फेम 2 योजना में हाल में हुए बदलाव से ई-वाहनों की मांग बढ़ेगी: फिक्की

फेम 2 योजना में हाल में हुए बदलाव से ई-वाहनों की मांग बढ़ेगी: फिक्की

फेम 2 योजना में हाल में हुए बदलाव से ई-वाहनों की मांग बढ़ेगी: फिक्की
Modified Date: November 29, 2022 / 08:31 pm IST
Published Date: June 21, 2021 3:17 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) उद्योग संगठन फिक्की ने सोमवार को कहा कि इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी बढ़ाने सहित फेम 2 योजना में हाल में किए गए बदलावों से दोपहिया, तिपहिया ई-वाहनों और इलेक्ट्रिक बसों के वर्गों में मांग बढ़ने की उम्मीद है।

इसके बावजूद संगठन ने सरकार से इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों पर मांग प्रोत्साहन को दो-पहिया वाहनों पर दिए जा रहे मांग प्रोत्साहन की ही तरह बढ़ाने की अपील की है।

साथ ही भारत सरकार की खरीद इकाई एनर्जी एफिशिएन्सी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) अलग-अलग उपयोगकर्ता वर्गों के लिए तीन लाख तिपहिया वाहनों की मांग जुटाएगी।

गौरतलब है कि सरकार ने हाल ही में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और उन्हें तेजी से उपयोग में लाने के लिये शुरू की गई ‘‘फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया चरण दो (फेम इंडिया दो)’ योजना में आंशिक संशोधन किया था। इसके तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए मांग प्रोत्साहन को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति यूनिट (किलो वाट/घंटा) क्षमता कर दिया गया। पहले सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 10,000 प्रति यूनिट की सब्सिडी थी। इनमें प्लग इन हाइब्रिड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन शामिल हैं। बसें इसमें शामिल नहीं हैं।

ताजा संशोधन के तहत भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए प्रोत्साहन की सीमा को वाहन की लागत के 40 प्रतिशत तक सीमित किया है। पहले यह सीमा 20 प्रतिशत थी।

फिक्की की इलेक्ट्रिक वाहन समिति की अध्यक्ष सुलज्जा मोटवानी ने सरकार के कदमों को लेकर कहा, ‘सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए मांग प्रोत्साहन को 10,000 से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति यूनिट (किलो वाट/घंटा) क्षमता करने का कदम शानदार है। फिक्की पूर्व में इसकी सिफारिश करता आ रहा था।’

उन्होंने साथ ही कहा कि फिक्की तिपहिया वाहनों के लिए भी मांग प्रोत्साहन को 10,000 से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति यूनिट (किलो वाट/घंटा) क्षमता करने की अपील करता है। इससे यात्रियों की आवाजाही के लिए इन वाहनों की मांग बढ़ेगी और स्वरोजगार का सृजन करने एवं शहरों में प्रदूषण को घटाने में काफी मदद मिलेगी।

भाषा

प्रणव महाबीर

महाबीर


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