भगवंत मान : पूर्व हास्य अभिनेता के लिए राजनीति हास्य का विषय नहीं

भगवंत मान : पूर्व हास्य अभिनेता के लिए राजनीति हास्य का विषय नहीं

: , January 18, 2022 / 08:49 PM IST

चंडीगढ़, 18 जनवरी (भाषा) ‘‘पहले, जब लोग मेरा चेहरा देखते थे, तब वे हंस उठते थे। आज जब लोग उनके समक्ष आ रही परेशानियों को मेरे सामने बयां करते हैं तो उनकी आंखें भर उठती है।’’ यह कहना है आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के प्रमुख भगवंत मान जिन्हें मंगलवार को राज्य में आप का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया।

मान यहां प्रेस वार्ता के दौरान बतौर हास्य अभिनेता अपने अतीत और एक राजनेता के रूप में अपने वर्तमान के अंतर को बयां कर रहे थे।

48 वर्षीय मान एक नेता के रूप में भी लोकप्रिय हैं। वह पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट से दो बार सांसद चुने जा चुके हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुनने के लिए आप की ओर से किए गए सर्वे में 93 प्रतिशत लोगों ने उनका समर्थन किया।

अक्तूबर 1973 में संगरूर के सातोज गांव में जन्मे मान ने सुनाम के शहीद ऊधम सिंह कॉलेज में बीकॉम में दाखिला लिया था। उन्होंने कोर्स तो पूरा नहीं किया, लेकिन कई युवा महोत्सवों में हिस्सा लेते रहे।

बाद में मान ने कई कॉमेडी वीडियो और म्यूजिक एल्बम पेश किए। वह कई पंजाबी फिल्मों में अभिनय करते भी नजर आए। इनमें ‘22जी तुस्सी घैंट हो’ और ‘पुलिस इन पॉलीवुड’ शामिल है।

हालांकि, 2000 के दशक में प्रसारित टीवी शो ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ बतौर हास्य कलाकार उनके कॅरियर में मील का पत्थर साबित हुआ। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी इस शो का हिस्सा थे, जो अब पंजाब चुनाव में प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं।

मोहाली में संवाददाताओं से बातचीत में मान ने कहा, ‘पहले लोग मुझे देखकर हंसते थे। अब बिल्कुल उल्टा है। जब भी मैं किसी बैठक या जनसभा में जाता हूं, लोग मुझसे रोकर अपना दर्द बयां करते हैं। वे कहते हैं कि हम बर्बाद हो चुके हैं, हमारे बच्चे बुरी संगत में हैं, हमें बचा लीजिए।’

मान के सियासी सफर की शुरुआत साल 2011 में हुई थी, जब वह मनप्रीत सिंह बादल के नेतृत्व वाली पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) से जुड़े थे। बादल ने शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद इस पार्टी का गठन किया था। बाद में पीपीपी का कांग्रेस में विलय हो गया था।

मान 2012 में संगरूर की लहरा विधानसभा सीट से बतौर पीपीपी प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। हालांकि, तब उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार रजिंदर कौर भट्टल के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

मान 2014 में आप में शामिल हो गए। उन्होंने संगरूर लोकसभा सीट पर दिग्गज अकाली नेता सुखबीर सिंह ढींढसा को टक्कर दी। इस दौरान वह दो लाख से भी अधिक वोटों से विजयी हुए। आप चार लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही।

मान ने 2017 में जलालाबाद विधानसभा सीट से अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार उन्हें जीत नसीब नहीं हुई। हालांकि, ‘आप’ 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में 20 सीटें हासिल कर मुख्य विपक्षी दल का तमगा हासिल करने में सफल रही। मान को पार्टी की पांजब इकाई का प्रमुख बना दिया गया।

वर्ष 2018 में आप संजोयक अरविंद केजरीवाल के मानहानि मामले में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांगने पर मान ने पंजाब इकाई का अध्यक्ष पद छोड़ दिया। सालभर बाद राज्य में पार्टी की कमान एक बार फिर उनके हाथों में चली गई। 2019 के लोकसभा चुनाव में मान संगरूर से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए। इस बार उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

पंजाब के राजनीतिक गलियारों में मान पर शराब की लत का शिकार होने के आरोप भी लगते रहे हैं। 2016 में ‘आप’ के तत्कालीन सांसद हरिंदर सिंह खालसा ने लोकसभा अध्यक्ष से अपनी सीट बदलने की गुजारिश की थी। खालसा ने आरोप लगाया था कि उनके बगल में बैठने वाले मान से शराब की बू आती है।

बरनाला में एक रैली के दौरान मान ने 2019 में केजरीवाल और अपनी मां की मौजूदगी में शराब छोड़ने का वादा किया था। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया था कि वे उन्हें ‘पैदाइशी शराबी’ के रूप में पेश कर बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।

भाषा पारुल माधव

माधव

 

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