Indian mosques : इन मस्जिदों के नीचे है शिवलिंग और देवी-देवताओं की दुर्लभ मूर्तिया!, क्या है दावों में सच्चाई, पढ़ें पूरी खबर

Indian Mosques : भारत में मंदिर-मस्जिद से जुड़ा विवाद नया नहीं है। सबसे ज्यादा चर्चित मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद थी, जो 2019 में थम गया।

  •  
  • Publish Date - May 19, 2022 / 03:31 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:34 PM IST

Indian mosques: वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद अभी थमा नहीं है। दूसरी ओर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्म भूमि परिसर स्थित मस्जिद के विवाद की याचिका मंजूर हो गई है। मामले की सुनवाई मथुरा जिला कोर्ट के सिविल कोर्ट में होगी। जिला कोर्ट ने सर्वे की अर्जी को भी मंजूर कर लिया है। अब भोपाल के जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर भी याचिका दाखिल करने की तैयारी है। उधर, ताजमहल के भी शिव मंदिर तेजो महालया होने के दावे को लेकर याचिका दायर की गई है।  हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में कुतुब मीनार के पास हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए इसका नाम बदलकर विष्णु स्तंभ किए जाने की मांग की है।>>*IBC24 News Channel के WhatsApp  ग्रुप से जुड़ने के लिए Click करें*<<

बड़ा सवाल ये है कि भारत में मंदिर-मस्जिद से जुड़ा विवाद नया नहीं है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चित मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद थी, जो 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद थम गया। देश में  मंदिर-मस्जिद से जुड़े कई विवाद है। इस स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए क्या है इन मस्जिदों के विवाद की वजह।

यह भी पढ़ें : Gyanvapi Survey: अजय कुमार मिश्रा ने कोर्ट को सौंपी दो पन्नों की सर्वे रिपोर्ट, डीएम और पुलिस कमिश्नर के सहयोग न करने की कही बात 

ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी)

बनारस में काशी-विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर सैकड़ों वर्षों से विवाद चल रहा है। इतिहास के जानकारों का मानना है कि साल 1699 में मुगल शासक औरंगजेब ने मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को तुड़वाकर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाया था। इस मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था। यहां से मस्जिद को हटाए को लेकर पहली याचिका साल 1991 में दायर की गई थी। फिलहाल मामले में वाराणसी कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद, जो अब थम चुका है (अयोध्या)

Indian mosques:  सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ढाई साल पहले अयोध्या में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर का विवाद खत्म हो चुका है। 500 वर्षों से जारी इस विवाद में 9 नवंबर 2019 को फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को राम मंदिर के निर्माण के लिए हिंदू पक्ष को सौंपने का फैसला किया था। 1528 में यहां बनी बाबरी मस्जिद को 1992 में कारसेवकों ने ढहा दिया था।

ताजमहल (आगरा)

मोहब्बत की निशानी और मुमताज के इस प्रसिद्ध मकबरे को लेकर भी हाल के वर्षों में विवाद खड़ा हो गया है। आगरा के ताजमहल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1632 में शुरू कराया था, जो 1653 में खत्म हुआ था, लेकिन कई हिंदू संगठनों का दावा है कि शाहजहां ने ‘तेजो महालया’ नामक भगवान शिव के मंदिर को तुड़वाकर वहां ताजमहल बना दिया। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में ताजमहल के बंद 22 कमरों को खुलवाकर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से जांच कराने की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की गई है। ये याचिका बीजेपी के अयोध्या के मीडिया इन-चार्ज रजनीश सिंह ने दाखिल की है। उनका कहना है कि ताजमहल के बंद 22 कमरों की जांच से ये साफ हो जाएगा कि वह शिव मंदिर है या मकबरा।

यह भी पढ़ें : Jama Masjid bhopal: ज्ञानवापी के बाद अब जामा मस्जिद का होगा सर्वे? संस्कृति बचाओ मंच दायर करेगा याचिका

 

शाही ईदगाह मस्जिद (मथुरा)

इस स्थल को हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है। शाही ईदगाह मस्जिद मथुरा शहर में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर से सटी हुई है। माना जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्म स्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट करके उसी स्थान पर साल 1669-70 में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण करवाया था। 1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13.37 एकड़ की विवादित भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को आवंटित कर दी थी। 1951 में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ये भूमि अधिग्रहीत कर ली थी। ये ट्रस्ट 1958 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और 1977 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से रजिस्टर्ड हुआ। 1968 में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह कमिटी के बीच हुए समझौते में इस 13.37 एकड़ जमीन का स्वामित्व ट्रस्ट को मिला और ईदगाह मस्जिद का मैनेजमेंट ईदगाह कमेटी को दे दिया गया। अब इस मामले में दाखिल याचिका में ईदगाह मस्जिद का सर्वे और वीडियोग्राफी कराए जाने की मांग की गई है।

कमल मौला मस्जिद (धार)

Indian mosques update : मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित कमल मौला मस्जिद अक्सर विवादों में रही है। हिंदू इसे माता सरस्वती का प्राचीन मंदिर भोजशाला मानते हैं, वहीं मुस्लिम इसे अपनी इबादतगाह यानी मस्जिद बताते हैं। कहा जाता है कि भोजशाला मंदिर का निर्माण हिंदू राजा भोज ने 1034 में कराया था। पहले 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने हमला किया। फिर मुस्लिम सम्राट दिलावर खान ने यहां स्थित विजय मंदिर को नष्ट करके सरस्वती मंदिर भोजशाला के एक हिस्से को दरगाह में बदलने की कोशिश की। इसके बाद महमूदशाह ने भोजशाला पर हमला करके सरस्वती मंदिर के बाहरी हिस्से पर कब्जा करते हुए वहां कमल मौलाना मकबरा बना दिया। यहां साल 2006, 2013 और साल 2016 को शुक्रवार के दिन वसंत पंचमी पड़ने पर सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं हो चुकी हैं।

जामा मस्जिद (भोपाल)

अब बीते दिनों भोपाल के जामा मस्जिद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहां के संस्कृति बचाओ मंच ने इसे लेकर पुरातत्व विभाग से सर्वे कराने का अनुरोध किया है। मंच ने CM शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से भी मांग की है।संस्कृति बचाओ मंच का दावा है कि जामा मस्जिद के नीचे शिव मंदिर है। मंच ने मस्जिद का हर एंगल से हो सर्वे कराने की मांग की है। मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि मुस्लिम शासकों ने मंदिर तोड़कर जामा मस्जिद बनवाया है। मंच सर्वे कराने के लिए कोर्ट में याचिका दायर करेगा।

यह भी पढ़ें : Urfi Javed New video: फटा टी-शर्ट पहनकर एयरपोर्ट पर पहुंची उर्फी जावेद, ट्रोलर्स को उंगुली से किए गंदे इशारे 

जामा मस्जिद (अहमदाबाद)

गुजरात के अहमदाबाद स्थित जामा मस्जिद को लेकर भी विवाद रहा है। इस मस्जिद को हिंदू मंदिर भद्रकाली को तोड़कर बनाया गया है। अहमदाबाद का पुराना नाम भद्रा था। भद्रकाली मंदिर का निर्माण मालवा (राजस्थान) पर 9वीं से 14वीं सदी तक राज करने वाले राजपूत परमार राजाओं ने कराया था। यहां पहले मंदिर होने का दावा करने वालों का तर्क है कि इस मस्जिद के ज्यादातर खंभे हिंदू मंदिरों के स्टाइल में बने हैं। इसके कई खंभों पर कमल के फूल, हाथी, कुंडलित नाग, नर्तकियों, घंटियों आदि की नक्काशी की गई है, जो अक्सर हिंदू मंदिरों में नजर आते हैं। साथ ही इसके हाल में कई खंभे बने हैं, जोकि आमतौर पर मंदिरों की पहचान हैं।

बीजा मंडल मस्जिद (विदिशा)

Indian mosques: मध्य प्रदेश के विदिशा में बीजा मंडल मस्जिद को लेकर भी विवाद रहा है। माना जाता है कि बीजा मंडल मस्जिद का निर्माण परमार राजाओं द्वारा निर्मित चर्चिका देवी के हिंदू मंदिर को नष्ट करके किया गया था। इस स्थल पर मौजूद एक खंभे पर लगे शिलालेख में बताया गया है कि मूल मंदिर देवी विजया को समर्पित था, उन्हें चर्चिका देवी भी कहा जाता है, जो विजय की देवी मानी जाती हैं। कहा जाता है कि 1658-1707 के दौरान औरंगजेब ने इस मंदिर पर हमला करके इसे लूटा और नष्ट कर दिया। उसने मंदिर के उत्तरी ओर मौजूद सभी मूर्तियों को दफनाकर इसे मस्जिद में बदल दिया।

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद (दिल्ली)

दिल्ली की पहली शुक्रवार मस्जिद देश की प्रमुख धरोहरों में से एक कुतुब मीनार परिसर के अंदर है। इस मस्जिद का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने कराया था। इतिहासकारों का मानना है कि इस मस्जिद का निर्माण 27 हिंदू और जैन मंदिरों को नष्ट करके हुआ था। कुतुब मीनार के पास स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद को बनाने के लिए 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तोड़ गया था। इस मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस साल फरवरी में साकेत जिला अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।

अदीना मस्जिद (मालदा )

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पांडुआ में स्थित अदीना मस्जिद का निर्माण 1358-90 में सिकंदर शाह ने कराया था। माना जाता है कि उसने भगवान शिव के प्राचीन आदिनाथ मंदिर को नष्ट करके उसकी जगह अदीना मस्जिद बनवाई थी। वहां मंदिर होने का दावा करने वालों का तर्क है कि अदीना मस्जिद के कई हिस्सों में हिंदू मंदिरों के स्टाइल की डिजाइन नजर आती हैं।

read more : श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवादः मथुरा कोर्ट ने मंजूर की याचिका, टाइटल सूट की भी मिली परमिशन 

अटाला मस्जिद (जौनपुर)

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला स्थित अटाला मस्जिद भी विवादों से घिरी रही है। इस मस्जिद का निर्माण 1408 में इब्राहिम शरीकी ने कराया था। कहा जाता है कि इब्राहिम ने जौनपुर में स्थित अटाला देवी मंदिर को तोड़कर वहां अटाला मस्जिद बनाई थी। अटाला देवी मंदिर का निर्माण गढ़ावला के राजा विजयचंद्र ने कराया था।

जामी मस्जिद (पाटन, गुजरात)

Indian mosques:  गुजरात के पाटन जिला स्थित जामी मस्जिद को लेकर अक्सर विवाद उठता रहा है। कहा जाता है कि इस मस्जिद को यहां बनी रुद्र महालय मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। इतिहासकारों के मुताबिक रुद्र महालय मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में गुजरात के शासक सिद्धराज जयसिंह ने कराया था। 1410-1444 के बीच अलाउद्दीन खिलजी ने इस मंदिर के परिसर को नष्ट कर दिया था। इसके बाद अहमद शाह प्रथम ने मंदिर के कुछ हिस्से को जामी मस्जिद में बदल दिया था।