उत्तर कोरिया ने पुनर्एकीकरण के अपने स्मारक ध्वस्त किए, पर सपना मिटेगा नहीं |

उत्तर कोरिया ने पुनर्एकीकरण के अपने स्मारक ध्वस्त किए, पर सपना मिटेगा नहीं

उत्तर कोरिया ने पुनर्एकीकरण के अपने स्मारक ध्वस्त किए, पर सपना मिटेगा नहीं

:   Modified Date:  February 7, 2024 / 01:38 PM IST, Published Date : February 7, 2024/1:38 pm IST

डेविड हॉल, कोरियाई अध्ययन में पीएचडी उम्मीदवार, सेंट्रल लंकाशायर विश्वविद्यालय लंकाशायर, सात फरवरी (द कन्वरसेशन) उत्तर कोरिया ने आर्क ऑफ रीयूनिफिकेशन को ध्वस्त कर दिया है, जो दक्षिण कोरिया के साथ सुलह की आशा का प्रतीक था। स्मारक को ध्वस्त करने का निर्णय शासन के नेता किम जोंग-उन के भाषण के तुरंत बाद आया, जिसमें उन्होंने इस स्मारक को ‘आँख की किरकिरी’ करार दिया था। उसी भाषण में, किम ने कहा कि अगस्त 1945 से विभाजित दोनों कोरिया का शांतिपूर्ण पुनर्मिलन अब संभव नहीं है और उन्होंने अपने देश के ‘प्रमुख दुश्मन’ के रूप में दक्षिण कोरिया की स्थिति को प्रतिबिंबित करने के लिए उत्तर कोरियाई संविधान में संशोधन का आह्वान किया। .

2001 में अनावरण किए गए, आर्क ऑफ रियूनिफिकेशन में दो कोरियाई महिलाओं को पारंपरिक पोशाक – जिसे दक्षिण कोरिया में हनबोक (‘कोरियाई कपड़े’) और उत्तर कोरिया में चोसोन-ओटी (‘कोरियाई कपड़े’) कहा जाता- पहने हुए दिखाया गया। महिलाएं संयुक्त रूप से एकीकृत कोरियाई प्रायद्वीप की एक छवि पेश करती हैं, जो उस समय दोनों देशों को फिर से एकजुट करने की उत्तर कोरियाई सरकार की वास्तविक इच्छा को दर्शाती है। यह पहली बार नहीं है जब उत्तर कोरिया ने कोरियाई सहयोग, वार्ता और एकीकरण की आशा के प्रतीकों को नष्ट किया है। जून 2020 में, उत्तर कोरिया ने सीमावर्ती शहर केसोंग के पास दक्षिण कोरिया के साथ एक संयुक्त संपर्क कार्यालय को उड़ाने का फुटेज रिकॉर्ड किया और जारी किया। यह साइट दोनों देशों को संवाद करने में मदद करने के लिए खोली गई थी। इसके अगले वर्ष, अगस्त 2021 में, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से किए गए सैन्य अभ्यास के विरोध में अंतर-कोरियाई हॉटलाइन – उत्तर और दक्षिण कोरिया को जोड़ने वाली 40 से अधिक टेलीफोन लाइनों की एक श्रृंखला – को तोड़ दिया। हालाँकि, किम ने दो महीने बाद हॉटलाइन बहाल कर दी और सियोल से संबंधों में सुधार के प्रयास बढ़ाने का आग्रह किया। आर्क ऑफ रियूनिफिकेशन का विध्वंस उत्तर कोरिया के पुनर्एकीकरण को असंभव बताने के दृढ़ संकल्प का संकेत देता है। लेकिन, इस स्मारक के भौतिक रूप से नष्ट हो जाने के बावजूद, पांच आधिकारिक डाक टिकटों पर इसका चित्रण इस स्मारक और इसके प्रतीकों को अमर बनाने का काम करता है। डाक टिकट न केवल उन वस्तुओं के रूप में कार्य करते हैं जो डाक दरों के भुगतान को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि प्रचार संदेशों के छोटे वाहक के रूप में भी कार्य करते हैं। अतीत में, उन्हें आधिकारिक दृष्टिकोण बताने वाले ‘राजदूत’ और ‘देश की खिड़कियां’ के रूप में वर्णित किया गया है, जो यह दर्शाता है कि वह अपने नागरिकों और अपनी सीमाओं से परे लोगों द्वारा कैसे देखा जाना चाहता है। अधिकांश अधिनायकवादी देशों में, आधिकारिक पार्टी के आख्यानों में संशोधन के लिए पिछले आख्यान से जुड़े प्रतीकों को बदलने और हटाने की आवश्यकता होती है। इसका सबसे उल्लेखनीय उदाहरण 1953 में पूर्व सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन की मृत्यु के बाद कई शहरों और स्थलों से उनका नाम हटा देना है। यह 1950 के दशक के अंत में डी-स्तालिनीकरण आंदोलन का हिस्सा बना और स्टालिन के ‘व्यक्तित्व के पंथ’ को नष्ट कर दिया। स्टालिन ने नेता के रूप में अपनी स्थिति सुधारने और निष्ठा को प्रेरित करने के लिए कला और लोकप्रिय संस्कृति का उपयोग किया था। इसी तरह, आधिकारिक उत्तर कोरियाई डाक टिकट कैटलॉग ने अपनी सूची से पांच टिकटों को हटा दिया, जो पुनर्मिलन के आर्क को दर्शाते थे। स्टाम्प कैटलॉग से संबंधित जानकारी मिलती है कि स्टाम्प कब जारी किए गए, उन्हें किसने डिजाइन किया, उनके आयाम और रंग। उन्हें एकत्रित और विश्लेषण करते समय यह जानकारी होना महत्वपूर्ण है। यह निश्चित नहीं है कि टिकटें कब हटाई गईं। लेकिन वेबैक मशीन (वर्ल्ड वाइड वेब का एक डिजिटल संग्रह) इंगित करता है कि 19 जनवरी को वेबसाइट में एक बदलाव हुआ था, यह बदलाव किम के भाषण और स्मारक के कथित विध्वंस की समय सीमा के भीतर था। टिकटों के सभी दृश्य और पाठ्य संदर्भ वेबसाइट से हटा दिए गए हैं। एनके न्यूज ने इस समय के आसपास यह भी बताया कि उत्तर कोरिया पुरानी सामग्री की प्रचार वेबसाइटों को हटा रहा था, जिससे आधिकारिक कहानी को फिर से लिखने का सुझाव दिया गया। इसकी मिसाल मौजूद है। उत्तर कोरिया ने पहले भी अपने आधिकारिक स्टांप कैटलॉग से लिस्टिंग हटाई है क्योंकि वे नए राज्य के आख्यानों के विपरीत थी। उदाहरण के लिए, 1960 में, उत्तर कोरिया ने कोरियाई युद्ध (1950-1953) के बाद प्योंगयांग के पुनर्निर्माण का जश्न मनाते हुए पांच टिकटों का एक सेट जारी किया। टिकटों पर दिखाए गए स्थानों के दो नाम, ‘माओ ज़ेडॉन्ग स्क्वायर’ और ‘स्टालिन स्ट्रीट’ का नाम बाद में ‘ट्रायम्फ आर्क स्क्वायर’ और ‘विक्ट्री स्ट्रीट’ रखा गया। चूंकि 1960 में जारी किए गए टिकटों में मूल नाम शामिल थे, बाद में प्रकाशित स्टाम्प कैटलॉग में उनके दृश्य चित्रण शामिल नहीं थे। पुनर्मिलन के आर्क को पहली बार मई 2002 में उत्तर कोरियाई डाक टिकट पर चित्रित किया गया था, इसके अनावरण के लगभग एक साल बाद। लेकिन स्मारक को हाल ही में, 2015 में जारी किए गए दो टिकटों और क्रमशः 2016 और 2021 में जारी किए गए दो और टिकटों पर चित्रित किया गया है। उत्तर कोरिया पुनर्मिलन के आर्क के चित्रण के किसी भी अवशेष को मिटाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, दुर्भाग्य से उत्तर कोरिया के लिए, ये टिकटें विदेशी स्टांप संग्राहकों के निजी संग्रह में मौजूद हैं। जारी होने के समय ये टिकट रूस और चीन में कोरिया स्टाम्प कॉर्पोरेशन (उत्तर कोरिया के राज्य संचालित डाक प्राधिकरण) कार्यालयों के माध्यम से दुनिया भर में जारी किए गए थे। ये टिकटें अभी भी ईबे जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्टांप डीलरों से आसानी से खरीदी जा सकती हैं। इस कारण से, उत्तर कोरिया एकीकरण के सपने के इन चित्रणों को कभी भी पूरी तरह से मिटा नहीं सकता है क्योंकि उसका इस बात पर पूरा नियंत्रण नहीं है कि उसके राज्य की कहानी को कैसे प्रस्तुत किया जाता है और संभावित रूप से कैसे बदला जाता है। द कन्वरसेशन एकता

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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