Meerut Illegal Mosque: इस जिले में थाने की जमीन पर बना दिया मस्जिद! पुलिस ने इमाम को थमाया नोटिस, जवाब न मिला तो चलेगा बुल्डोजर

इस जिले में थाने की जमीन पर बना दिया मस्जिद! पुलिस ने इमाम को थमाया नोटिस, mosque was built inside the police station

Meerut Illegal Mosque: इस जिले में थाने की जमीन पर बना दिया मस्जिद! पुलिस ने इमाम को थमाया नोटिस, जवाब न मिला तो चलेगा बुल्डोजर
Modified Date: June 14, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: June 14, 2026 9:22 pm IST

मेरठ: Meerut Illegal Mosque: मेरठ जिले के खरखौदा क्षेत्र में थाना परिसर की भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण के जरिये बनाई गई एक मस्जिद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मस्जिद के इमाम को सात दिन में संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने और कथित अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया है।

Meerut Illegal Mosque: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, खरखौदा थाना परिसर में स्थित और स्थानीय स्तर पर ‘थाने वाली मस्जिद’ के नाम से प्रसिद्ध जामा मस्जिद की भूमि की पैमाइश के दौरान पता चला कि मस्जिद का निर्माण थाने की भूमि पर किया गया है। इसके बाद पुलिस ने मस्जिद के इमाम अब्दुल गफ्फार से स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे, लेकिन पुलिस का दावा है कि रविवार शाम तक कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जा सके। पुलिस के मुताबिक, मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर स्थित खरखौदा थाना आजादी से पहले का है और राजस्व अभिलेखों में खसरा संख्या 1217 की 6,450 वर्ग मीटर भूमि लंबे समय से थाना परिसर के नाम दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि इसी भूमि पर बाद में मस्जिद का निर्माण किया गया।

किठौर क्षेत्राधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट में भूमि थाना परिसर की बताई गई है और वैधानिक कार्रवाई के तहत इमाम को नोटिस देकर सात दिन में कथित अवैध निर्माण हटाने और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। खरखोदा के थाना प्रभारी राजपाल सिंह ने बताया कि शनिवार को नोटिस दिया गया है, जिसमें सात दिन की मोहलत दी गई है, फिलहाल नोटिस का कोई जवाब नहीं आया है। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अभिजीत कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मस्जिद कई वर्ष पुरानी है। हाल ही में थाने की पैमाइश कराई गई तो इस बारे में पता चला। फिलहाल नोटिस दिया गया है।”वहीं, मस्जिद के इमाम अब्दुल गफ्फार ने पुलिस के दावों का खंडन करते हुए कहा कि वर्ष 1985 में संबंधित भूमि वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हो चुकी थी और इसके प्रमाण उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं तथा मस्जिद वक्फ संपत्ति है।


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