मलाला ने ‘लैंगिक भेदभाव’ को मानवता के खिलाफ अपराध बनाने का किया आग्रह |

मलाला ने ‘लैंगिक भेदभाव’ को मानवता के खिलाफ अपराध बनाने का किया आग्रह

मलाला ने ‘लैंगिक भेदभाव’ को मानवता के खिलाफ अपराध बनाने का किया आग्रह

:   December 6, 2023 / 08:37 PM IST

जोहानिसबर्ग, छह दिसंबर (भाषा) नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई ने अफगानिस्तान में महिलाओं पर तालिबान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की तुलना दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के तहत अश्वेतों के साथ किए जाने वाले व्यवहार से करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ‘लैंगिक भेदभाव’ को मानवता के खिलाफ अपराध बनाने का आग्रह किया है।

यूसुफजई को 2014 में 17 साल की उम्र में पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह मंगलवार को यहां वार्षिक नेल्सन मंडेला व्याख्यान के 21वें संस्करण में वक्ता थीं।

इस कार्यक्रम में, अंतरराष्ट्रीय वक्ता हर साल मंडेला की पुण्य तिथि पर अपने विचार साझा करते हैं, जो राजनीतिक कैदी के रूप में 27 साल की सजा काटने के बाद दक्षिण अफ्रीका के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति बने थे।

मलाला ने कहा कि अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ जो ‘‘लैंगिक भेदभाव’’ शुरू किया है, पूरी दुनिया को उस पर ध्यान देने और उसका मुकाबला करने की जरूरत है।

मलाला ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान में ‘बुरे दौर’ को खत्म करने के लिए सामूहिक और तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया।

मलाला (26) नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की शख्स हैं। लड़कियों की शिक्षा के वास्ते आवाज उठाने के लिए आतंकवादियों ने स्कूल बस में घुस कर मलाला के सिर पर गोली मारी थी।

उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ अलख जगाने वाले प्रख्यात नेता नेल्सन मंडेला की 10वीं पुण्यतिथि पर जोहानिसबर्ग में ‘वार्षिक नेल्सन मंडेला’ व्याख्यान देने के बाद ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से बात की।

मलाला ने अपना भाषण अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों को समर्पित किया। उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे सिर पर गोली लगने के बाद पूरी दुनिया मेरे साथ खड़ी हुई। अफगानिस्तान की लड़कियों के साथ दुनिया कब खड़ी होगी?’’

मलाला ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, ‘‘ तालिबान की सत्ता के बाद अफगानिस्तान ने केवल बुरे दिन ही देखे हैं। कम से कम ढ़ाई वर्ष हो गए हैं और अधिकतर लड़कियों ने स्कूल का मुंह नहीं देखा है।’’

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से ‘‘अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति को लैंगिक भेदभाव मानने’’ की अपील की और उन खबरों का जिक्र किया जिनमें कहा गया है कि ‘‘महिलाओं को हिरासत में लिया जा रहा है, जेलों में डाला जा रहा है, पीटा जा रहा है जबरदस्ती विवाह कराया जा रहा है।’’

एपी अमित प्रशांत

प्रशांत

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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