भारत अंटार्कटिका में नया अनुसंधान केंद्र बनाने की अपनी योजना से एटीसीएम को अवगत कराएगा |

भारत अंटार्कटिका में नया अनुसंधान केंद्र बनाने की अपनी योजना से एटीसीएम को अवगत कराएगा

भारत अंटार्कटिका में नया अनुसंधान केंद्र बनाने की अपनी योजना से एटीसीएम को अवगत कराएगा

:   Modified Date:  May 8, 2024 / 08:30 PM IST, Published Date : May 8, 2024/8:30 pm IST

नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) भारत इस महीने के अंत में कोच्चि में अंटार्कटिका के शासी प्राधिकरण की वार्षिक बैठक के दौरान बर्फीले महाद्वीप में एक नया अध्ययन केंद्र विकसित करने की अपनी योजना के बारे में औपचारिक रूप से अवगत कराएगा।

कोच्चि में 20-30 मई को 46वीं अंटार्कटिक संधि परामर्श बैठक (एटीसीएम) और पर्यावरण संरक्षण समिति (सीईपी) की 26वीं बैठक आयोजित की जाएगी, जहां दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में अनुसंधान में लगे देश भविष्य की योजनाएं और अपनी वैज्ञानिक गतिविधियों के परिणाम साझा करेंगे।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव एम रविचंद्रन ने यहां ‘पीटीआई’ के संपादकों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘इस साल, हम एटीसीएम को सूचित करेंगे कि हम अपने अनुसंधान केंद्र मैत्री के पुनरुद्धार की योजना बना रहे हैं। पुनरुद्धार का मतलब है, मैत्री केंद्र बहुत पुराना है, हमें फिर से निर्माण करना होगा।’’

अंटार्कटिका में भारत के दो अनुसंधान केंद्र-मैत्री और भारती चालू हैं। 1983 में स्थापित पहला अनुसंधान केंद्र दक्षिण गंगोत्री बर्फ में समा गया था।

मैत्री को लगभग 35 साल पहले बनाया गया था। वैज्ञानिक समुदाय के बीच इसे एक गांव कहा जाता है, जबकि 12 साल पुराना भारती एक अत्याधुनिक केंद्र है जिसमें एक लक्जरी होटल की सभी सुविधाएं हैं, लेकिन ज्यादा कर्मी नहीं रह सकते।

एक बार मैत्री-2 अनुसंधान केंद्र बन जाने के बाद मैत्री स्टेशन को ग्रीष्मकालीन शिविर में बदल दिया जाएगा और यादगार स्थल के रूप में नामित किया जाएगा।

एटीसीएम के एजेंडे में अंटार्कटिका में पर्यटन को विनियमित करने की भी योजना है। यह महाद्वीप अंटार्कटिक संधि व्यवस्था (एटीएस) द्वारा शासित है जिस पर 1961 में हस्ताक्षर किए गए थे।

रविचंद्रन ने कहा, ‘‘अंटार्कटिका में पर्यटन को ठीक से विनियमित नहीं किया गया है, इसलिए इस वर्ष इसके विनियमन पर चर्चा होने वाली है।’’

पर्यटन पर आखिरी बड़ा निर्णय 2009 में लिया गया था जब 500 से अधिक यात्रियों को ले जाने वाले क्रूज जहाजों को अंटार्कटिका में उतरने से रोक दिया गया था।

एटीसीएम एजेंडा में अंटार्कटिका और उसके संसाधनों के स्थायी प्रबंधन के लिए रणनीतिक योजना शामिल है। इसके अलावा नीति, सूचना और डेटा का निरीक्षण और आदान-प्रदान, अनुसंधान, सहयोग, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना, पर्यटन ढांचे का विकास और जागरूकता को बढ़ावा देना शामिल है।

भारत ने 46वें एटीसीएम के अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ राजनयिक और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन का नाम प्रस्तावित किया है।

इस वर्ष कोच्चि में लुलु बोलगट्टी इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एलबीआईसीसी) में राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्र अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) द्वारा आयोजित एटीसीएम और सीईपी बैठकों में 60 से अधिक देशों के 350 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।

भाषा आशीष माधव

माधव

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

Flowers