श्रीलंका की सर्वोच्च अदालत का राष्ट्रपति सिरीसेना को झटका, कहा- संसद भंग करने का फैसला असंवैधानिक

श्रीलंका की सर्वोच्च अदालत का राष्ट्रपति सिरीसेना को झटका, कहा- संसद भंग करने का फैसला असंवैधानिक

श्रीलंका की सर्वोच्च अदालत का राष्ट्रपति सिरीसेना को झटका, कहा- संसद भंग करने का फैसला असंवैधानिक
Modified Date: November 29, 2022 / 08:52 pm IST
Published Date: December 14, 2018 6:43 am IST

कोलंबो। श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और उनके बनाए प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को बड़ा झटका दिया है। राष्ट्रपति सिरीसेना के संसद भंग करने के फैसले को अदालत ने असंवैधानिक करार दिया है। इससे पहले संसद की बैठक में बहुमत ने बतौर प्रधानंमत्री रानिल विक्रमसिंघे के नाम पर मुहर लगा दी थी।

गुरुवार को दिए गए अपने फैसले में श्रीलंकाई सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना द्वारा संसद को भंग करने के निर्णय को एक राय से असंवैधानिक बताया। सात सदस्यों वाली पीठ ने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति संसद को तब तक भंग नहीं कर सकते, जब तक संसद का साढ़े चार साल का कार्यकाल पूरा नहीं हो जाता।

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बता दें कि सिरीसेना ने 26 अक्ट्रबर को प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को पीएम नियुक्त कर दिया था। उन्होंने संसद को भंग करते हुए पांच जनवरी को अगला आम चुनाव करवाने की भी घोषणा कर दी थी। बताया जा रहा है कि सिरीसेना ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उन्हें ये लगा कि 225 सदस्यों वाली संसद में राजपक्षे 113 सांसदों का समर्थन हासिल नहीं कर पाएंगे और विक्रमसिंघे का पक्ष मजबूत बना रहेगा।


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