भारत, न्यूजीलैंड को स्थिरता के लिए औपनिवेशिक काल के बाद की व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए: जयशंकर |

भारत, न्यूजीलैंड को स्थिरता के लिए औपनिवेशिक काल के बाद की व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए: जयशंकर

भारत, न्यूजीलैंड को स्थिरता के लिए औपनिवेशिक काल के बाद की व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए: जयशंकर

: , November 29, 2022 / 08:05 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

ऑकलैंड, छह अक्टूबर (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और न्यूजीलैंड जैसे देशों की यह विशिष्ट जिम्मेदारी है कि वे औपनिवेशिक काल के बाद की एक ऐसी व्यवस्था बनाए, जो वैश्विक समृद्धि एवं स्थिरता लाए।

जयशंकर ने न्यूजीलैंड की अपनी समकक्ष नानाया महुता से हुई बातचीत के दौरान हिंद-प्रशांत और यूक्रेन संघर्ष जैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों पर चर्चा की।

जयशंकर ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न से भी बृहस्पतिवार को मुलाकात की और इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापारिक सहयोग बढ़ाने एवं लोगों के बीच आपसी सपंर्क को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई।

जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न से मुलाकात करके खुशी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।’’

यह विदेश मंत्री के रूप में जयशंकर की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है।

जयशंकर ने महुता के साथ बैठक के बाद ट्वीट किया, ‘‘न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री नानाया महुता के साथ आज दोपहर गर्मजोशी से भरी उपयोगी वार्ता हुई। एक-दूसरे की परंपरा एवं संस्कृति का सम्मान करने वाले दोनों समाज बेहतर समकालीन संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत और यूक्रेन संघर्ष जैसी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं (के मुद्दों) पर विचारों के आदान-प्रदान की सराहना की। हम संयुक्त राष्ट्र और राष्ट्रमंडल सहित बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ काम करने को महत्व देते हैं।’’

जयशंकर ने महुता के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं इसे केवल एक यात्रा नहीं मानता, बल्कि यह एक-दूसरे की परंपराओं और संस्कृति का बहुत सम्मान करने वाले दो देशों की अधिक समकालीन संबंध बनाने की कोशिश है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम यह समझते हैं कि भारत और न्यूजीलैंड जैसे देशों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे औपनिवेशिक काल के बाद की एक ऐसी व्यवस्था बनाएं, जो अधिक न्यायसंगत हो, जो दुनिया के बड़े हिस्सों में समृद्धि एवं स्थिरता लाए और जिससे हम ऐतिहासिक रूप से जुड़े हुए हैं।’’

जयशंकर ने कहा, ‘‘इस बात का सारांश यह समझ है कि हमें एक दूसरे की ताकत यानी विशेष रूप से कारोबार, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल दुनिया, कृषि व्यापार, प्रतिभा और सबसे जरूरी लोगों के बीच आपसी संपर्क से लाभ लेना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि इस बात पर भी गहन चर्चा हुई कि भारत और न्यूजीलैंड किस प्रकार वृहद क्षेत्र, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मिलकर आकार दे सकते हैं।

जयशंकर ने कहा, ‘‘हिंद प्रशांत में सुरक्षा हालात और यूक्रेन संघर्ष के परिणाम जैसे कुछ मौजूदा, अहम मामलों पर भी चर्चा हुई।’’

भारत, अमेरिका और विश्व की कई अन्य शक्तियां हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की पृष्ठभूमि में स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दे रही हैं।

चीन विवादित दक्षिण चीन सागर के लगभग पूरे हिस्से पर अपना दावा जताता है। हालांकि ताइवान, फिलीपीन, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कई कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान भी बनाए हैं।

भारत ने यूक्रेन समस्या का वार्ता एवं कूटनीतिक माध्यम से समाधान करने की आवश्यकता पर कई बार बल दिया है।

जयशंकर ने कहा, ‘‘… और स्वाभाविक रूप से हमने कुछ बड़े वैश्विक मामलों, जलवायु परिवर्तन से निपटने से जुड़े कदमों, जलवायु न्याय पर भी कुछ देर वार्ता की।’’

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन, समेत पिछले कुछ साल में भारत द्वारा प्रायोजित कुछ पहलों का भी जिक्र किया।

उन्होंने ‘‘वैश्विक महामारी जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए न केवल द्विपक्षीय, बल्कि अन्य देशों के साथ भी गठजोड़ की महत्ता पर बल दिया।’’

जयशंकर ने कहा, ‘‘हमने बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता पर भी थोड़ी बात की।’’

जयशंकर ने कोविड-19 से निपटने के लिए न्यूजीलैंड द्वारा किए गए उपायों से भारतीय छात्रों के प्रभावित होने के मामले को भी उठाया। उन्होंने न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया।

पढ़ाई के लिए न्यूजीलैंड पहुंचने वाले विदेशी छात्रों की संख्या के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है।

जयशंकर ने हर समाज में कौशल की मांग के मामले पर भी बात की।

विदेश मंत्री ने इस वार्ता को उपयोगी बताता और अपनी समकक्ष को भारत आमंत्रित किया।

जयशंकर ने महुता के साथ अपनी बैठक के दौरान न्यूजीलैंड के सहायक विदेश मंत्री औपिटो विलियम सियो से भी मुलाकात की।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘विदेश मंत्री नानाया महुता के साथ बैठक के दौरान सहायक विदेश मंत्री औपिटो विलियम सियो से मिलकर खुशी हुई। प्रशांत द्वीप को लेकर उनके नजरिये से लाभ मिला।’’

जयशंकर अपनी यात्रा के दौरान अर्डर्न के साथ एक कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को हिस्सा लेंगे, जिसमें उस देश में अभूतपूर्व योगदान देने एवं उपलब्धियां हासिल करने वाले भारतीय समुदाय के लोगों को सम्मानित किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता न्यूजीलैंड में भारत के आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम को प्रदर्शित करने वाली ‘इंडिया@75’ डाक टिकट को जारी करेंगे।

जयशंकर बुधवार को न्यूजीलैंड पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय मूल की मंत्री प्रियंका राधाकृष्णन से मुलाकात की थी और देश की कुछ प्रमुख हस्तियों के साथ बातचीत भी की थी।

भाषा सिम्मी माधव

माधव

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)