कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के चुनावी राजनीति में प्रवेश के लिए वायनाड को चुना |

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के चुनावी राजनीति में प्रवेश के लिए वायनाड को चुना

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के चुनावी राजनीति में प्रवेश के लिए वायनाड को चुना

:   Modified Date:  June 17, 2024 / 10:30 PM IST, Published Date : June 17, 2024/10:30 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) वर्ष 2019 में सक्रिय राजनीति में आने के बाद से प्रियंका गांधी वाद्रा के कभी अमेठी, तो कभी रायबरेली और यहां तक की वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर समय-समय पर अटकलें लगाई जाती रहीं, लेकिन कांग्रेस के उन्हें वायनाड सीट से उपचुनाव में मैदान में उतारने की घोषणा के बाद अब इनपर विराम लग गया है।

कांग्रेस ने सोमवार को फैसला किया कि राहुल गांधी रायबरेली के सांसद बने रहेंगे और वायनाड सीट से इस्तीफा देंगे। केरल की वायनाड सीट से राहुल गांधी ने लगातार दो बार जीत दर्ज की।

राहुल ने 2019 में वायनाड से पहली बार आसानी से जीत हासिल की थी, जब उन्हें परिवार के गढ़ अमेठी में हार का सामना करना पड़ा था। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में, राहुल ने फिर से वायनाड से चुनाव लड़ा, लेकिन अमेठी छोड़कर रायबरेली चले गए।

अमेठी, रायबरेली और वाराणसी संसदीय सीट से उम्मीदवारी की चर्चा के बाद प्रियंका (52) अंततः केरल के वायनाड से चुनावी राजनीति में पदार्पण करेंगी। केरल एक ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस ने 2019 के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है।

प्रियंका गांधी ने सोमवार को अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद कहा, ‘मुझे जरा भी घबराहट नहीं है… मैं बहुत खुश हूं कि मुझे वायनाड का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि मैं उन्हें (वायनाड की जनता) उनकी (राहुल की) अनुपस्थिति महसूस नहीं होने दूंगी… मेरा रायबरेली से अच्छा नाता है, क्योंकि मैंने वहां 20 साल तक काम किया है और यह रिश्ता कभी नहीं टूटेगा।’

प्रियंका गांधी की शादी व्यवसायी रॉबर्ट वाद्रा से हुई है, जिन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले अमेठी से चुनाव लड़ने की इच्छा कई बार जतायी थी। इस सीट से अंततः परिवार के करीबी किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारा गया, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता स्मृति ईरानी को हराया।

यदि प्रियंका गांधी लोकसभा उपचुनाव जीत जाती हैं, तो यह पहली बार होगा कि सोनिया, राहुल और प्रियंका तीनों संसद में होंगे। सोनिया गांधी फिलहाल राजस्थान से राज्यसभा सदस्य हैं।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के आश्चर्यजनक रूप से अच्छे प्रदर्शन के साथ, प्रियंका गांधी वाद्रा ने पार्टी के एक करिश्माई नेता के रूप में अपनी स्थिति भी मजबूत कर ली है।

‘‘24 अकबर रोड: ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द पीपल बिहाइंड द फॉल एंड राइज ऑफ द कांग्रेस’’ सहित कई किताबें लिखने वाले रशीद किदवई ने कहा, ‘‘कांग्रेस लंबे समय से एक प्रभावी प्रचारक की तलाश में थी और 2024 के चुनाव में प्रियंका गांधी ने जिस तरह से मोदी को जवाब दिया है, वह आश्चर्यजनक विकल्प के तौर पर उभरी हैं। प्रियंका गांधी ने दिखाया कि मोदी का मुकाबला किया जा सकता है और उन्होंने पूरे भारत में कांग्रेस के लिये चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।’

राजनीतिक टिप्पणीकार और कांग्रेस के पूर्व नेता संजय झा ने प्रियंका गांधी को ‘शानदार प्रचारक’ बताया। उन्होंने कहा, ‘मोदी के कटाक्षों का तीखा और त्वरित जवाब देकर उन्होंने प्रचार के दौरान कमाल कर दिया। उनकी मौजूदगी जादुई रही है।’ लोकसभा चुनाव में ‘इंडिया’ गठबंधन ने 543 में से 234 सीट जीतीं, जबकि 99 सीट जीतकर कांग्रेस विपक्षी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। कांग्रेस चुनाव अभियान में जोरदार वापसी करती दिखी और प्रियंका ने मोदी और भाजपा के अन्य नेताओं के लगातार हमलों का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभायी।

प्रधानमंत्री मोदी के ‘सोने और मंगलसूत्र’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए भावुक प्रियंका ने मतदाताओं को याद दिलाया कि उनकी मां सोनिया गांधी ने देश के लिए अपना मंगलसूत्र बलिदान कर दिया।

अटकलें तेज़ थीं, क्योंकि उन्होंने जो कुछ भी कहा वह सुर्खियों में रहा। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उस समय चुनावी मैदान में उतरने का फैसला नहीं किया, लेकिन 2014 और 2019 के नतीजों की तुलना में पार्टी को संसद में मजबूत स्थिति में पहुंचाने के बाद उन्होंने वायनाड से उपचुनाव लड़ने का फैसला किया है।

अपने बचपन, पिता राजीव गांधी की हत्या के दर्द और मां के दुख पर चर्चा करते हुए उन्होंने कांग्रेस के अभियान की कमान संभाली, पारिवारिक संबंधों और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर चर्चा के बीच कुशलता से संतुलन बनाए रखा और एक रणनीतिकार, वक्ता और भीड़ को आकर्षित करने वाली नेता साबित हुईं।

उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में 108 जनसभाएं और रोडशो किये। उन्होंने 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में प्रचार किया और अमेठी और रायबरेली में कार्यकर्ताओं के दो सम्मेलनों को भी संबोधित किया।

उनके अधिकांश भाषण भीड़ से संवाद करने जैसे थे, जो लोगों से जुड़ाव स्थापित करते थे और लोगों को यह आभास देते थे कि यह कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसे वे जानते हैं, कोई ऐसा है, जो उनके साथ अपनी भावनाओं और विचारों को साझा कर रहा है।

देश भर में उनके चुनावी भाषणों में जवाबदेही का लगातार उल्लेख हुआ। प्रियंका गांधी ने लोगों से धर्म और जाति के आधार पर भावनात्मक मुद्दों पर वोट न करने और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए रोटी-रोज़ी के मुद्दों पर वोट करने की अपील की।

वर्ष 2019 से पहले प्रियंका ने अपनी मां और भाई के लिए चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाली। हाल के चुनाव में, राहुल ने वायनाड में 64.7 प्रतिशत वोट हासिल करके अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की एनी राजा को 3.64 लाख मतों के अंतर से हराया। भाजपा उम्मीदवार के सुरेंद्रन 1.3 लाख वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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