विकलांग लोगों के लिए मानसिक संकट बहुत गहन है, स्वास्थ्य पेशेवर मदद करने में असमर्थ |

विकलांग लोगों के लिए मानसिक संकट बहुत गहन है, स्वास्थ्य पेशेवर मदद करने में असमर्थ

विकलांग लोगों के लिए मानसिक संकट बहुत गहन है, स्वास्थ्य पेशेवर मदद करने में असमर्थ

: , November 29, 2022 / 08:38 PM IST

(अनास्तासिया ह्रोनिस, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी सिडनी)

सिडनी, नौ अगस्त (द कन्वरसेशन) यह कोई रहस्य नहीं है कि कोविड का व्यापक प्रभाव पड़ रहा है और इसने लोगों की पहले से ही बढ़ती शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को और खराब कर दिया है।

ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड वेलफेयर के नवीनतम आंकड़ों से संकेत मिलता है कि हमारे कुछ सबसे कमजोर लोग सबसे ज्यादा संघर्ष कर रहे हैं।

विकलांग लोग मानसिक स्वास्थ्य कठिनाइयों और मनोवैज्ञानिक संकट की उच्च दर का अनुभव कर रहे हैं। हालत यह है कि स्वास्थ्य पेशेवर अक्सर ऐसे लोगों के इलाज के लिए खुद को सक्षम महसूस नहीं करते हैं जो विकलांग और मानसिक स्वास्थ्य कठिनाइयों दोनों का सामना कर रहे हैं।

छह में से एक ऑस्ट्रेलियाई विकलांग है, जो लगभग 44 लाख लोगों के बराबर है।

नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि दो-तिहाई विकलांग लोग मनोवैज्ञानिक संकट के निम्न से मध्यम स्तर से पीड़ित हैं, जबकि लगभग एक तिहाई मनोवैज्ञानिक संकट के उच्च या बहुत उच्च स्तर से जूझ रहे हैं।

इसकी तुलना में बिना किसी विकलांगता वाले 92 प्रतिशत निम्न से मध्यम मनोवैज्ञानिक संकट के शिकार हैं, और 8 प्रतिशत जो उच्च या बहुत अधिक संकट से जूझ रहे करते हैं।

विकलांगता के साथ रहने वाले लगभग एक चौथाई वयस्क बताते हैं कि महामारी की अवधि के दौरान उनका मानसिक स्वास्थ्य खराब हो गया है।

अंतर क्यों?

शोध बताता है कि शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक मजबूत संबंध है।

कुछ स्वास्थ्य व्यवहारों के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ने की संभावना है, जैसे कि खराब आहार और निष्क्रियता।

सामान्य तौर पर, सशक्त लोगों की तुलना में निःशक्त लोगों के जोखिम भरे स्वास्थ्य व्यवहारों में संलग्न होने की संभावना अधिक होती है।

इसमें प्रतिदिन पर्याप्त फल और सब्जियां नहीं खाना (41 प्रतिशत की तुलना में 47 प्रतिशत), बॉडी मास इंडेक्स के अनुसार अधिक वजन या मोटापा (55 प्रतिशत की तुलना में 72 प्रतिशत), और अपनी उम्र के अनुसार पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करना शामिल है। (52 प्रतिशत की तुलना में 72 प्रतिशत)।

विकलांग लोगों में न केवल मानसिक स्वास्थ्य कठिनाइयों और स्वास्थ्य जोखिम व्यवहार की उच्च दर होती है, बल्कि प्रभावी और समय पर स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने में भी उन्हें बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

इन बाधाओं में स्वास्थ्य पेशेवरों सहित स्वास्थ्य देखभाल के लिए लंबा इंतजार, इमारतों तक पहुंचने में लाचारी, भारी लागत और भेदभाव के अनुभव शामिल हैं।

विकलांग हों या मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हों – लेकिन दोनों नहीं

मानसिक स्वास्थ्य और विकलांगता क्षेत्रों में काम करते हुए, सेवाओं की कमी के बीच लोगों के परेशान होने के बारे में सुनना असामान्य नहीं है।

कोई व्यक्ति विकलांगता-विशिष्ट स्वास्थ्य सेवा हासिल कर पाता है, लेकिन उसे मानसिक स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पाती। इसी तरह किसी को मानसिक स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल जाता है, लेकिन विकलांगता विशिष्ट स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पाती।

कई कारक इस मुद्दे में योगदान करते हैं। सेवाओं को अक्सर इस तरह से वित्त पोषित किया जाता है जिसके लिए उन्हें कुछ मानदंड रखने की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से इसका मतलब यह है कि जो लोग उन मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं उन्हें इन सेवाओं से दूर कर दिया जाता है।

स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक सहमत हैं कि विकलांग लोगों को अच्छी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और सेवाओं तक पहुंच प्राप्त करने का अधिकार है। लेकिन मनोवैज्ञानिक और काउंसलर जैसे चिकित्सक विकलांग लोगों के साथ काम करते हुए उतने सहज नहीं हो पाते है, और उन्हें उनकी श्रेष्ठ मदद करने लायक प्रशिक्षण प्राप्त न होने की बात करते हैं।

बाधाएं भेदभाव का कारण बन सकती हैं

लंबे समय तक, कुछ अक्षमताओं जैसे बौद्धिक विकार वाले विकलांगों को कई मानसिक स्वास्थ्य उपचारों से दूर रखा गया।

यह माना गया था कि सीखने और संसाधित करने में कठिनाइयों के कारण, उनके पास चिकित्सा में संलग्न होने की क्षमता नहीं थी।

यह तब होता है जब एक स्वास्थ्य चिकित्सक लक्षणों की पूरी तरह से खोज करने और वैकल्पिक निदान पर विचार करने के बजाय किसी व्यक्ति के लक्षणों को पहले से मौजूद विकलांगता या मानसिक बीमारी के लिए जिम्मेदार ठहराता है।

निवेश और प्रशिक्षण की जरूरत है

अगर हमें विकलांग लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और भलाई में सुधार करना है, तो अधिक निवेश की आवश्यकता है।

डॉक्टरों और चिकित्सकों को विकलांग और मानसिक बीमारी वाले रोगियों के साथ काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

हमें स्वास्थ्य, विकलांगता और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच अधिक सहयोग और संचार में वृद्धि की भी आवश्यकता है ताकि सेवाएं अलगाव के बजाय एक साथ काम करें।

हम न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के विकासात्मक विकलांगता विभाग न्यूरोसाइकियाट्री, प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सिडनी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ हेल्थ और वेस्टमीड चिल्ड्रन हॉस्पिटल को मानसिक स्वास्थ्य और विकलांगता आवश्यकताओं के एकीकरण के उदाहरणों के लिए देख सकते हैं। अन्य सेवाओं को इस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

हमेशा की तरह, रोकथाम और शीघ्र हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है। जबकि यह महत्वपूर्ण है कि हम उन लोगों का प्रभावी ढंग से इलाज कर सकें जिन्हें मदद की आवश्यकता है, हमारे लिए मानसिक बीमारी की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकना भी महत्वपूर्ण है।

द कन्वरसेशन एकता एकता

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)