजे तक पश्चिम बंगाल सरकार ने तटीय और संवेदनशील क्षेत्रों से लगभग 1.10 लाख लोगों को निकाल लिया था और उन्हें आश्रय गृहों, स्कूलों और कॉलेजों जैसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को चक्रवाती तूफान ‘रेमल’ से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।

राज्य मंत्री अखिल गिरी ने कहा, ‘‘पूर्व में चक्रवात अम्फान और चक्रवात यास से निपटने में हमारे अनुभव का अच्छा उपयोग किया जाएगा।’’

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और चक्रवात से निपटने को लेकर समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्य और केंद्रीय विशेषज्ञों के साथ लगातार संपर्क में हैं।

बोस ने बंगाल के तटीय क्षेत्रों में निवासियों के लिए सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया और उनसे चक्रवात के मद्देनजर मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन करने का आग्रह किया।

चक्रवात के कारण पहले ही दीघा, काकद्वीप और जयनगर जैसे इलाकों में हल्की बारिश के साथ हवाएं चल रही हैं, जिसके सोमवार को और तेज होने की संभावना है।

कोलकाता में मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख सोमनाथ दत्ता ने कहा कि दक्षिण बंगाल के कई जिलों में रविवार शाम से 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जिससे कोलकाता, हावड़ा, हुगली और पूर्व मेदिनीपुर प्रभावित होंगे।

दत्ता ने यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान चेतावनी दी कि रविवार शाम से सोमवार सुबह तक पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में हवा की गति 100-120 किमी प्रति घंटा से लेकर 135 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

दत्ता ने कहा, ‘‘रेमल नुकसान पहुंचाएगा, लेकिन इसके 2020 में आए चक्रवात ‘अम्फान’ के मुकाबले कम विनाशकारी रहने की संभावना है।’’

मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण और उत्तर 24 परगना जिलों में बाढ़ और कमजोर इमारतों, बिजली और संचार की लाइन, कच्ची सड़कों, फसलों और बगीचों को बड़ी क्षति पहुंचने की चेतावनी दी है।

प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को घर के अंदर रहने और कमजोर इमारतों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 14 टीम को कोलकाता, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा और हुगली सहित दक्षिण बंगाल के जिलों में तैनात किया गया है।

चक्रवात को देखते हुए पूर्वी और दक्षिण पूर्वी रेलवे ने एहतियात के तौर पर दक्षिण और उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर जिले के तटीय जिलों में कई ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी हैं।

कोलकाता हवाई अड्डे के अधिकारियों ने चक्रवात ‘रेमल’ के संभावित प्रभाव के कारण रविवार दोपहर से 21 घंटे के लिए उड़ान संचालन निलंबित करने का फैसला किया है।

भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) के एक प्रवक्ता ने कहा कि उड़ान निलंबन अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों क्षेत्रों में आने-जाने वाली कुल 394 उड़ानों का हवाई अड्डे से संचालन नहीं होगा।

भारतीय तट रक्षक बल (आईसीजी) के कोलकाता मुख्यालय वाले उत्तर पूर्व क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए हैं कि समुद्र में जान-माल का कोई नुकसान न हो।

कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह में भी चक्रवात के पूर्वानुमान के कारण रविवार शाम से 12 घंटे के लिए माल एवं कंटेनर प्रबंधन परिचालन निलंबित रहेगा।

चक्रवात रविवार सुबह साढ़े 11 बजे तक उत्तरी बंगाल की खाड़ी में सागर द्वीप से 240 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में स्थित था और इस दौरान 90-100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और उनका वेग 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक था।

यह मॉनसून से पहले के मौसम में बंगाल की खाड़ी में आने वाला पहला चक्रवात है।

मौसम कार्यालय ने पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटीय जिलों में 26-27 मई को अत्यधिक भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की है। असम और मेघालय में भी अत्यधिक भारी बारिश होने का अनुमान है। मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में 27-28 मई को भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

चक्रवात के पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय इलाकों में पहुंचने पर 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठने के कारण निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका है।

मौसम कार्यालय ने मछुआरों को सोमवार सुबह तक उत्तरी बंगाल की खाड़ी में समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, कोलकाता, हावड़ा और हुगली जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका के कारण इन क्षेत्रों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। नदिया और मुर्शिदाबाद जिलों में भी 27-28 मई को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

पूर्व रेलवे ने रविवार रात 11 बजे से सोमवार सुबह छह बजे तक सियालदह दक्षिण और बारासात-हसनाबाद खंड में ट्रेन सेवाओं को एहतियातन निलंबित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप कई लोकल ट्रेन रद्द कर दी गईं।

दक्षिण पूर्व रेलवे ने भी रविवार को कांडारी एक्सप्रेस और रविवार एवं सोमवार को दीघा से आने-जाने वाली कुछ रेल रद्द कर दी हैं।

उत्तरी ओडिशा में बालासोर, भद्रक और केंद्रपाड़ा जिलों में 26-27 मई और मयूरभंज में 27 मई को भारी बारिश होने की संभावना है।

उत्तर बंगाल के जिलों कूच बिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में 28-29 मई को अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है। इसके अलावा दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में भी भारी बारिश की संभावना है।

आईएमडी ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण और उत्तर 24 परगना जिलों में बाढ़ आने और कमजोर संरचनाओं, बिजली एवं संचार लाइन, कच्ची सड़कों, फसलों तथा बगीचों को भारी नुकसान होने की चेतावनी दी है। प्रभावित इलाकों में लोगों को घर के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है।

भारतीय तट रक्षक (आईसीजी) ने समुद्र में जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए एहतियातन कदम उठाए हैं तथा हल्दिया और पारादीप में मछली पकड़ने वाले पोतों और वाणिज्यिक पोतों को सतर्क कर दिया गया है।

आईसीजी ने हल्दिया, फ्रेजरगंज, पारादीप और गोपालपुर में खोज और बचाव अभियानों के लिए आपदा राहत दलों के अलावा पोत और विमान भी तैयार रखे हैं।

राज्य एजेंसी के प्रयासों में समन्वय के लिए लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘कोलकाता पुलिस की 10 टीम शहर के 10 पुलिस प्रभागों में तैनात की गई हैं। ’’

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के दल भी उन जिलों में जा रहे हैं, जिनके चक्रवाती तूफान से प्रभावित होने की संभावना है।

एनडीआरएफ ने कोलकाता, उत्तर 24-परगना, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, दक्षिण 24-परगना, हावड़ा और हुगली सहित कई जिलों में अपने दल एवं उपकरण तैनात किए हैं।

चक्रवात से सुंदरबन मैंग्रोव वन के भी प्रभावित होने की आशंका है। सुंदरबन दुनिया के सबसे बड़े वनों में से एक है और अपने विविध जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है, जिनमें पक्षियों की 260 प्रजातियां, बंगाल टाइगर और एस्टुरीन (खारे पानी के) मगरमच्छ एवं भारतीय अजगर जैसी अन्य संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश की सीमाओं पर 9,630 वर्ग किलोमीटर में फैला सुंदरवन जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र स्तर में वृद्धि, लवणता और भूमि कटाव की वजह से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में से एक है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की सतह के गर्म तापमान के कारण चक्रवाती तूफान तेजी से तीव्र हो रहे हैं और लंबे समय तक अपना प्रभाव बरकरार रख रहे हैं।

आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डी एस पाई के अनुसार, समुद्री सतह के गर्म होने का मतलब अधिक नमी है, जो चक्रवातों के तीव्र होने के लिए अनुकूल है।

भारतीय नौसेना ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) तथा चिकित्सा आपूर्ति से लैस दो पोतों को तत्काल तैनाती के लिए तैयार रखा है।

भाषा संतोष संतोष दिलीप

दिलीप

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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