अगर पृथ्वी बीमार हुई, तो आप भी बीमार हो जायेंगे |

अगर पृथ्वी बीमार हुई, तो आप भी बीमार हो जायेंगे

अगर पृथ्वी बीमार हुई, तो आप भी बीमार हो जायेंगे

:   Modified Date:  May 28, 2024 / 04:37 PM IST, Published Date : May 28, 2024/4:37 pm IST

(जैक मार्ले, पर्यावरण और ऊर्जा संपादक, यूके)

लंदन, 28 मई (द कन्वरसेशन) एक अधिक गर्म दुनिया के अधिक बीमार दुनिया होने की संभावना है।

पृथ्वी पर बढ़ते तापमान का मानव स्वास्थ्य पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता है, जैसे लू की लहरें जो हमारे शरीर विज्ञान की सहनशीलता से अधिक गर्म होती हैं। हालाँकि, विरासत में मिली स्थिर जलवायु से हटने के प्रभाव भी अपने आप में आश्चर्यजनक होंगे।

उनमें से कुछ मौजूदा बीमारियाँ हो सकती हैं जो नई जगहों पर दिखाई दे रही हैं या अधिक तीव्रता से फैल रही हैं। और कुछ, विशेषज्ञों को डर है, पूरी तरह से नई बीमारियाँ हो सकती हैं।

मच्छर जनित संक्रमण मलेरिया ने पिछले दशक के दौरान हर साल पांच लाख से अधिक लोगों की जान ले ली। इनमें से अधिकतर पीड़ित बच्चे थे और लगभग सभी (2022 में 95 प्रतिशत) अफ्रीका में थे।

बीमारी के स्रोत के रूप में, संक्रामक मच्छरों को कम से कम तीन चीजों की आवश्यकता होती है: गर्म तापमान, आर्द्र हवा और प्रजनन के लिए पोखर। तो वैश्विक तापमान से क्या फर्क पड़ेगा?

परजीवी दूसरी जगहों तक जा सकते हैं

जल और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मार्क स्मिथ (लीड्स विश्वविद्यालय) और क्रिस थॉमस (लिंकन विश्वविद्यालय) कहते हैं, ‘‘जलवायु और मलेरिया संचरण के बीच संबंध जटिल है और लगभग तीन दशकों से गहन अध्ययन का विषय रहा है।’’

इस शोध का अधिकांश हिस्सा उप-सहारा अफ्रीका पर केंद्रित है, जो मलेरिया के मामलों और मौतों का वैश्विक केंद्र है। स्मिथ और थॉमस ने मलेरिया के जोखिम का एक महाद्वीप-व्यापी विश्लेषण तैयार करने के लिए तापमान और जल संचलन अनुमानों को संयुक्त किया।

उनके परिणामों से पता चला कि मलेरिया संचरण की परिस्थितियाँ कुल मिलाकर कम उपयुक्त हो जाएंगी, खासकर पश्चिम अफ्रीका में। लेकिन जहां तापमान और आर्द्रता भविष्य में संक्रामक मच्छरों के अनुकूल होने की संभावना है, वहां बहुत अधिक लोगों के रहने की संभावना है, खास तौर से नदियों के पास जैसी मिस्र में नील नदी।

‘‘इसका मतलब है कि संभावित मलेरिया स्थानिक क्षेत्रों (साल में नौ महीने से अधिक संचरण के लिए उपयुक्त) में रहने वाले लोगों की संख्या 2100 से बढ़कर एक अरब से अधिक हो जाएगी,’’ वे कहते हैं।

अन्यत्र, उष्णकटिबंधीय बीमारियाँ अपने बंधनों को तोड़ देंगी क्योंकि उन्हें ले जाने वाले कीट भूमध्य रेखा से आगे जीवित रहेंगे। यह फ्रांस में पहले से ही हो रहा है, जहां 2022 की भीषण गर्मी के दौरान डेंगू बुखार के मामले बढ़ गए हैं।

साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय में वैश्विक स्वास्थ्य के एक वरिष्ठ अनुसंधान साथी माइकल हेड कहते हैं, ‘‘ऐसा लगता है कि वेनेटो (इटली में) के तराई क्षेत्र क्यूलेक्स मच्छरों के लिए एक आदर्श निवास स्थान के रूप में उभर रहे हैं, जो वेस्ट नाइल वायरस की मेजबानी और उन्हें प्रसारित कर सकते हैं,’’।

न्यूकैसल विश्वविद्यालय में परजीवी महामारी विज्ञान के वरिष्ठ व्याख्याता मार्क बूथ कहते हैं, शोध से पता चलता है कि मलेरिया और डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियों का वैश्विक संचरण बदल जाएगा। यह उतनी ही स्पष्ट तस्वीर है जितनी बूथ गर्म हो रही दुनिया में 20 से अधिक उष्णकटिबंधीय रोगों के मॉडलिंग से प्राप्त कर सकते है।

वह कहते हैं, “अधिकांश अन्य परजीवियों के लिए, बहुत कम या कोई सबूत नहीं था। हम बस यह नहीं जानते कि क्या उम्मीद करें,” ।

कुछ बीमारियाँ इन्सानों के लिए अतिरिक्त पीड़ा लेकर आएंगी। बूथ का कहना है कि ब्लूटंग, छोटे कीड़े द्वारा प्रसारित किया जाने वाला एक वायरस है, जिसके उपोष्णकटिबंधीय एशिया और अफ्रीका, जहां यह विकसित हुआ था, की तुलना में मध्य अफ्रीका, पश्चिमी रूस और अमेरिका में भेड़ों को संक्रमित करने की आशंका है।

और मनुष्यों को पीड़ित करने वाली कुछ बीमारियों का पूर्वानुमान और खराब हो जाएगा। यूसीएल के शिक्षाविद संजय सिसौदिया, एक न्यूरोसाइंटिस्ट और एक पृथ्वी प्रणाली वैज्ञानिक, मार्क मसलिन ने पाया कि जलवायु परिवर्तन कुछ मस्तिष्क स्थितियों के लक्षणों को बढ़ा रहा है।

वे कहते हैं, ‘‘हमारे मस्तिष्क में अरबों न्यूरॉन्स में से प्रत्येक एक सीखने, अनुकूलन करने वाले कंप्यूटर की तरह है, जिसमें कई विद्युत सक्रिय घटक होते हैं। इनमें से कई घटक परिवेश के तापमान के आधार पर एक अलग दर पर काम करते हैं, और तापमान की एक संकीर्ण सीमा के भीतर एक साथ काम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।’’

एक प्रजाति जो अफ्रीका में विकसित हुई, मनुष्य 20 डिग्री सेल्सियस और 26 डिग्री सेल्सियस के बीच और 20 प्रतिशत और 80 प्रतिशत आर्द्रता के बीच सहज रहते हैं, सिसौदिया और मसलिन कहते हैं। हमारा मस्तिष्क पहले से ही ज्यादातर मामलों में अपनी पसंदीदा तापमान सीमा की हद के करीब काम कर रहा है, इसलिए थोड़ी सी भी वृद्धि मायने रखती है।

‘‘जब वे पर्यावरणीय स्थितियाँ तेजी से असामान्य सीमा में चली जाती हैं, जैसा कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित अत्यधिक तापमान और आर्द्रता के साथ हो रहा है, तो हमारा मस्तिष्क हमारे तापमान को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष करता है और काम करना शुरू कर देता है।’’

एक ग्रह, एक स्वास्थ्य

स्पष्ट रूप से, स्वस्थ रहना उतना आसान नहीं है जितना कि आप क्या खाते हैं या कितनी बार व्यायाम करते हैं इसे नियंत्रित करना। ऐसा बहुत कुछ है जो आपके तत्काल नियंत्रण से परे है।

कैंटरबरी विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञान और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के एसोसिएट प्रोफेसर अरिंदम बसु कहते हैं, ‘‘तीन साल से भी कम समय के भीतर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अंतरराष्ट्रीय चिंता की दो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित की हैं: फरवरी 2020 में कोविड​-19 और जुलाई 2022 में मंकीपॉक्स।’’

“उसी समय, दुनिया भर में चरम मौसम की घटनाओं की लगातार रिपोर्ट की जा रही है और इसके और अधिक बार और तीव्र होने की उम्मीद है। ये अलग-अलग मुद्दे नहीं हैं।”

बसु नई बीमारियों के उभरने के खतरे पर प्रकाश डालते हैं, विशेष रूप से रोगजनकों से जो वैश्विक तापन के बीच आवास परिवर्तन के कारण मनुष्यों और जानवरों के बीच आ सकते हैं।

वह कहते हैं, ‘‘मनुष्यों और जंगली जानवरों के बीच घनिष्ठ संपर्क बढ़ रहा है क्योंकि कृषि के लिए जंगलों को नष्ट किया जा रहा है और विदेशी जानवरों का व्यापार जारी है। उसी समय, पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से बर्फ के नीचे छिपे रोगाणु मुक्त हो रहे हैं।’’ चूँकि रोगज़नक़ों का पारिस्थितिकी तंत्र मनुष्यों और जानवरों के समान ही होता है जिन्हें वे संक्रमित करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य की एक नई अवधारणा की तत्काल आवश्यकता है। बसु का कहना है कि इसका उद्देश्य लोगों, वन्यजीवों और पर्यावरण के स्वास्थ्य को अनुकूलित करना होना चाहिए।

जलवायु संकट हर चीज के साथ हमारे अनगिनत संबंधों को उजागर करता है – और जीवन को आश्रय देने वाले एकमात्र ग्रह पर हमारी साझा कमजोरी को भी उजागर करता है।

द कन्वरसेशन एकता एकता

एकता

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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