मुखर्जी आयोग ने अस्थियों की डीएनए जांच की मंजूरी को नजरअंदाज किया:नेताजी की परिजन

मुखर्जी आयोग ने अस्थियों की डीएनए जांच की मंजूरी को नजरअंदाज किया:नेताजी की परिजन

: , January 23, 2022 / 02:09 PM IST

(जयंत रॉय चौधरी)

कोलकाता, 23 जनवरी (भाषा) तोक्यो स्थित रेनकोजी मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा जापानी भाषा में 2005 में भारत सरकार को लिखे गए एक पत्र के हालिया अनुवाद से पता चला है कि न्यायमूर्ति एम के मुखर्जी आयोग को उन अस्थियों की मदद से डीएनए जांच की अनुमति दी गई थी, जिसके कलश के संरक्षण की जिम्मेदारी पुजारी के पास थी। ऐसा माना जाता है कि इस कलश में बोस की अस्थियां हैं।

कोई कारण बताए बिना पत्र के इस हिस्से का अनुवाद नहीं किया गया था और बोस के लापता होने पर न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट के साथ साक्ष्य के तौर पर एक अंग्रेजी संस्करण संलग्न किया गया था कि जिसमें लिखा था‘‘मंदिर अधिकारियों के मौन रहने के कारण… आयोग (डीएनए जांच के मुद्दे पर) आगे नहीं बढ़ सका।’’ आयोग ने बाद में इसका उपयोग यह निष्कर्ष निकालने के लिए किया कि ये अस्थियां नेताजी की नहीं थीं, जिससे इन अटकलों को बल मिलता है कि वह हादसे में बच गए और एक संन्यासी बन गए या रूस की जेल में उन्हें कैदी के रूप में रखा गया।

महान स्वतंत्रता सेनानी के भाई शरत बोस की पोती माधुरी बोस ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट में विसंगतियां पाए जाने और न्यायमूर्ति मुखर्जी की जांच रिपोर्ट के आधिकारिक अंग्रेजी संस्करण से जापानी भाषा में लिखे पत्र के कई पैराग्राफ नहीं मिलने के बाद हमने हाल में इनका फिर से नया अनुवाद शुरू किया।’’

जापानी भाषा के एक विशेषज्ञ के नए अनुवाद से पता चलता है कि पत्र के छोड़े गए अंश में 427 वर्ष पुराने बौद्ध मंदिर ‘रेनकोजी मंदिर’ के मुख्य पुजारी निचिको मोचिजुकी ने लिखा था, ‘‘मैं जांच में अपना सहयोग देने के लिए सहमत हूं। पिछले साल (2004) में (जापान के लिए भारतीय राजदूत) (एमएल) त्रिपाठी के साथ बैठक में इसी पर सहमति बनी थी।’’

‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा इस अनुवाद को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सका है।

राष्ट्रमंडल सचिवालय और संयुक्त राष्ट्र में काम कर चुकीं माधुरी बोस ने बोस बंधुओं पर किताबें भी लिखी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें समझ नहीं आता कि इस अनुमति को पहले सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया या डीएनए जांच क्यों नहीं की गई।’’

मुखर्जी आयोग ने 2006 में संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला था कि आजाद हिंद फौज में बोस के करीबी विश्वासपात्रों सहित चश्मदीदों के बयान के उलट बोस की मृत्यु ‘‘विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी’’ और यह भी कहा गया था कि ‘‘जापान के मंदिर में मिली अस्थियां’’ नेताजी की नहीं हैं। आजाद हिंद फौज के कर्नल हबीब-उर-रहमान सहित चश्मदीदों ने कहा था कि बोस की मृत्यु अगस्त 1945 में ताइपे में एक विमान दुर्घटना में हुई थी।

माधुरी बोस ने कहा, ‘‘हमें मुखर्जी आयोग पर बहुत विश्वास था और हमें आशा की एक किरण नजर आई थी कि नेताजी के लापता होने के बारे में सच्चाई अंतिम रिपोर्ट के साथ सामने आएगी… हालांकि रिपोर्ट में कई स्पष्ट विसंगतियों ने हमें इसे फिर से देखने के लिए मजबूर किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने पाया कि जापान का मंदिर डीएनए जांच चाहता था और हमने (भारत ने) कभी (जांच) नहीं की।’’

नेताजी की बेटी अनिता फाफ, एक प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी और नेताजी के बड़े भाई के बेटे द्वारका नाथ बोस एवं उनके एक अन्य भतीजे अर्धेंदु बोस सहित बोस परिवार के तीन सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अक्टूबर 2016 और दिसंबर 2019 में पत्र लिखकर उन्हें रेनकोजी में मिली अस्थियों की डीएनए जांच कराने का आदेश देने का अनुरोध किया था। हालांकि माधुरी बोस ने कहा कि परिवार को इस पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला।

भाषा सुरभि सिम्मी

सिम्मी

 

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