International youth day : I'm young ...... | अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस : अभी तो मैं जवान हूं...

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस : अभी तो मैं जवान हूं...

  Blog By: Rupesh Sahu

मैं उमंगो की पहचान हूं, मैं खुशहाली का पैगाम हूं। मैं जोश से भरा हूं, मैं एक दृढ़ विश्वास हूं। मैं एक युवा हूं, और युवा देश की पहचान हूं । मैं शक्ति हूं उस संगठन की, जो हौसला-ए-हिन्द रखते है, मैं ताकत हूं उस देश की, जिसमें युवा निवास करते हैं। युवाओं की ऐसी सोच को, जो सही राहों पर होती है, मैं नमन करू बार-बार, जो शक्ति उनकी होती है ,भक्ति उनकी होती है, जो आदर सबका करते है, जो वायु को उलट दे हां वही युवा हूं मैं।

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युवा की मौजूदगी ताकत, उत्साह और ऊर्जा को दर्शाती है। जो हर जोखिम को लेने के लिए तैयार रहते हैं। सीमाओं से लेकर अतंरिक्ष तक, भूगर्भ से लेकर एवरेस्ट तक, आकाश चीरते फायटर प्लेन से लेकर समुद्र को रौंदते जलपोत तक की कमान संभालने वाले युवा हर विपरीत परिस्थितयों में खुद को साबित करते हैं। एक युवा जब उठ खड़ा होता है तो सारी समस्याएं घुटने टेक देती है।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 17 दिसम्बर 1999 को युवा विश्व सम्मलेन के दौरान की गयी सिफारिशों को मानते हुए 54/120 प्रस्ताव पारित किया गया तथा प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी। पहली बार सन 2000 में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन आरम्भ किया गया था। तबसे लेकर हर साल 12 अगस्त को विशेष आयोजन किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन एवं सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए युवा लोगों की अग्रणी भूमिका सुनिश्चित करना है। सामाजिक आर्थिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विकास और व्यक्तिगत पसंद की अहम भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस आय़ोजित करने का लक्ष्य भी स्पष्ट है। का मतलब है कि सरकार युवाओं के मुद्दों और उनकी बातों पर ध्यान आकर्षित करे.

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आज हर कोई भारत को उभरती हुई शक्ति के रूप में देख रहा है। दुनिया भर के देश भारत से उम्मीदें लगाए बैठे हैं। इसका कारण है कि भारत को दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। भारत में युवाओं की आबादी दुनिया के बाकी देशों में से सबसे ज्यादा है। यही वजह है कि भारत में आज लगभग हर इंडस्ट्री युवाओं को ध्यान में रखकर ही कार्य कर रही है। चाहे गारमेंट उद्योग हो, मोबाइल कंपनियां हों। फूड इंडस्ट्री हो, मनोरंजन उद्योग हो, स्किल डेवलपमेंट सेक्टर हो। हर जगह युवाओं को ही तवज्जो दी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में कई स्टार्टअप आईं जिनका केंद्र भी युवा शक्ति ही रहा। अब इस युवा देश के निर्णय साहसी और निर्णायक हैं।

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पूरे विश्व में भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। अपने देश में 35 वर्ष की आयु तक के 65 करोड़ युवा हैं। हमारे देश में अथाह श्रमशक्ति उपलब्ध है। आवश्यकता है आज हमारे देश की युवा शक्ति को उचित मार्ग दर्शन देकर उन्हें देश की उन्नति में भागीदार बनाने की, उनमे अच्छे संस्कार, उचित शिक्षा एवं प्रोद्यौगिक विशेषज्ञ बनाने की, उन्हें बुरी आदतों नशा, जुआ, हिंसा से बचाने की है। चरित्र निर्माण ही देश की, समाज की, उन्नति के लिए जरुरी है। दुश्चरित्र युवा न तो अपना भला कर सकता है, न समाज का और न ही अपने देश का। देश के निर्माण के लिए, देश की उन्नति के लिए, देश को विश्व के विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा करने के लिए युवा वर्ग को ही मेधावी, श्रमशील, देश भक्त और समाज सेवा की भावना से ओत प्रोत होना होगा।

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अपनी युवावस्था में भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाने का सपना संजोने वाले वैज्ञानिक विक्रम साराभाई का आज जन्मदिन (12 अगस्त) है। भारतीय स्पेस प्रोगाम की मदद से आम लोगों की जिंदगी सुधारने का सपना देखने वाले साराभाई का जन्म 12 अगस्त, 1919 को हुआ था। जन्म के वक्त बच्चे के कानों पर सबकी नजर गई जो बड़े-बड़े थे। हालांकि, उस वक्त किसी को अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि ये बच्चा आगे चलकर अपनी महानता से इतना मशहूर हो जाएगा कि देश-दुनिया और अंतरिक्ष तक में अपनी छाप छोड़ेगा। भारत का बहुप्रतीक्षित चंद्रयान-2 मिशन चांद की ओर जैसे-जैसे बढ़ रहा है, भारतीय स्पेस प्रोग्राम की सफलता की वो कहानी आगे बढ़ती जा रही है जिसकी नींव महान वैज्ञानक विक्रम साराभाई ने रखी थी।

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युवा की शक्ति समुद्र की भांति अथाह है, उसकी ऊर्जा और नई सोच ने इस विश्व को बदल कर रख दिया है। प्रयास यदि विश्व कल्याण के लिए हों तो सुखद होते हैं। वहीं यदि ये शक्ति गलत दिशा में चली जाए तो विनाशकारी भी होती है। हम क्या चाहते हैं, ये भी हमें तय करना है । बस याद रखिए जो अच्छा करते हैं पूरी ब्रम्हांड की शक्ति उनके साथ और उनके हाथ होती है। ध्यान रखिए उम्र बीतती है युवावस्था नहीं, यही सोच  युवा है।

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