शिवराज का मास्टरस्ट्रोक… पंचायतों को फिर अधिकार, क्या मिशन 2023 के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित होगा सीएम का फैसला?

शिवराज का मास्टरस्ट्रोक... पंचायतों को फिर अधिकार : Shivraj's masterstroke... Panchayats have rights again

: , January 17, 2022 / 11:15 PM IST

भोपालः Panchayats have rights again मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर पंचों-सरपंचों को गांव की सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी है। पंचायतों के संचालन की प्रशासकीय समिति को अधिकार देने की ये घोषणा सीएम ने पंचों और सरपंचों के साथ संवाद में की। बीजेपी ने जहां इस फैसले का स्वागत किया तो कांग्रेस ने गुमराह करने वाला कदम बताया। अब सवाल ये है कि पंचायतों को अधिकार देकर सीएम शिवराज ने उनकी नाराजगी दूर करने कोशिश की है?

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Panchayats have rights again मध्यप्रदेश में ग्राम सरकार एक बार फिर पंचों और सरपंचों के हवाले होगा.. शिवराज सरकार ने 12 दिन बाद ही अपने फैसला को पलटते हुए प्रधानों को वित्तीय अधिकार लौटाने का फैसला किया। प्रशासकीय समिति और प्रधानों के साथ वर्चुअल मीटिंग में सीएम ने कहा कि जनता की ताकत से ही सारे काम होते हैं इसलिए प्रधानों को प्रशासकीय अधिकार लौटा रहा हूं। संवाद के दौरान सीएम ने ये भी कहा कि पंचायत चुनाव जब होंगे तब होंगे। तब तक आप गांव में समाज सुधार के आंदोलन चलाएं। कोरोना के खिलाफ जारी जंग में सहयोग की अपील भी की।

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पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के दावेदार सरकार से नाराज चल रहे थे। ऐसे में मुख्यमंत्री ने प्रधानों को दोबारा वित्तीय और प्रशासकीय अधिकार देकर साधने की कोशिश की है…हालांकि इस फैसले पर अब सियासत भी शुरू हो गई है बीजेपी संगठन सरकार के इस फैसले के साथ खड़ा है तो वहीं विपक्ष सवाल खड़े करते हुए सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगा रहा है।

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मार्च 2020 में ही 22 हजार 604 पंचायतों में सरपंच और पंच का कार्यकाल पूरा हो चुका है.. इसी तरह 841 जिला और 6774 जनपद पंचायत सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। नियमानुसार यहां चुनाव हो जाने चाहिए थे, पर किसी न किसी कारण से ये टलते रहे हैं। जाहिर है ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर पंचायत चुनाव का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हालांकि पंचायतों में कार्य प्रभावित न हों इसके लिए सरकार ने 4 जनवरी को आदेश जारी करते हुए वित्तीय अधिकार दिए थे। फिर एक दिन बाद ही इसपर रोक भी लगा दी। जिसका पूर्व सरपंच विरोध कर रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री ने 12 दिन बाद एक बार फिर अपना फैसला पलट दिया। अब सवाल ये है क्या मिशन 2023 की तैयारियों में जुटी बीजेपी के लिये ये मास्टर स्ट्रोक साबित होगा?.