सदन, धान और घमासान, धान के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, धान खरीदी की नैतिक जिम्मेदारी किसकी?

सदन, धान और घमासान, धान के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा! opposition surrounded the government on the issue of paddy in the house

Edited By: , July 30, 2021 / 11:56 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन समेत केंद्र समर्थित योजनाओं को लेकर आज नियंत्रक महालेखा परीक्षक रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए पेश की गई रिपोर्ट में कई जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019-20 में राज्य की आय काफी प्रभावित रही. तय लक्ष्य की तुलना में राज्य को 9 हजार 608 करोड़ रूपय कम राजस्व की प्राप्ति हो सकी, जबकि 2018-19 में 683 करोड़ का सरप्लस राजस्व आया था। वहीं, इस दौरान राज्य का राजकोषीय घाटा भी करीब 18 हजार करोड़ तक चला गया। यह भी तय लक्ष्य से 3.50% अधिक था।

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सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि राज्य सरकार ने 31 मार्च 2020 तक 10 निगमों, 28 सरकारी कंपनियों, 22 स्टॉक कंपनियों, 2 ग्रामीण बैंक और 1523 सहकारी समितियों में 7,265 करोड़ रूपये का निवेश किया था। लेकिन इन निवेश पर सिर्फ 0.03 प्रतिशत का रिटर्न मिला। जबकि राज्य सरकार को लिए गए कर्जों पर 6.83 फीसदी का ब्याज चुकाना पड़ रहा है। लोकनिर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग की अधूरी परियोजनाएं भी हजारों करोड़ों का नुकसान करा रही हैं। अब तक 145 परियोजनाएं तय समय पर पूरी नहीं हो सकी हैं। इनमें से अकेले 51 अपूर्ण परियोजनाओं के चलते 2 हजार 496 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करने पड़े हैं। देरी के चलते इन परियोजनाओं से अपेक्षित लाभ भी नहीं मिल सकेगी।

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सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि साल 2018-19 और 2019-20 में राज्य के खजाने में करीब 12 हजार करोड़ रूपये मौजूद थे। राज्य सरकार चाहती तो इसका उपयोग कर उधार और ब्याज के बोझ को कम कर सकती थी। दूसरी तरफ राज्य सरकार उपलब्ध बजट को खर्च करने में भी नाकाम रही। वित्तीय वर्ष 2019-20 के अंत तक 21 हजार 334 करोड़ रुपये बचे रह गए, इसमें 1 हजार 527 करोड़ रुपये बजट में प्रावधान के बावजूद खर्च नहीं हो सके और लैप्स हो गए। बाकी, 19 हजार 807 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए गए, लेकिन इनमें से 19 हजार167 करोड़ रुपये आखिरी दिन, यानि 31 मार्च 2020 को सरेंडर किए गए। जिसके चलते इसका कहीं और उपयोग नहीं हो सका।

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राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर सीएजी की एक रिपोर्ट गंभीर टिप्पणी करती है, उसके मुताबिक, साल 2019-20 विधानसभा में चार अनुदान और दो विनियोजन प्रस्ताव के जरिए जितनी अतिरिक्त राशि की खर्च की अनुमति ली गई, उससे 6 हजार 682 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च कर दिए गए। इसके अलावा, साल 2000-01 से 2018-19 तक, राज्य सरकार ने विधानसभा में प्रस्तुत बजट से 3 हजार 261 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए। जिन्हें अब तक नियमित नहीं किया जा सका है। 2019-20 के दौरान अलग-अलग विभागों ने 3 हजार 770 करोड़ के काम होना दिखाया है, लेकिन विभाग उसकी उपयोगिता प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सके।

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सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि साल 2017-18 से लेकर 2019-20 तक छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने 82 करोड, छत्तीसगढ़ पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 111 करोड़ और सूडा ने 500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। लेकिन राज्य सरकार ने इसे ऑफ बजट उधार में नहीं दिखाया। राजस्व में गड़बड़ी के खुलासे भी सीएजी रिपोर्ट में किए गए हैं। बताया गया कि 31 मार्च 2019 तक राज्य में 8 हजार 350 करोड़ रुपये बकाए थे। इनमें से 1 हजार 465 करोड़ तो पिछले पांच साल से नहीं वसूले गए हैं। 31 मार्च 2019 तक सीएजी की ओर से विभिन्न विभागों को जारी इंस्पेक्सन रिपोर्ट में 9 हजार 891 करोड़ रुपये राजस्व समाहित थे, जो अब तक जमा नहीं हुए हैं। 2018-19 में जारी इंस्पेक्शन रिपोर्ट में से 57% मामलों में विभाग ने कोई जवाब ही नहीं दिया। 28 बड़े केस में विभागों की ओर से कोई दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके चलते सीएजी धोखाधड़ी और जनता के धन के दुरुपयोग की आशंका जता रहा है।

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