प्रयागराज, 27 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में अपनी रजिस्ट्री को आधिकारिक रिकॉर्ड या प्रक्रियाओं में निचली अदालत जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि ये वाक्यांश सही कानूनी शब्दावली का प्रतिनिधित्व नहीं करते। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने एक आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि आधिकारिक रिकॉर्ड में ‘ट्रायल कोर्ट’ या संबंधित नामित न्यायालय का ही उपयोग किया जाए।
इस संबंध में, पीठ ने 24 अप्रैल को दिए अपने निर्णय में उच्चतम न्यायालय के 2024 के निर्णय का हवाला दिया जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि किसी भी अदालत का “निचली अदालत” के तौर पर उल्लेख करना संविधान के लोकाचार के विरुद्ध है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा था, “यह उचित होगा यदि इस अदालत की रजिस्ट्री निचली अदालतों का हवाला देना बंद करें। यहां तक कि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड को लोअर कोर्ट रिकॉर्ड (एलसीआर) के तौर पर संदर्भित नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय, इसे ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड (टीसीआर) के तौर पर संदर्भित किया जाना चाहिए।”
न्यायमूर्ति शाहिद ने कहा, उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित उक्त आदेश को देखते हुए निचली अदालत शब्द के स्थान पर ट्रायल कोर्ट या नामित अदालत शब्द का उपयोग किया जा सकता है। मौजूदा मामले में यह एससी-एसटी अधिनियम के अधीन विशेष अदालत है।
उच्च न्यायालय एससी-एसटी अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में समन आदेश और संपूर्ण आपराधिक मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
भाषा सं राजेंद्र रंजन
रंजन