अनंतनाग-राजौरी में एकमात्र कश्मीरी पंडित उम्मीदवार अपने समुदाय के लिए 'न्याय' की मांग कर रहे |

अनंतनाग-राजौरी में एकमात्र कश्मीरी पंडित उम्मीदवार अपने समुदाय के लिए ‘न्याय’ की मांग कर रहे

अनंतनाग-राजौरी में एकमात्र कश्मीरी पंडित उम्मीदवार अपने समुदाय के लिए 'न्याय' की मांग कर रहे

:   Modified Date:  May 19, 2024 / 07:24 PM IST, Published Date : May 19, 2024/7:24 pm IST

(अनिल भट्ट)

जम्मू, 19 मई (भाषा) अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ रहे एकमात्र विस्थापित कश्मीरी पंडित उम्मीदवार दिलीप कुमार पंडिता ने अपना अभियान तेज कर दिया है और वह ‘नागरिक समाज की मदद से गंभीर अंतर-समुदाय संवाद के माध्यम से सभी कश्मीरियों को फिर से एकजुट करने’ का वादा कर रहे हैं।

पंडिता 25 मई को होने वाले चुनाव में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मियां अल्ताफ अहमद जैसी प्रमुख हस्तियों को चुनौती देने वाले 20 उम्मीदवारों में से एक हैं।

पंडिता (56) दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग जिले के छोटे से गांव रामहल के निवासी हैं। वह कई दशकों से अपने परिवार के साथ जगती प्रवासी बस्ती में एक सरकारी आवास में रह रहे हैं।

भीषण गर्मी में वह समुदाय के 35,000 से अधिक मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए जम्मू में, विशेष रूप से पांच प्रवासी शिविरों में घर-घर जाकर बातचीत और नुक्कड़ सभाओं के साथ जोरदार प्रचार कर रहे हैं।

पंडिता ने मुथी शिविर में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”हम न्याय नहीं मिलने के कारण 35 वर्षों से अपने घरों से विस्थापित हैं। मैं कश्मीरी पंडितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने और घाटी में उनकी सुरक्षित वापसी के लिए स्थितियां बनाने के वास्ते चुनाव लड़ रहा हूं।”

ट्यूबलाइट चुनाव चिह्न पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे पंडिता का घोषणापत्र नागरिक समाज संवाद के माध्यम से सभी कश्मीरियों, पंडितों और मुसलमानों दोनों को फिर से एकजुट करने पर जोर देता है।

उन्होंने कहा, ‘अगर मैं निर्वाचित हुआ तो मेरा उद्देश्य बेरोजगारी से निपटना और भारत सरकार पर शांति बनाए रखने के लिए दबाव डालना तथा जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए विशेष रोजगार पैकेज सुनिश्चित करने का है।’

पंडिता ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने, प्रधानमंत्री पैकेज कर्मचारियों के लिए लाभ में सुधार करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के वास्ते पर्यावरण अनुकूल योजनाओं पर जोर देने का भी वादा किया।

वर्तमान में जम्मू में रह रहे उनके पैतृक रामहल गांव के लोगों ने एक ‘यज्ञ’ के माध्यम से पंडिता के प्रति अपना समर्थन दिखाया है और समुदाय से उन्हें वोट देने का आग्रह किया है।

ग्रामीण सुनील कुमार ने कहा, ‘हमें उनका समर्थन करना चाहिए ताकि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम कर सकें। वह न्याय के लिए लड़ रहे हैं और हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए।’

पंडिता ने कहा, ‘मेरे गांव के लोग मेरी सफलता के लिए ‘यज्ञ’ कर रहे हैं। कश्मीरी पंडितों ने पिछले 25 वर्षों में गंभीर कठिनाइयों का सामना किया है। मैं उनका दर्द समझता हूं और उनसे मेरे पक्ष में वोट डालने की अपील करता हूं, ताकि हम एक साथ जीत हासिल कर सकें।’

चुनावी हलफनामे के अनुसार, पंडिता की आय एक लाख रुपये और उनकी कुल संपत्ति 17.5 लाख रुपये की है, जबकि देनदारी 14.7 लाख रुपये है। उन पर जम्मू में आपराधिक धमकी से संबंधित आरोप भी हैं।

अनंतनाग-राजौरी के लिए मतदान की तारीख सात मई से बदलकर 25 मई कर दी गई। इस निर्वाचन क्षेत्र में, 9,30,379 पुरुषों और 8,99,888 महिलाओं सहित 18,30,294 पात्र मतदाता 2,338 मतदान केंद्रों पर उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

साल 2022 में परिसीमन आयोग द्वारा पुनर्निर्मित अनंतनाग-राजौरी संसदीय सीट के अंतर्गत अब दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, शोपियां और कुलगाम जिलों के 18 विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ जम्मू में राजौरी और पुंछ जिलों के कुछ हिस्से शामिल हैं।

भाषा नेत्रपाल संतोष

संतोष

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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